{"_id":"5dbab4d78ebc3e93c52f1b4d","slug":"work-on-nh-24-will-began-from-next-month-which-will-connect-lucknow-nad-delhi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ से दिल्ली को जोड़ने वाले एनएच-24 पर अगले महीने शुरू हो जाएगा काम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ से दिल्ली को जोड़ने वाले एनएच-24 पर अगले महीने शुरू हो जाएगा काम
Thu, 31 Oct 2019 03:55 PM IST
Amulya Rastogi
अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Thu, 31 Oct 2019 03:55 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ से दिल्ली को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-24 पर अगले महीने से काम शुरू होगा। नौ साल से फंसे इस प्रोजेक्ट को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हरी झंडी दे दी है। 800 करोड़ रुपये की लागत से सीतापुर और बरेली के बीच 157 किलोमीटर लंबी रोड को एक ही पैकेज में बनाने के लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। चूंकि वर्तमान में यह सड़क वाहनों के चलने लायक नहीं है, इसलिए सबसे पहले इसे मोटर चलने लायक बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
एनएच-24 को बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) मोड में फोरलेन करने के लिए वर्ष 2010 में टेंडर किए गए थे। सीतापुर से बरेली के बीच फॉरेस्ट और प्रदेश सरकार की एनओसी न मिलने से प्रोजेक्ट अटक गया, जबकि लखनऊ से सीतापुर और बरेली से दिल्ली के बीच निर्माण काफी पहले पूरा हो चुका है।
सीतापुर से बरेली के बीच कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली कंपनी एरा इन्फ्रा को एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल) के दिवालिया घोषित होने से यह प्रोजेक्ट फंस गया था। एरा को बैंक से मिलने वाली मदद पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। नतीजतन, एनएचएआई को अप्रैल 2019 में पूरा अनुबंध रद्द करना पड़ा।
विज्ञापन
लखनऊ से सीतापुर, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर और मुरादाबाद और अमरोहा होते हुए दिल्ली को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है। यात्रियों के अलावा माल की आवाजाही भी इस मार्ग से खूब होती है। 510 किलोमीटर लंबी इस सड़क का 157 किलोमीटर हिस्सा मरम्मत के अभाव में वाहनों के चलने लायक नहीं है। इस रोड से व्यापारियों के लिए ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट काफी ज्यादा हो गई है और आए दिन हादसे होते रहते हैं। इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।
विज्ञापन
एनएच-24 को बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) मोड में फोरलेन करने के लिए वर्ष 2010 में टेंडर किए गए थे। सीतापुर से बरेली के बीच फॉरेस्ट और प्रदेश सरकार की एनओसी न मिलने से प्रोजेक्ट अटक गया, जबकि लखनऊ से सीतापुर और बरेली से दिल्ली के बीच निर्माण काफी पहले पूरा हो चुका है।
विज्ञापन
सीतापुर से बरेली के बीच कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली कंपनी एरा इन्फ्रा को एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल) के दिवालिया घोषित होने से यह प्रोजेक्ट फंस गया था। एरा को बैंक से मिलने वाली मदद पर भी पाबंदी लगा दी गई थी। नतीजतन, एनएचएआई को अप्रैल 2019 में पूरा अनुबंध रद्द करना पड़ा।
विज्ञापन
लखनऊ से सीतापुर, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर और मुरादाबाद और अमरोहा होते हुए दिल्ली को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग है। यात्रियों के अलावा माल की आवाजाही भी इस मार्ग से खूब होती है। 510 किलोमीटर लंबी इस सड़क का 157 किलोमीटर हिस्सा मरम्मत के अभाव में वाहनों के चलने लायक नहीं है। इस रोड से व्यापारियों के लिए ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट काफी ज्यादा हो गई है और आए दिन हादसे होते रहते हैं। इस समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया।
आईटम रेट पर काम को मंजूरी, लागत मात्र 800 करोड़
प्रदेश सरकार ने एनएचएआई से सड़क जल्द ठीक करने के लिए कई दौर की बातचीत की। इसी का नतीजा है कि एनएचएआई ने आईटम रेट पर काम कराने के लिए मंजूरी दे दी है। मतलब, कॉन्ट्रैक्टर जितना काम करेगा, उसी के अनुपात में पेमेंट होगा। सड़क की लागत 800 करोड़ रुपये है। कान्ट्रैक्ट सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन और दो अन्य फर्म्स के ज्वाइंट वेंचर (संयुक्त उपक्रम) को दिया गया है।
कंस्ट्रक्शन फर्म्स को कार्य स्वीकृति प्रमाणपत्र जारी
कंस्ट्रक्शन फर्म को एलओए (लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस) यानी कार्य स्वीकृति का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया है। फर्म के बैंक गारंटी जमा करते ही उन्हें लेटर ऑफ स्टार्ट वर्क (एलओएस) मिलेगा। एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल वासिद ने बताया कि नवंबर के अंत तक निर्माण शुरू हो जाएगा। यहां बता दें कि पहले इस कार्य को तीन अलग-अलग पैकेज में कराने की योजना थी, पर उच्चस्तर पर वार्ता के बाद इसे तीन फर्म्स के ज्वाइंट वेंचर को देने का निर्णय लिया गया।
एनएचएआई की इस सड़क की हालत काफी खराब है। इसे ठीक करने के लिए लगातार एनएचएआई के चेयरमैन समेत सभी संबधित अधिकारियों से कई दौर की वार्ता की है। अगले महीने इस पर काम शुरू हो जाएगा।
-नितिन रमेश गोकर्ण, प्रमुख सचिव, पीडब्ल्यूडी
कंस्ट्रक्शन फर्म्स को कार्य स्वीकृति प्रमाणपत्र जारी
कंस्ट्रक्शन फर्म को एलओए (लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस) यानी कार्य स्वीकृति का प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया है। फर्म के बैंक गारंटी जमा करते ही उन्हें लेटर ऑफ स्टार्ट वर्क (एलओएस) मिलेगा। एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल वासिद ने बताया कि नवंबर के अंत तक निर्माण शुरू हो जाएगा। यहां बता दें कि पहले इस कार्य को तीन अलग-अलग पैकेज में कराने की योजना थी, पर उच्चस्तर पर वार्ता के बाद इसे तीन फर्म्स के ज्वाइंट वेंचर को देने का निर्णय लिया गया।
एनएचएआई की इस सड़क की हालत काफी खराब है। इसे ठीक करने के लिए लगातार एनएचएआई के चेयरमैन समेत सभी संबधित अधिकारियों से कई दौर की वार्ता की है। अगले महीने इस पर काम शुरू हो जाएगा।
-नितिन रमेश गोकर्ण, प्रमुख सचिव, पीडब्ल्यूडी