UP BJP के लिए क्यों अहम हैं जम्मू व झारखंड के नतीजे
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जम्मू-कश्मीर और झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजों से भले ही उत्तर प्रदेश का सीधा संबंध न हो, लेकिन यूपी भाजपा को इनमें छिपी नसीहतों से इन्कार नहीं किया जा सकता। चुनाव परिणाम बताते हैं कि सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बदौलत यूपी में भी सरकार बनाने का सपना पालकर चुपचाप बैठ जाना ठीक नहीं है।
यूपी भाजपा को अगर 2017 में यहां सरकार बनानी है तो उसे न केवल खींचतान और गुटबाजी से उबरना होगा, बल्कि अभी से किसी विश्वसनीय चेहरे को बतौर भविष्य का मुख्यमंत्री आगे लाना होगा।
लोगों को ध्रुवीकरण वाले मुद्दे नहीं, बल्कि विकास का एजेंडा चाहिए। विकास कराने वाला भरोसेमंद चेहरा चाहिए। भाजपा को इस बारे में भी सोचना होगा।
जम्मू-कश्मीर में भले ही भाजपा को पिछले चुनाव की तुलना में दोगुनी से अधिक 25 सीटों पर जीत मिली हो, पर यह भी ध्यान देना होगा कि पार्टी ने पुरानी 11 सीटों में से दो गंवाई भी हैं। यही नहीं, भाजपा के खाते में आई ये सभी सीटें सिर्फ जम्मू क्षेत्र की हैं। इसके अलावा उसे कहीं सफलता नहीं मिली। लद्दाख क्षेत्र में भी नहीं, जहां से उसे काफी उम्मीदें थीं। जाहिर है भाजपा को विश्वसनीय चेहरा न होने का खामियाजा भुगतना पड़ा है।
सिर्फ मोदी के नाम पर ही मिली सफलता
राजनीतिक समीक्षकों की मानें तो भाजपा के पास जम्मू-कश्मीर में पुराना और भरोसेमंद चेहरा होता तो उसका आंकड़ा जरूर बढ़ता। पार्टी को वहां जो सफलता मिली है, वह सिर्फ मोदी के नाम पर मिली है।
रही हिना बट की बात तो यह साफ हो गया है कि चुनाव से ऐन पहले किसी दूसरे दल के नेता को अपना नेतृत्व सौंपकर सफलता पाने की बात सोचना ही खुद को धोखे में रखना है।
हिना न मुसलमानों का भरोसा जीत पाईं और न कश्मीरी पंडितों का। रही-सही कसर पूरी कर दी अनुच्छेद 370 पर भाजपा नेताओं के विरोधाभासी बयानों ने।
जहां तक झारखंड का सवाल है तो वहां लोगों ने भाजपा के स्थिर सरकार के नारे और विकास के वादे पर भरोसा करके वोट दिया है। हालांकि पार्टी को यह सफलता अकेले दम पर नहीं मिली है। उसे ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन के साथ का भी लाभ मिला है।
यूपी की स्थिति झारखंड से अलग
भाजपा कह सकती है कि झारखंड में विपक्षी दलों की एकजुटता के बावजूद उसके गठबंधन को सफलता मिली है, पर यूपी की स्थिति झारखंड से अलग है। यहां भाजपा के अलावा सपा और बसपा भी स्थिर सरकार देने की स्थिति में हैं।
इसलिए यहां भाजपा का सिर्फ स्थिर सरकार का नारा नहीं चलेगा। जहां तक चेहरे की बात है तो यूपी में भाजपा के लिए यह काम बहुत मुश्किल नहीं है।
हालांकि, उस चेहरे पर पार्टी के सभी प्रमुख नेताओं की स्वीकार्यता बनाना बहुत मुश्किल है। पार्टी के रणनीतिकारों को इस पर अभी से सोचना होगा।