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Lucknow News: अवध बार चुनाव में 300 वकीलों के मतदान पर रोक
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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अवध बार एसोसिएशन के 28 अक्तूबर को होने वाले वार्षिक चुनाव में 300 अधिवक्ताओं के मतदान पर सोमवार को रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन 155 अधिवक्ताओं के सर्टिफिकेट ऑफ प्लेस एंड प्रैक्टिस (सीओपी) में मतदान का स्थान अवध बार एसोसिएशन लखनऊ के बजाय कहीं और दर्ज है और जिन 145 अधिवक्ताओं के सीओपी का नवीनीकरण नहीं हुआ है वे मतदान नहीं कर सकेंगे। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि सीओपी नवीनीकरण का वैध प्रमाण प्रस्तुत करने वाले अधिवक्ताओं को मतदान की अनुमति दी जा सकेगी।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने गिरधारी लाल यादव की जनहित याचिका के साथ दो अन्य याचिकाओं पर यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से मिली जानकारी के आधार पर यह व्यवस्था की गई है क्योंकि मतदान में केवल दो दिन शेष हैं। यूपी बार काउंसिल के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अवध बार एसोसिएशन के 5108 सदस्य मतदान के योग्य पाए गए हैं। इनमें से 155 के सीओपी में मतदान का स्थान दूसरी जगह दर्ज है। इसके अलावा 145 अधिवक्ताओं के प्रमाणपत्रों का नवीनीकरण नहीं हुआ है।
सीओपी का हर पांच साल में सत्यापन जरूरी
अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 2015 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अधिवक्ताओं के सीओपी का हर पांच साल में सत्यापन और नवीनीकरण जरूरी है। सुनवाई के दौरान जनहित याचिकाकर्ता यादव ने आरोप लगाया कि करीब 400 लोग लखनऊ बार एसोसिएशन और सेंट्रल बार एसोसिएशन के चुनावों में पहले ही मतदान कर चुके हैं। इस पर अदालत ने कहा कि इस आरोप की जांच के लिए पर्याप्त समय नहीं है। ऐसे में इस पर तत्काल निर्णय नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने भविष्य में चुनाव संबंधी विवाद रोकने के लिए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को छह महीने में ऑनलाइन व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया। इसके तहत अधिवक्ता का नाम या पंजीकरण संख्या दर्ज करने पर उसका सीओपी वेबसाइट पर दिखाई देना चाहिए। अदालत ने कहा कि प्रमाणपत्र में बदलाव की तारीख और उसका विवरण भी उपलब्ध होना चाहिए।
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बाहरियों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्देश
यूपी बार काउंसिल को छह महीने बाद इस आदेश के अनुपालन का हलफनामा दाखिल करना होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि भविष्य के चुनावों में अधिवक्ताओं को सीओपी कार्ड के बजाय मूल प्रमाणपत्र दिखाने पर ही मतदान की अनुमति दी जाए। यह व्यवस्था मौजूदा चुनाव पर लागू नहीं होगी जब तक निर्वाचन अधिकारी इसे लागू करने का निर्णय नहीं लेते। इसके अलावा हाईकोर्ट के प्रशासनिक पक्ष को मतदान के दिन बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने और अपात्रों को चुनाव क्षेत्र में प्रवेश से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।
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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने गिरधारी लाल यादव की जनहित याचिका के साथ दो अन्य याचिकाओं पर यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से मिली जानकारी के आधार पर यह व्यवस्था की गई है क्योंकि मतदान में केवल दो दिन शेष हैं। यूपी बार काउंसिल के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अवध बार एसोसिएशन के 5108 सदस्य मतदान के योग्य पाए गए हैं। इनमें से 155 के सीओपी में मतदान का स्थान दूसरी जगह दर्ज है। इसके अलावा 145 अधिवक्ताओं के प्रमाणपत्रों का नवीनीकरण नहीं हुआ है।
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सीओपी का हर पांच साल में सत्यापन जरूरी
अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के 2015 के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि अधिवक्ताओं के सीओपी का हर पांच साल में सत्यापन और नवीनीकरण जरूरी है। सुनवाई के दौरान जनहित याचिकाकर्ता यादव ने आरोप लगाया कि करीब 400 लोग लखनऊ बार एसोसिएशन और सेंट्रल बार एसोसिएशन के चुनावों में पहले ही मतदान कर चुके हैं। इस पर अदालत ने कहा कि इस आरोप की जांच के लिए पर्याप्त समय नहीं है। ऐसे में इस पर तत्काल निर्णय नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने भविष्य में चुनाव संबंधी विवाद रोकने के लिए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को छह महीने में ऑनलाइन व्यवस्था विकसित करने का निर्देश दिया। इसके तहत अधिवक्ता का नाम या पंजीकरण संख्या दर्ज करने पर उसका सीओपी वेबसाइट पर दिखाई देना चाहिए। अदालत ने कहा कि प्रमाणपत्र में बदलाव की तारीख और उसका विवरण भी उपलब्ध होना चाहिए।
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बाहरियों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्देश
यूपी बार काउंसिल को छह महीने बाद इस आदेश के अनुपालन का हलफनामा दाखिल करना होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि भविष्य के चुनावों में अधिवक्ताओं को सीओपी कार्ड के बजाय मूल प्रमाणपत्र दिखाने पर ही मतदान की अनुमति दी जाए। यह व्यवस्था मौजूदा चुनाव पर लागू नहीं होगी जब तक निर्वाचन अधिकारी इसे लागू करने का निर्णय नहीं लेते। इसके अलावा हाईकोर्ट के प्रशासनिक पक्ष को मतदान के दिन बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने और अपात्रों को चुनाव क्षेत्र में प्रवेश से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।