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Lucknow News: अस्पताल वैध या अवैध.... अफसर खुद नहीं बता पाएंगे
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इन अस्पतालों के बोर्ड पर पंजीकरण नंबर नहीं है।
लखनऊ। ये दो केस महज बानगी हैं। राजधानी में निजी अस्पताल नियमों को खुली चुनौती दे रहे हैं। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत अस्पताल के बोर्ड पर डॉक्टर का नाम और पंजीकरण संख्या लिखना अनिवार्य है, लेकिन बड़ी संख्या में अस्पताल संचालक इस नियम को ताक पर रखकर संचालन कर रहे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि जिम्मेदार अफसर भी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि कौन-सा अस्पताल वैध है और कौन बिना मानकों के चल रहा है। जनहित पोर्टल पर जांच के बाद ही अस्पतालों की असलियत सामने आ रही है।
केस-1 :
दुबग्गा-नैपियर रोड स्थित वेलेंटिस केयर हॉस्पिटल में मरीजों की भर्ती शुरू हो चुकी है। अस्पताल के बोर्ड पर डॉक्टर का नाम तो दर्ज है, लेकिन पंजीकरण संख्या गायब है। ऐसे में अस्पताल वैध है या अवैध, इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी नहीं दे पा रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि पोर्टल पर जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी।
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केस-2 :
पुरनिया बंधा रोड स्थित धनवंतरी हॉस्पिटल के बोर्ड पर संचालक का मोबाइल नंबर चमक रहा है, लेकिन पंजीकरण संबंधी कोई जानकारी नहीं दी गई। यही हाल केएमसी हॉस्पिटल और डेनियल हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर का भी है, जहां बोर्ड पर जरूरी पंजीकरण विवरण तक नहीं दर्ज है।
सवाल : कैसे मिल जा रही ये छूट
पंजीकरण संख्या न होने से मरीज और तीमारदार अस्पताल की वैधता जांच ही नहीं पाते। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना स्पष्ट पहचान और दस्तावेज के अस्पतालों को संचालन की छूट कैसे मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था भी इस कारण कटघरे में है।
Iसभी पंजीकृत अस्पतालों को बोर्ड पर डॉक्टर का नाम और पंजीकरण संख्या लिखना अनिवार्य है। नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए सभी निजी अस्पतालों को मेल भेजा जाएगा।I
I- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओI
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सबसे गंभीर बात यह है कि जिम्मेदार अफसर भी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि कौन-सा अस्पताल वैध है और कौन बिना मानकों के चल रहा है। जनहित पोर्टल पर जांच के बाद ही अस्पतालों की असलियत सामने आ रही है।
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केस-1 :
दुबग्गा-नैपियर रोड स्थित वेलेंटिस केयर हॉस्पिटल में मरीजों की भर्ती शुरू हो चुकी है। अस्पताल के बोर्ड पर डॉक्टर का नाम तो दर्ज है, लेकिन पंजीकरण संख्या गायब है। ऐसे में अस्पताल वैध है या अवैध, इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी नहीं दे पा रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि पोर्टल पर जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी।
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केस-2 :
पुरनिया बंधा रोड स्थित धनवंतरी हॉस्पिटल के बोर्ड पर संचालक का मोबाइल नंबर चमक रहा है, लेकिन पंजीकरण संबंधी कोई जानकारी नहीं दी गई। यही हाल केएमसी हॉस्पिटल और डेनियल हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर का भी है, जहां बोर्ड पर जरूरी पंजीकरण विवरण तक नहीं दर्ज है।
सवाल : कैसे मिल जा रही ये छूट
पंजीकरण संख्या न होने से मरीज और तीमारदार अस्पताल की वैधता जांच ही नहीं पाते। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना स्पष्ट पहचान और दस्तावेज के अस्पतालों को संचालन की छूट कैसे मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था भी इस कारण कटघरे में है।
Iसभी पंजीकृत अस्पतालों को बोर्ड पर डॉक्टर का नाम और पंजीकरण संख्या लिखना अनिवार्य है। नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए सभी निजी अस्पतालों को मेल भेजा जाएगा।I
I- डॉ. एनबी सिंह, सीएमओI

इन अस्पतालों के बोर्ड पर पंजीकरण नंबर नहीं है।