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पत्नी ने लिवरदान कर बचाई पति की जान
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लिवर देकर बचाई पति की जान, क्रोनिक लिवर रोग से ग्रसित था व्यापारी
केजीएमयू में शनिवार को छठा लिवर प्रत्यारोपण किया गया। रायबरेली रोड निवासी व्यापारी मनोज कुमार द्विवेदी (42) को पत्नी सरोज द्विवेदी (42) ने लिवर दान किया।
प्रत्यारोपण में करीब 10 घंटे लगे। मरीज और डोनर दोनों की हालत स्थिर है। डॉक्टरों की टीम करीब 48 घंटे तक इनकी निगरानी रखेगी।
मनोज वर्ष 2010 में बीमार हुए। जांच में फैटी लिवर बताया गया। इलाज शुरू हुआ, लेकिन आराम नहीं मिला।
वर्ष 2015 में दिल्ली में जांच कराई तो पता चला कि लिवर सिरोसिस हो गया है। इसके बाद दिल्ली और एसजीपीजीआई में इलाज कराते रहे।
फिर केजीएमयू में गैस्ट्रोइंटोलॉजी सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. अभिजीत चंद्रा से संपर्क किया। उन्होंने लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत बताई।
जुलाई में पंजीयन के बाद डोनर की तलाश हुई। मरीज के भाई ने लिवर दान की इच्छा जताई, लेकिन मैचिंग नहीं हो पाई।
इसके बाद बेटे, चचेरे भाई सहित परिवार के कई लोगों के टेस्ट हुए, पर सफलता न मिली। अंत में पत्नी की जांच की गई तो मैचिंग हो गई। इस पर तय किया गया कि पत्नी के लिवर का लोब लेकर प्रत्यारोपण किया जाएगा।
तीन दिन पहले सभी जांच करने के बाद गैस्ट्रोइंटोलॉजी सर्जरी विभाग में भर्ती किया गया। शनिवार सुबह करीब सात बजे ट्रांसप्लांट शुरू हुआ। शाम करीब पांच बजे प्रक्रिया पूरी हुई।
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गंभीर संक्रमण की वजह से थीं समस्याएं
केजीएमयू की मीडिया प्रभारी डॉ. शीतल वर्मा ने बताया कि इस प्रत्यारोपण में कई तरह की चुनौतियां थीं। अब तक हुए पांच प्रत्यारोपण की अपेक्षा यह कठिन था। मरीज और उसके परिवारीजनों के ब्लड ग्रुप और टिश्यू का मिलान नहीं हो पा रहा था। दूसरी ओर मरीज गंभीर संक्रमण का शिकार था। उसके पेट में बार-बार पानी भर जा रहा था। इस वजह से तत्काल लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत थी।
ट्रांसप्लांट करने वाली टीम
यह प्रत्यारोपण केजीएमयू और मैक्स हॉस्पिटल, साकेत की टीम ने संयुक्त रूप से किया है। इसमें केजीएमयू सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. प्रदीप जोशी, एनेस्थिसिया से डॉ. अनीता मलिक, डॉ. जीपी सिंह, डॉ. मोहम्मद परवेज, डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. मनोज, डॉ. अनित परिहार एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की डॉ. तूलिका चंद्रा, ग्रैस्ट्रोमेडिसिन विभाग के डॉ. सुमित रूंगटा, डॉ. अजेय कुमार, डॉ. प्रशांत, डॉ. शीतल वर्मा, अश्विनी सिंह, ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर पीयूष श्रीवास्तव एवं क्षितिज वर्मा आदि थे। मैक्स के डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. राजेश डे, डॉ. शालीन अग्रवाल, डॉ. श्वेता आदि थे। कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट एवं सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार ने टीम का हौसला बढ़ाया।
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केजीएमयू में शनिवार को छठा लिवर प्रत्यारोपण किया गया। रायबरेली रोड निवासी व्यापारी मनोज कुमार द्विवेदी (42) को पत्नी सरोज द्विवेदी (42) ने लिवर दान किया।
प्रत्यारोपण में करीब 10 घंटे लगे। मरीज और डोनर दोनों की हालत स्थिर है। डॉक्टरों की टीम करीब 48 घंटे तक इनकी निगरानी रखेगी।
मनोज वर्ष 2010 में बीमार हुए। जांच में फैटी लिवर बताया गया। इलाज शुरू हुआ, लेकिन आराम नहीं मिला।
वर्ष 2015 में दिल्ली में जांच कराई तो पता चला कि लिवर सिरोसिस हो गया है। इसके बाद दिल्ली और एसजीपीजीआई में इलाज कराते रहे।
फिर केजीएमयू में गैस्ट्रोइंटोलॉजी सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. अभिजीत चंद्रा से संपर्क किया। उन्होंने लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत बताई।
जुलाई में पंजीयन के बाद डोनर की तलाश हुई। मरीज के भाई ने लिवर दान की इच्छा जताई, लेकिन मैचिंग नहीं हो पाई।
इसके बाद बेटे, चचेरे भाई सहित परिवार के कई लोगों के टेस्ट हुए, पर सफलता न मिली। अंत में पत्नी की जांच की गई तो मैचिंग हो गई। इस पर तय किया गया कि पत्नी के लिवर का लोब लेकर प्रत्यारोपण किया जाएगा।
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तीन दिन पहले सभी जांच करने के बाद गैस्ट्रोइंटोलॉजी सर्जरी विभाग में भर्ती किया गया। शनिवार सुबह करीब सात बजे ट्रांसप्लांट शुरू हुआ। शाम करीब पांच बजे प्रक्रिया पूरी हुई।
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गंभीर संक्रमण की वजह से थीं समस्याएं
केजीएमयू की मीडिया प्रभारी डॉ. शीतल वर्मा ने बताया कि इस प्रत्यारोपण में कई तरह की चुनौतियां थीं। अब तक हुए पांच प्रत्यारोपण की अपेक्षा यह कठिन था। मरीज और उसके परिवारीजनों के ब्लड ग्रुप और टिश्यू का मिलान नहीं हो पा रहा था। दूसरी ओर मरीज गंभीर संक्रमण का शिकार था। उसके पेट में बार-बार पानी भर जा रहा था। इस वजह से तत्काल लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत थी।
ट्रांसप्लांट करने वाली टीम
यह प्रत्यारोपण केजीएमयू और मैक्स हॉस्पिटल, साकेत की टीम ने संयुक्त रूप से किया है। इसमें केजीएमयू सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अभिजीत चंद्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. प्रदीप जोशी, एनेस्थिसिया से डॉ. अनीता मलिक, डॉ. जीपी सिंह, डॉ. मोहम्मद परवेज, डॉ. रवि प्रकाश, डॉ. मनोज, डॉ. अनित परिहार एवं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की डॉ. तूलिका चंद्रा, ग्रैस्ट्रोमेडिसिन विभाग के डॉ. सुमित रूंगटा, डॉ. अजेय कुमार, डॉ. प्रशांत, डॉ. शीतल वर्मा, अश्विनी सिंह, ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर पीयूष श्रीवास्तव एवं क्षितिज वर्मा आदि थे। मैक्स के डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. राजेश डे, डॉ. शालीन अग्रवाल, डॉ. श्वेता आदि थे। कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट एवं सीएमएस प्रो. एसएन शंखवार ने टीम का हौसला बढ़ाया।