अडानी की कंपनी सहित छह डिफॉल्टर सौर ऊर्जा कंपनियों से योगी सरकार ने रद्द किया करार
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पावर कॉरपोरेशन ने छह सौर ऊर्जा कंपनियों से करार रद्द कर दिया है। वर्ष-2015 में इन कंपनियों से 80 मेगावाट की सौर परियोजनाएं लगाने का करार किया गया था, लेकिन ये कंपनियां समय पर परियोजनाएं लगाने में विफल रही। इसके मद्देनजर कॉरपोरेशन ने यह कार्रवाई की है। जबकि, नौ अन्य कंपनियों ने 135 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं लगा दी हैं।
जिन कंपनियों का करार रद्द किया गया है उनमें सुधाकर इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, टेक्निकल एसोसिएट्स लखनऊ, सहस्त्रधारा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड, अवध रबर प्रोप मद्रास इलास्टोमर लिमिटेड, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और पिनाकल एयर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड मशहूर उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी है।
दरअसल, वर्ष-2015 में यूपी नेडा ने 215 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने के लिए 15 विकासकर्ताओं का बिड के माध्यम से चयन किया था। उस समय 7.02 रुपये प्रति यूनिट से लेकर 8.60 रुपये प्रति यूनिट सौर ऊर्जा का टैरिफ आया था।
इन 15 कंपनियों से समय पर सौर ऊर्जा परियोजनाएं लगाने के लिए करार किया गया, लेकिन केवल नौ कंपनियां ही सौर ऊर्जा परियोजनाएं लगाने में सफल रहीं। पावर कॉरपोरेशन ने जब इस मामले की समीक्षा की तो छह कंपनियां डिफाल्टर निकलीं। अब करार खत्म करने का इनको नोटिस भेज दिया गया है।
सोलर पैनलों के दामों में कमी भी है एक बड़ी वजह
पावर कॉरपोरेशन का करार रद्द करने के पीछे सोलर पैनलों के दामों में बेहद कमी भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। पिछले दो वर्षों में सोलर पैनल के दामों में बेतहाशा कमी आई है। इस कारण देश भर में सौर ऊर्जा टैरिफ में भी गिरावट आई है।
वर्तमान में केंद्र सरकार की संस्था सेकी ने राजस्थान में सौर ऊर्जा परियोजना की स्थापना के लिए जो बिड डाली है उसमें न्यूनतम टैरिफ 2.44 रुपये प्रति यूनिट आया है। जबकि, वर्ष-2015 में यूपी में जो बिड हुआ था उसके रेट इससे कई गुना अधिक हैं।
केंद्र ने भी लगाई परियोजना स्थापना के समय विस्तार पर रोक
केंद्र सरकार के नवीन व नवीकरण ऊर्जा मंत्रालय ने प्रदेशों के ऊर्जा विभाग को अपने यहां सौर ऊर्जा उत्पादकों को किसी भी परिस्थिति में परियोजना की स्थापना के लिए समय विस्तार देने से मना कर दिया है।
इस संबंध में केंद्र ने तीन जुलाई-2017 को एक पत्र भी भेजा है। जबकि, ये छह कंपनियां परियोजना लगाने के लिए समय विस्तार की मांग कर रही थीं।