खेलते वक्त लगी चोट को न करें नजरअंदाज, बन सकती है बड़ी बीमारी की वजह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यह कहना है केजीएमयू के फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार गुप्ता का। वह विभाग में ऑर्थोटिक प्रोस्थेटिक एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ओपाई) के यूपी चैप्टर की ओर से ऑर्थोटिक मैनेजमेंट ऑफ स्पोर्ट्स रिलेटेड एन्जरी पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
प्लास्टिक के उपकरण ज्यादा आरामदेह
डॉ. गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर खिलाड़ियों के साथ यह समस्या ज्यादा आती है। करीब 40 फीसदी खिलाड़ी चोट को नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य में उनके कॅरिअर पर असर डालने लगती है। इस दौरान लिंब सेंटर की कार्यशाला की ओर से तैयार किए गए विभिन्न उपकरणों की जानकारी दी गई।
ये उपकरण पहले लकड़ी और लोहे से तैयार किए जाते थे। अब उन्हें प्लास्टिक से तैयार किया जा रहा है। प्लास्टिक के उपकरण कम वजनी होने की वजह से ज्यादा आरामदेह हैं।
उपकरण की फिटनेस पर दें ध्यान
चोट लगने पर यदि मरीज को उपकरण पहना रहे हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि वह मरीज केलिए कितना आरामदायक है। उपकरण पहनने पर त्वचा में लालपन होने पर तत्काल चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए। उपकरण कहीं से दबाव डाल रहा हो या उसकी वजह से शरीर के दूसरे हिस्से में दर्द हो रहा हो तो भी डॉक्टर और उपकरण बनाने वाले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
- शगुन सिंह, प्रोस्थेटिक ऑर्थोटिक विशेषज्ञ
चौड़े पंजे वाला जूता लें, नहीं होगा पैर व कमर में दर्द