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Lucknow News: विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का फैसला वापस लें
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लखनऊ। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला काउंसिल ने विद्युत वितरण निगमों का निजीकरण किए जाने के सरकार के फैसले पर नाराजगी जताई है। पार्टी के जिला सचिव परमानंद की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार को डीएम से मुलाकात कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रेषित ज्ञापन सौंपा। इसमें दक्षिणांचल और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के फैसले को वापस लेने की मांग की गई।
परमानंद ने बताया कि जिला काउंसिल के पदाधिकारियों की बैठक में प्रस्ताव पारित कर निजीकरण के विरोध में होने वाले बिजली कर्मचारी संगठनों के प्रदर्शन का समर्थन का निर्णय लिया गया। कहा कि निगमों के निजीकरण से मध्यम व गरीब जनता का विद्युत उपयोग करना असंभव हो जाएगा। किसानों को मिलने वाली मुफ्त बिजली पर रोक लग जाएगी। विभाग के नियमित व संविदा कर्मियों की रोजी-रोटी चली जाएगी।
कहा कि घाटे के नाम पर किया जा रहा निजीकरण मात्र दिखावा है। सरकारी आकड़ों के मुताबिक एक लाख पंद्रह हजार करोड़ रुपये उपभोक्ताओं पर बकाया है। इसमें सबसे अधिक बकाया सरकारी संस्थानों पर है। घाटे की रकम मात्र 1.10 लाख करोड़ रुपये है। दोनों निगमों की परिसंपत्तियां 88 हजार करोड़ है, लेकिन मात्र आठ हजार करोड़ तथा पंद्रह हजार करोड़ में दोनों निगमों को निजी हाथों में दिया जा रहा है।
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प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय परिषद की सदस्य कांती मिश्रा, ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. डीवीके सिंह, महामंत्री चंद्रशेखर, पार्टी के जिला सहायक सचिव मास्टर सत्यनरायन, राज्य काउंसिल सदस्य मुख्तार अहमद, एसके सचान, ओपी सिंह, राम भजन मौर्य, ओम प्रकाश, बीबी लाल और आनंद कुमार थे।
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परमानंद ने बताया कि जिला काउंसिल के पदाधिकारियों की बैठक में प्रस्ताव पारित कर निजीकरण के विरोध में होने वाले बिजली कर्मचारी संगठनों के प्रदर्शन का समर्थन का निर्णय लिया गया। कहा कि निगमों के निजीकरण से मध्यम व गरीब जनता का विद्युत उपयोग करना असंभव हो जाएगा। किसानों को मिलने वाली मुफ्त बिजली पर रोक लग जाएगी। विभाग के नियमित व संविदा कर्मियों की रोजी-रोटी चली जाएगी।
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कहा कि घाटे के नाम पर किया जा रहा निजीकरण मात्र दिखावा है। सरकारी आकड़ों के मुताबिक एक लाख पंद्रह हजार करोड़ रुपये उपभोक्ताओं पर बकाया है। इसमें सबसे अधिक बकाया सरकारी संस्थानों पर है। घाटे की रकम मात्र 1.10 लाख करोड़ रुपये है। दोनों निगमों की परिसंपत्तियां 88 हजार करोड़ है, लेकिन मात्र आठ हजार करोड़ तथा पंद्रह हजार करोड़ में दोनों निगमों को निजी हाथों में दिया जा रहा है।
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प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय परिषद की सदस्य कांती मिश्रा, ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. डीवीके सिंह, महामंत्री चंद्रशेखर, पार्टी के जिला सहायक सचिव मास्टर सत्यनरायन, राज्य काउंसिल सदस्य मुख्तार अहमद, एसके सचान, ओपी सिंह, राम भजन मौर्य, ओम प्रकाश, बीबी लाल और आनंद कुमार थे।