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विश्व पशु दिवस: वन्यजीवों की जरूरतों के मुताबिक आकार ले रहा यूपी का ईको टूरिज्म, बाघों के लिए बफर रूट
Sun, 04 Oct 2026 01:04 PM IST
Bhupendra Singh
अक्षय कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अक्षय कुमार, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Sun, 04 Oct 2026 01:04 PM IST
सार
यूपी का ईको टूरिज्म वन्यजीवों की जरूरतों के मुताबिक आकार ले रहा है। बाघों के लिए बफर रूट, सारस के लिए वेटलैंड-कृषि क्षेत्र का सर्किट बन रहा है। प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित फीडिंग और रेस्ट एरिया विकसित हो रहा है। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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बाघ (सांकेतिक)
- फोटो : वन विभाग
विस्तार
उत्तर प्रदेश में ईको टूरिज्म का विस्तार पर्यटकों तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटन विभाग वन्यजीवों की जरूरतों के अनुरूप पर्यटन स्थलों का विकास कर रहा है। बफर सफारी से वेटलैंड सर्किट तक बाघ, सारस और प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक व्यवहार के अनुरूप सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि पर्यटन बढ़े और वन्यजीवों को भी नुकसान न पहुंचे।
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बाघों के लिए बफर रूट, सारस के लिए वेटलैंड और कृषि क्षेत्रों को जोड़कर सर्किट तैयार किए जा रहे हैं। प्रवासी पक्षियों के लिए वॉचटावर, नेचर ट्रेल, सुरक्षित फीडिंग व रेस्ट एरिया बनाए जा रहे हैं। रामसर साइट और तितली गार्डेन को ईको टूरिज्म केंद्र बनाया जा रहा है। बाघों के लिए शांति व सुरक्षित दूरी, सारस के लिए वेटलैंड-खेत, प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित फीडिंग व रेस्टिंग एरिया और तितलियों के लिए उपयुक्त पौधे जरूरी हैं। बच्चों और युवाओं को इन स्थलों से जोड़कर वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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रामसर साइट्स बन रहीं बर्ड डेस्टिनेशन
प्रदेश के वेटलैंड ईको टूरिज्म केंद्र बन रहे हैं। आगरा की सूर सरोवर बर्ड सेंक्चुरी और मुजफ्फरनगर के हैदरपुर वेटलैंड में नेचर ट्रेल, वॉचटावर और इंटरप्रिटेशन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि पर्यटक बिना दखल पक्षियों को देख सकें। रायबरेली की समसपुर बर्ड सेंक्चुरी, संतकबीरनगर की बखिरा झील, कौशांबी की अलवारा झील और शामली की मामौर झील समेत अन्य वॉटर बॉडी को भी ईको टूरिज्म से जोड़ा जा रहा है।पर्यटन के साथ रोजगार पर जोर
ईको टूरिज्म में स्थानीय भागीदारी अहम है। होमस्टे, स्थानीय गाइड, नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर, स्थानीय भोजन, परिवहन और गांव आधारित अनुभवों के जरिये आसपास के समुदायों को पर्यटन से जोड़ा जा रहा है। इससे संरक्षण के साथ रोजगार व स्वरोजगार बढ़ाने का प्रयास है।
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एक नजर में यूपी का ईको टूरिज्म
प्रदेश में 4 टाइगर रिजर्व और 13 रामसर साइट्स हैं। वर्ष 2022 में ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड का गठन हुआ। वर्ष 2018 से 2022 के बीच प्रदेश में बाघों की संख्या में 18 प्रतिशत वृद्धि हुई और वर्ष 2022 में यह संख्या 200 से अधिक रही। दुधवा में 50 से अधिक गैंडे हैं। बलिया का सुरहा ताल भारत की 100वीं रामसर साइट बना।जंगल से चिड़ियाघर तक बढ़ी पर्यटकों की रौनक
लखनऊ चिड़ियाघर में वर्ष 2023-24 में 11.38 लाख, 2024-25 में 10.99 लाख, 2025-26 में 12.99 लाख और 2026 में अब तक करीब 4.65 लाख पर्यटक आए। दुधवा टाइगर रिजर्व में 2023-24 में 51,195, 2024-25 में 58,053 व 2025-26 में 76,411 पर्यटक और पीलीभीत टाइगर रिजर्व में क्रमश: 54,378, 56,289 व 56,783 पर्यटक आए।
पर्यटन को वन्यजीवों की जरूरतों के मुताबिक ढलना चाहिए, न कि वन्यजीवों को पर्यटन के हिसाब से खुद को बदलने के लिए मजबूर किया जाए। पर्यटन विकास ऐसा हो, जो वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार, प्रजनन काल, भोजन, पानी और आश्रय की जरूरतों का सम्मान करे। -जयवीर सिंह, पर्यटन व संस्कृति मंत्री