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बसपा सरकार में बने पार्कों में घूमना, योगी सरकार ने किया महंगा
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 11 Aug 2017 11:09 AM IST
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अंबेडकर पार्क
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बसपा सरकार में बनाए गए पार्कों और स्मारकों में घूमना अब योगी सरकार के कार्यकाल में दो गुना तक महंगा हो गया है। स्मारकों, संग्रहालयों, संस्थाओं, पार्कों व उपवनों आदि की देखरेख के लिए बनी प्रबंधन, सुरक्षा और अनुरक्षण समिति की बोर्ड बैठक में बृहस्पतिवार को यह फैसला लिया गया।
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बोर्ड के फैसले के मुताबिक अब पर्यटकों और घूमने आने वाले स्थानीय लोगों के लिए बौद्ध विहार में टिकट पांच रुपये की जगह 10 रुपये और बाकी जगह 10 रुपये की जगह 15 रुपये हो जाएगी।
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प्रमुख सचिव आवास मुकुल सिंघल की अध्यक्षता में हुई बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि 18 अक्टूबर 2011 को पिछली बार टिकट की दर बढ़ाने पर फैसला हुआ था। इसके बाद पार्क और स्मारकों में आने-जाने के लिए वही दर चल रही थी।
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पिछले दिनों में स्मारक समिति के अधीन पार्क और स्मारकों के मेंटेनेंस पर बढ़े खर्च को देखते हुए आय के स्रोत बढ़ाए जाने की जरूरत थी। ऐसे में विजिटर्स के लिए लगाई गई टिकट की दर को भी बढ़ाने का फैसला लिया गया।
एक लाख प्रतिमाह विजिटर्स
अंबेडकर पार्क
स्मारक समिति के पदाधिकारियों के मुताबिक 2016-17 के 1.99 करोड़ रुपये की तुलना में 2.50 करोड़ रुपये की आय इससे होने की उम्मीद है। स्मारक समिति के सदस्य सचिव और एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार से स्मारकों के मेंटेनेंस पर पिछले साल की तुलना में बजट में कटौती हुई है।
ऐसे में कॉर्पस फंड की ब्याज और टिकट से होने वाली आय से ही स्मारकों का मेंटेनेंस होना है। इस बीच मेंटेनेंस कराना महंगा हो गया है। ऐसे में आय बढ़ाए जाने की जरूरत थी।
इसके लिए दूसरे प्रयास भी किए गए हैं। टिकट दर को छह साल के बाद बढ़ाया गया है। ऐसे में यह बढ़ोतरी लंबे समय के बाद की गई है।
लखनऊ में स्मारक समिति के अधीन पार्क और स्मारकों में हर महीने 80,000 से एक लाख तक विजिटर्स घूमने आते हैं। 2017 के मई महीने के आंकड़े के मुताबिक 82,497 लोगों ने स्मारक समिति के पार्कों और स्थलों को देखने केलिए टिकट खरीदी।
2015-16 की तुलना में 2016-17 में यह आंकड़ा 15 प्रतिशत तक बढ़ा। अगर इस टिकट दर की बढ़ोतरी का आंकलन करें तो प्रति टिकट भले ही पांच रुपये की बढ़ोतरी हो। इसके उलट 10 या इससे अधिक के समूह में आने वाले लोगों के लिए यह बढ़ोतरी काफी अधिक हो जाएगी।
ऐसे में कॉर्पस फंड की ब्याज और टिकट से होने वाली आय से ही स्मारकों का मेंटेनेंस होना है। इस बीच मेंटेनेंस कराना महंगा हो गया है। ऐसे में आय बढ़ाए जाने की जरूरत थी।
इसके लिए दूसरे प्रयास भी किए गए हैं। टिकट दर को छह साल के बाद बढ़ाया गया है। ऐसे में यह बढ़ोतरी लंबे समय के बाद की गई है।
लखनऊ में स्मारक समिति के अधीन पार्क और स्मारकों में हर महीने 80,000 से एक लाख तक विजिटर्स घूमने आते हैं। 2017 के मई महीने के आंकड़े के मुताबिक 82,497 लोगों ने स्मारक समिति के पार्कों और स्थलों को देखने केलिए टिकट खरीदी।
2015-16 की तुलना में 2016-17 में यह आंकड़ा 15 प्रतिशत तक बढ़ा। अगर इस टिकट दर की बढ़ोतरी का आंकलन करें तो प्रति टिकट भले ही पांच रुपये की बढ़ोतरी हो। इसके उलट 10 या इससे अधिक के समूह में आने वाले लोगों के लिए यह बढ़ोतरी काफी अधिक हो जाएगी।