किशोरों से संबंधित अपराधों पर जल्द होगा फैसला, योगी कैबिनेट ने नियमावली को दी मंजूरी
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किशोरों पर होने वाले अपराध या किशोरों द्वारा किए जाने वाले अपराधों से संबंधित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए सरकार ने नई नियमावली को मंजूरी दी है।
केंद्रीय किशोर न्याय अधिनियम के स्थान पर नई नियमावली ‘किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख व संरक्षण) नियम-2019’ के प्रस्ताव को कैबिनेट ने पास कर दिया है। नई नियमावली के मुताबिक बच्चों के संरक्षण करने वाली संस्थाओं का पंजीकरण अनिवार्य करते हुए बिना पंजीकरण के चलने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई के प्रावधान को और सख्त किया गया है। किशोरों से जुड़े अपराधों का वर्गीकरण करते हुए सभी स्तरों पर जवाबदेही भी तय गई है।
प्रदेश सरकार ने केंद्र द्वारा किशोरों के संबंध में लागू आदर्श नियम-2016 के प्रावधानों को शामिल करते हुए नई नियमावली तैयार की है। सरकार का मानना है कि नई नियमावली के लागू होने से प्रदेश में किशोरों के संरक्षण की कार्यवाही अधिक प्रभावी हो सकेगी।
सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि पूर्व में लागू अधिनियम में किशोरों से संबंधित कानून के क्रियान्वयन में व्यावहारिक कठिनाइयों के मद्देनजर नई नियमावली बनाई गई है। इसमें किशोरों के खिलाफ एवं किशोरों द्वारा किए जाने वाले अपराधों को सामान्य व जघन्य की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
अनाथ बच्चों को पात्र दंपतियों को दिया जाएगा गोद
नई नियमावली में दत्तक ग्रहण के संबंध में वर्तमान नियम में एक अलग अध्याय जोड़ा गया है। इसमें अनाथ बच्चों को पात्र दंपती को ही गोद देने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का प्रावधान किया गया है। इनके संरक्षण को निर्धारित प्रक्रियाओं के क्रियान्वयन के लिए 46 विस्तृत प्रारूप बनाए गए हैं।
शर्मा ने बताया कि नई नियमावली में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग को भी किशोर अपराध से जुड़े मामलों की मॉनीटरिंग का अधिकार दिया गया है।