तीन तलाक मामले का असर: पर्सनल लॉ बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
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एक साथ तीन तलाक के मामले में पूरे देश में भ्रम दूर करने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई गई है। बोर्ड में लखनऊ समेत कई प्रदेशों की नौ नई महिला सदस्यों को शामिल किया गया है। इनको मुस्लिम महिलाओं को शरीयत में मिले अधिकार, निकाह व तलाक का सही अर्थ समझाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
तीन तलाक पर केंद्र की मोदी सरकार के मौजूदा रुख के खिलाफ मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने खुद ही मुस्लिम महिलाओं के बीच जाने का फैसला लिया है।
कोलकाता में बुलाए गए अधिवेशन केपहले दिन मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी की सदारत में शुक्रवार को शरीयत में महिलाओं के अधिकारों और तलाक के मामले में फैलाए जा रहे भ्रम पर चर्चा के साथ ही नौ महिलाओं को नया सदस्य बनाया गया।
बोर्ड का मानना है कि तीन तलाक शरीयत का हिस्सा है, इसमें किसी भी तरह का बदलाव मंजूर नहीं है। इस्लाम में मिले महिलाओं के हक, निकाह और तलाक के सही मायने मुस्लिम महिलाओं तक पहुंचाने के साथ ही उन्हें जागरूक करने की जिम्मेदारी बोर्ड महिलाओं को दी जा सकती है।
महिलाओं को मर्द के बराबर है हक
बोर्ड की इसलाहे मआशरा कमेटी की महिला विंग की संयोजक डा. आसमा जेहरा ने कहा कि शरीयत में मुसलमानों को कई तरह के अधिकार दिए गए हैं। इसमें निकाह और तलाक भी शामिल है।
निकाह के मौके पर मर्द से पहले औरत को ये हक दिया गया है कि वो निकाह के लिए अपनी सहमति जाहिर करे। अगर औरत निकाह से इन्कार कर दे तो लड़के के लाख चाहने पर भी शरई तौर पर निकाह नहीं हो सकता।
इसी तरह, मर्द और औरत को तलाक में भी बराबर का हक दिया गया है। कुरान ने जहां शौहर को तलाक देने का हक दिया है, वहीं बीवी को खुला या फस्खे निकाह के जरिये छुटकरा पाने का हक दिया है।
ये महिलाएं हैं बोर्ड की नई सदस्य
लखनऊ की निकहत फातिमा, अलीगढ़ की आमना रिजवान, बजरा निकहत, विजयवाड़ा की तबस्सुम, चेन्नई की फातिमा मुजफ्फर, मुंबई की सुमय्या नसीम, डॉ. आलिया, केरल की एएस जैनब, यासमीन फारूकी एडवोकेट।
बोर्ड में कुल 250 सदस्य
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में देश भर में कुल 250 सदस्य हैं। इसमें महिला सदस्यों की संख्या 45 है। बोर्ड की कार्यकारिणी 50 सदस्यों की है, जिसमें छह महिला सदस्य शामिल हैं। नई महिला सदस्य बनने के बाद महिलाओं की संख्या 54 हो गई है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्विरोध अध्यक्ष बने मौलाना राबे
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष पद पर मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी को पांचवी बार चुना गया। उनके खिलाफ अध्यक्ष पद के लिए किसी अन्य ने दावेदारी पेश नहीं की। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का सालानाअधिवेशन शुक्रवार से कोलकाता में शुरू हुआ है।
20 नवंबर तक चलने वाले अधिवेशन में तीन तलाक में सरकारी दखल के अलावा शरीयत की हिफाजत और मुस्लिम समाज की समस्याओं पर चर्चा होनी है। पहले दिन बोर्ड के अध्यक्ष पद का चुनाव किया गया।
हर तीन साल के बाद होने वाले बोर्ड के पदाधिकारियों के इस चुनाव में मौलाना राबे हसनी के विरोध में किसी ने भी दावेदारी पेश नहीं की। मौलाना हसनी से पहले मौलाना अबुल हसन अली हसनी नदवी (अली मियां) पांच बार बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं।
बोर्ड की कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने बताया कि मौलाना फखरुद्दीन अशरफ, मौलाना जलालुद्दीन उमरी, मौलाना सईद काका, मौलाना कल्बे सादिक बोर्ड के उपाध्यक्ष और मौलाना वली रहमानी को बोर्ड का महासचिव चुना गया। मौलाना महली ने बताया कि हैदराबाद के मौलाना खालिद सैफुल्ला और मौलाना अब्दुल रहीम मुजद्दीदी को सचिव चुना गया। बोर्ड की कार्यकारिणी में 51 सदस्य होंगे।
1972 में हुआ था बोर्ड का गठन
देश भर के मुसलमानों के सामाजिक मामलों की सर्वोच्च संस्था का गठन का फैसला 27-28 दिसंबर 1972 को मुंबई में हुए अधिवेशन में लिया गया।
इसके बाद सात अप्रैल 1973 को हैदराबाद में हुई बैठक में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का गठन हुआ, जिसमें मौलाना कारी तैय्यब कासमी अध्यक्ष और मौलाना सैय्यद मिन्नतुल्ला रहमानी महासचिव चुने गए थे।