यूपीः एक साथ पैदा हुए तीन बच्चे, दो के सिर जुड़े
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संजय गांधी पीजीआई में सोमवार को एक महिला ने तीन शिशुओं को एक साथ जन्म दिया। लगभग सवा घंटे तक चले सर्जरी के बाद तीनों बच्चों का सुरक्षित प्रसव कराया जा सका। बच्चों में दो लड़की और एक लड़का है।
प्रत्येक का वजन 1.4 किलोग्राम बताया जा रहा है। प्रसव के बाद लड़कियों का सिर आपस में जुड़ा देखकर चिकित्सक हैरत में पड़ गए। इनमें से एक की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
उन्नाव के भगवंत नगर निवासी 32 वर्षीय महिला कुछ दिन पहले एसजीपीजीआई के जेनेटिक्स विभाग में जांच के लिए आईं थी। वहां चिकित्सकों ने उसका अल्ट्रासाउंड कराया तो पता चला कि उसके गर्भ में तीन बच्चे पल रहे हैं।
रिपोर्ट देखने के बाद महिला को मेटेरनल एंड रिप्रोडक्टिव चाइल्ड हेल्थ विभाग में रेफर किया गया। जहां सात अगस्त को डॉ. अमृत गुप्ता ने जांच के बाद पाया कि उसे 30 सप्ताह का गर्भ था। खून की कमी के कारण वो काफी कमजोर हो गई थी।
पूरी जांच के बाद ये फैसला किया गया कि उसका प्रसव करा दिया जाए। जिससे जच्चा-बच्चा दोनों को बचाना संभव हो सकेगा। इसके बाद डॉ.अमृत ने महिला को भर्ती कर प्रसव की तैयारी शुरू की।
जांच में पता चला कि उसका हीमोग्लोबिन सिर्फ सात मिलीग्राम है। इसलिए सर्जरी की तैयारी के लिए दो यूनिट खून चढ़ाना पड़ा। जब उसकी स्थिति कुछ सुधरी तो सोमवार को प्रसव कराया गया।
डॉ.अमृत गुप्ता ने बताया कि इस तरह का केस 5 करोड़ में एक ही होता है। देश में इस तरह का यह पहला मामला सामने आया है। इसी साल टेक्सास में मई में इसी तरह का प्रसव का केस सामने आया था। इस मेडिकल भाषा में ‘कंजाइंड ट्विन इन ट्रिपलेट प्रेगनेंसी’कहा जाता है।
डॉक्टर्स के लिए भी बहुत चैलेजिंग रही ये डिलीवरी
डॉ.अमृत गुप्ता ने बताया कि महिला के गर्भ में तीन बच्चे होने के कारण प्रसव काफी कठिन था। महिला के पति का कुछ दिन पहले एक्सीडेंट हुआ था इसलिए वो सदमे में थी। उसका ब्लड प्रेशर भी स्थिर नहीं था।
इसके बावजूद जच्चा-बच्चा दोनों की जान बचाने के लिए सीजेरियन का फैसला किया गया। लगभग सवा घंटे की मेहनत के बाद तीनों बच्चों का प्रसव कराया गया। प्रसव महिला पहली बार मां बनी थी और उसने तीन बच्चों को जन्म दिया।
प्रसव के बाद उसे एक यूनिट खून और चढ़ाया गया। डॉ. अमृत ने बताया कि महिला को गर्भावस्था के कारण होने वाली उच्च रक्तचाप की बीमारी भी है। इसे प्रेगनेंसी इन्ड्स हाइपरटेंशन (पीआईएच) कहते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक बच्चे का वजन सामान्य से काफी कम है। बच्चियों के सिर आपस में जुड़े हैं। इनमें एक बच्ची की पैदाइशी विकृति के कारण आंत भी पूरी नहीं बनी है। जल्दी ही उसकी सर्जरी कर आंत का रास्ता बनाना पड़ेगा। सिर को अलग करने के लिए प्लास्टिक सर्जरी और न्यूरो सर्जरी विभाग के चिकित्सकों से मदद ली जाएगी।