{"_id":"530147b987cdb85b09f6007d8d1fdd12","slug":"why-construct-dam","type":"story","status":"publish","title_hn":"फिर क्यों बनवाया था 150 करोड़ का बांध!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फिर क्यों बनवाया था 150 करोड़ का बांध!
ऋषि मिश्र/लखनऊ
Updated Thu, 07 Nov 2013 02:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
150 करोड़ का बांध बना कर आईआईएम रोड के जिस क्षेत्र की कीमत एलडीए ने कई गुना बढ़वा दी, अब वहीं जमीन भूमाफिया के हवाले करने की तैयारी चल रही है।
विज्ञापन
प्रबंध नगर में करीब 850 एकड़ भूमि को अर्जन से छोड़ने और इस योजना को रद्द करने के प्रस्ताव पर अनेक सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
ग्रीनलैंड के नाम पर इस बेशकीमती जमीन को अवैध कॉलोनियां बनाने के लिए छोड़ने के इस प्रस्ताव को जानकार निराधार बता रहे हैं।
उनका कहना है कि इस ग्रीनलैंड को अन्यत्र समायोजित कर यहां लैंडयूज बदलने का भी विकल्प प्राधिकरण के पास है।
माना यह भी जा रहा है कि अगर इस जमीन का इस्तेमाल पार्क और मनोरंजन पार्क बनाने के लिए किया जाए तो कहीं बेहतर विकल्प होगा।
इससे कम से कम राजधानी के अनियोजित विकास को बल नहीं मिलेगा। वरना इस सैकड़ों एकड़ भूमि को भविष्य में भूमाफिया कंक्रीट के जंगल में तब्दील कर देगा।
इस भूमि के लिए 450 करोड़ रुपये के मुआवजे को अधिक नहीं माना जा रहा है।
यह तब जबकि, यहां 150 करोड़ रुपये लगा कर एलडीए एक बांध का भी निर्माण करवा चुका है।फिलहाल एलडीए के कर्मचारी यूनियन ने इस संबंध में कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
विज्ञापन
दूसरी ओर, नगर नियोजन के क्षेत्र से जुड़े हुए जानकार भी इस मामले में एलडीए की रणनीति से सहमत नहीं नजर आ रहे हैं।
एलडीए की ओर से आगामी बोर्ड मीटिंग को लेकर एक प्रस्ताव बनाया जा रहा है, जिसमें प्रबंध नगर स्कीम को खत्म करने की तैयारी है।
इसमें अधिकांश भूमि ग्रीन लैंडयूज की होने की वजह से इसको अर्जन योग्य नहीं माना जा रहा है और इसके लिए न ही कोई मुआवजा न देने की बात कही जा रही है।
जिससे करीब 450 करोड़ रुपये की बचत होने का भी तर्क रखा गया है। मगर यह तर्क किसी के भी गले नहीं उतर रहे हैं।
भूमि को सुरक्षित करने के लिए बनवाया था बांध
इस जमीन को सुरक्षित करने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने गोमती किनारे बांध का निर्माण करवाया था।
जो आईआईएम रोड से होते हुए कुड़िया घाट बंधे को जोड़ता है। इसके लिए सिंचाई विभाग को 150 करोड़ रुपये भी एलडीए की ओर से दिए गए थे।
जबकि, 450 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा जिला प्रशासन के पास जमा कराया गया था। इसके बावजूद अब यहां प्रस्तावित योजना नकारे जाने का कोई मतलब नहीं नजर आ रहा है।
विज्ञापन
यह है पूरा मामला
एलडीए प्रबंध नगर योजना को निरस्त करने की तैयारी में है। बोर्ड की अगली बैठक में इसका प्रस्ताव रखे जाने की योजना है।
यहां के किसान मुआवजा बढ़ाने की मांग करते हुए लंबे समय से समझौता नहीं कर रहे हैं।
जिलाधिकारी अनुराग यादव ने इस संबंध में वस्तुस्थिति की रिपोर्ट 23 अगस्त को एलडीए से तलब की थी।
सालों पहले अर्जन की धारा-4 और धारा-6 प्रबंध नगर फेज-1 के लिए की जा चुकी है। गांव अल्लूनगर डिगुरिया और घैला की जमीन अर्जित की जानी है।
जो लगभग 850 एकड़ है। जिसका अधिकांश भाग हरित पट्टी में दर्ज है। यहां लगभग 900 किसानों को प्रतिकर प्राधिकरण को देना है।
इसका भुगतान जिला प्रशासन के माध्यम से होगा। किसानों का एक गुट और प्राधिकरण आखिरकार 22 से 25 लाख रुपये प्रति बीघा की दर पर राजी हो गए थे।
मगर डीएम का तर्क है कि यहां आधी भूमि ग्रीन बेल्ट और आधे पर कब्जा है।
ऐसे में 450 करोड़ रुपये खर्च करने का कोई मतलब नहीं है। इसलिए इस अर्जन को खत्म किया जा रहा है।