नसबंदी के दो साल बाद हुई गर्भवती, शिकायत पर डॉक्टरों ने धमकाया
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सीतापुर के रामकोट की एक महिला ने नसबंदी के बाद भी बच्ची को जन्म दिया है। प्रसव के लिए डॉक्टरों को उसका ऑपरेशन करना पड़ा है।
महिला का आरोप है कि प्रसव के बाद डॉक्टरों ने दोबारा नसबंदी की, लेकिन इस बार नसबंदी के कागज उसे नहीं दे रहे हैं। महिला ने इस संबंध में जिलाधिकारी व सीएमओ से शिकायत की है।
रामकोट के सतीश नगर निवासी अनुज श्रीवास्तव की पत्नी गंगा देवी की 25 जुलाई 2012 को नसबंदी की गई थी। जिसका कार्ड भी उसे दिया गया। कार्ड में दर्शाया गया है कि गंगा देवी की नसबंदी डॉ. कमलेश ने की है।
नसबंदी के बावजूद दो वर्ष बाद गंगा को गर्भ ठहर गया। उसका आरोप है कि जब वह शिकायत लेकर जिला अस्पताल पहुंची, तो डॉक्टरों ने धमकाना शुरू कर दिया। जिसकी वजह से वह कहीं शिकायत नहीं कर सकी।
गंगा का कहना है कि हाल ही में ढाई माह पूर्व उसे प्रसव पीड़ा हुई तब महिला अस्पताल के चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर बच्ची का जन्म कराया। उसके बाद फिर से उसकी नसबंदी कर दी।
गंगा का कहना है कि दोबारा नसबंदी के कागजात महिला अस्पताल प्रशासन उसे नहीं दे रहा है। वहीं शिकायत करने पर अस्पताल प्रशासन उसे देख लेने की धमकी भी दे रहा है।
महिला ने इस संबंध में जिलाधिकारी व सीएमओ को शिकायती पत्र भेजकर शिकायत की है। महिला का कहना है क डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उसकी जान पर बन आई।
जानें, क्या बोले डॉक्टर
महिला अस्पताल की सीएमएस सुषमा कर्णवाल का कहना है, नसबंदी के तीन माह के अंदर यदि महिला ने संपर्क किया होता, तब समस्या का निदान किया जा सकता था। सरकार की तरफ से 30 हजार रुपये की आर्थिक मदद भी दिलाई जाती।
हो सकता है कि महिला तीन माह के बाद ही अस्पताल पहुंची हो। दोबारा नसबंदी की बात पर रिकार्ड देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।
सीएमओ डॉ. हरगोविंद सिंह, मामला संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलने पर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।