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परिवार नियोजन अपनाने में महिलाएं पुरुषों से आगे, गर्भनिरोधक साधनों की मांग बढ़ी
Sat, 11 Jul 2020 01:49 PM IST
ishwar ashish
अमित यादव, अमर उजाला, लखनऊ
अमित यादव, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 11 Jul 2020 01:49 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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यूपी में महिलाएं पुरुषों की तुलना में परिवार नियोजन के प्रति ज्यादा गंभीर हैं। नसबंदी के आंकड़े, कॉपर टी, खाने वाली गोली और इंजेक्शन अंतरा का इस्तेमाल बढ़ना इसका प्रमाण है। वहीं, पुरुषों में नसबंदी के प्रति संजीदगी अब भी कम है। हालांकि पुरुष नसबंदी के मामले में पिछले वर्षों की तुलना में सुधार आया है।
एनएचएम की महाप्रबंधक फैमिली प्लानिंग डॉ. अल्पना शर्मा कहती हैं कि वर्ष 2018-19 के मुकाबले 2019-20 में परिवार नियोजन के साधनों की लोगों तक पहुंच बढ़ी है। साप्ताहिक दी जाने वाली गर्भनिरोधक गोली ‘छाया’ और इंजेक्शन ‘अंतरा’ की मांग में जबरदस्त वृद्धि हुई है। महिला नसबंदी में भी 7.32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रसव के बाद कॉपर टी लगाने में 14.95 प्रतिशत, सामान्य कॉपर टी लगाने में 22.44 प्रतिशत, खाने वाली गोलियों को बांटने में 25.55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
पुरुष नसंबदी में 45.96 प्रतिशत की वृद्धि
परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी साल 2018-19 के मुकाबले 45.96 प्रतिशत बढ़ी है। 2018-19 में कुल नसबंदी कराने वालों की संख्या 3905 थी। वहीं, 2019-20 में यह आंकड़ा बढ़कर 5693 हो गया। महिलाओं की तुलना में यह संख्या काफी कम है, लेकिन नसबंदी में पुरुषों की संख्या का बढ़ना सराहनीय माना जा रहा है।
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एनएचएम की महाप्रबंधक फैमिली प्लानिंग डॉ. अल्पना शर्मा कहती हैं कि वर्ष 2018-19 के मुकाबले 2019-20 में परिवार नियोजन के साधनों की लोगों तक पहुंच बढ़ी है। साप्ताहिक दी जाने वाली गर्भनिरोधक गोली ‘छाया’ और इंजेक्शन ‘अंतरा’ की मांग में जबरदस्त वृद्धि हुई है। महिला नसबंदी में भी 7.32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रसव के बाद कॉपर टी लगाने में 14.95 प्रतिशत, सामान्य कॉपर टी लगाने में 22.44 प्रतिशत, खाने वाली गोलियों को बांटने में 25.55 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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पुरुष नसंबदी में 45.96 प्रतिशत की वृद्धि
परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी साल 2018-19 के मुकाबले 45.96 प्रतिशत बढ़ी है। 2018-19 में कुल नसबंदी कराने वालों की संख्या 3905 थी। वहीं, 2019-20 में यह आंकड़ा बढ़कर 5693 हो गया। महिलाओं की तुलना में यह संख्या काफी कम है, लेकिन नसबंदी में पुरुषों की संख्या का बढ़ना सराहनीय माना जा रहा है।
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आंकड़ों के आईने में महिला-पुरुष नसबंदी
नसबंदी 2017-18 2018-19 2019-20
पुरुष 3884 3905 5693
महिला 258182 281955 301352
परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल
साधन 2017-18 2018-19 2019-20
कॉपर टी 300035 305250 354221
इंजेक्शन अंतर 23217 161365 345481
गोली छाया 213327 260600 686464
‘नसबंदी को लेकर पुरुषों में गलतफहमी’
केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. एसएन शंखवार कहते हैं कि भ्रांतियों के चलते पुरुष नसबंदी से कतराते हैं। इसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी है। पुरुषों को लगता है कि नसबंदी कराने से उनमें कमजोरी आ जाएगी, जबकि ऐसा नहीं है। मात्र 5 से 10 मिनट में बिना चीरा व टांके के छोटे से उपकरण से शुक्राणुओं को ले जाने वाली नली को बंद कर दिया जाता है। इससे महिला के अंडाणु से शुक्राणुओं का निषेचन नहीं हो पाता और वह गर्भवती नहीं होती। इस बंद नली को कभी भी खोला जा सकता है।
पुरुष 3884 3905 5693
महिला 258182 281955 301352
परिवार नियोजन के साधनों का इस्तेमाल
साधन 2017-18 2018-19 2019-20
कॉपर टी 300035 305250 354221
इंजेक्शन अंतर 23217 161365 345481
गोली छाया 213327 260600 686464
‘नसबंदी को लेकर पुरुषों में गलतफहमी’
केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. एसएन शंखवार कहते हैं कि भ्रांतियों के चलते पुरुष नसबंदी से कतराते हैं। इसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी है। पुरुषों को लगता है कि नसबंदी कराने से उनमें कमजोरी आ जाएगी, जबकि ऐसा नहीं है। मात्र 5 से 10 मिनट में बिना चीरा व टांके के छोटे से उपकरण से शुक्राणुओं को ले जाने वाली नली को बंद कर दिया जाता है। इससे महिला के अंडाणु से शुक्राणुओं का निषेचन नहीं हो पाता और वह गर्भवती नहीं होती। इस बंद नली को कभी भी खोला जा सकता है।