फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   woman farmers raise voice for rights

‘संसद’ में गूंजेगी महिला किसानों की आवाज

Tue, 26 Nov 2013 11:03 PM IST
अतुल भारद्वाज/लखनऊ
अतुल भारद्वाज/लखनऊ Updated Tue, 26 Nov 2013 11:03 PM IST
विज्ञापन
woman farmers raise voice for rights

यूपी के ग्रामीण इलाकों में 79 प्रतिशत महिलाएं खेती के काम में सहयोग करती हैं।

विज्ञापन


इसके बाद भी सरकारी आंकड़ों और सामाजिक स्तर पर उन्हें कृषक का दर्जा नहीं मिलता। महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए ‘महिला किसान संसद’ में उनकी आवाज गूंजेगी।

यह कवायद 2014 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित अंतरराष्ट्रीय कृषि परिवार वर्ष के लिए रहेगी।

महिला संसद और दूसरे कार्यक्रमों की जानकारी मंगलवार को ऑक्सफेम इंडिया और गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप (जीईएजी) के पदाधिकारियों ने एक प्रेसवार्ता में दी।
विज्ञापन


मां के गढ़ में हुई राहुल की फजीहत
विज्ञापन
विज्ञापन


जीईएजी की संयोजक नीलम प्रभात ने बताया कि ग्रामसभा में जागरूकता बैठक से लेकर लखनऊ में महिला किसान संसद और पैदल मार्च कार्यक्रम रहेगा। महिला सशक्तिकरण के लिए जरूरी है कि उन्हें ‘महिला कृषक’ का दर्जा दिया जाए।

संयुक्त राष्ट्र ने चुनी थीम
ऑक्सफेम इंडिया के कार्यक्रम समन्वयक फारूख रहमान ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र के फूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ) ने 2014 को विश्व कृषि परिवार वर्ष के रूप में चुना है।

कृषि परिवार का मतलब उन किसानों से है जो कि प्रत्यक्ष तौर पर कृषि पर जीवन निर्वाह के लिए आश्रित हैं।

एफएओ के आंकड़ों के मुताबिक 43 प्रतिशत महिलाएं भारत जैसे विकासशील देशों में खेती में मदद करती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed