विवेक तिवारी की हत्या के साल भर बाद भी पत्नी व बेटियों को नहीं मिला घर, न्याय भी नहीं मिला
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लखनऊ के गोमतीनगर में पुलिसवालों की गोली के शिकार बने एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की मौत को एक साल गुजर गया, लेकिन अभी तक सरकार उनकी पत्नी-बच्चों को घर नहीं दे सकी है।
विवेक की पत्नी कल्पना और दो बेटियां प्रियांशी व दिव्यांशी के साथ उनकी बूढ़ी मां महानगर में किराये के फ्लैट में रहकर जिंदगी की जद्दोजहद से जूझ रही हैं। न्याय में हो रहे विलंब से वह काफी आहत हैं। विवेक तिवारी हत्याकांड के एक साल पूरे होने पर ‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान उन्होंने खुलकर अपना दर्द रखा।
कल्पना ने कहा कि पति की मौत के बाद अधिकारियों ने उन्हें मुआवजा, नौकरी, घर और सुरक्षा देने का वादा किया था। मुआवजे की रकम और नौकरी मिल गई, लेकिन घर अब तक नहीं मिल सका है। कल्पना ने बताया कि जिस फ्लैट में वह बेटियों और सास के साथ रहती हैं, वहां का किराया 25 हजार रुपये है। किसी तरह वह गुजारा कर रही हैं।
तारीखों, गवाहियों व सुनवाई में बीत रही जिंदगी
कल्पना ने कहा कि पति की हत्या में पुलिसवालों का हाथ था, इसलिए इस मामले का ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट में होना चाहिए था। न्याय में देरी से घबराहट बढ़ती जा रही है।
बताया कि एक साल से सिर्फ तारीखों, गवाहियों और सुनवाई में जिंदगी बीत रही है। वहीं, दोनों बेटियां सीएमएस में पढ़ रही हैं। कल्पना ने बताया कि डीएम-एसएसपी व अन्य अधिकारियों ने बेटियों की शिक्षा निशुल्क कराने का वादा किया था।
सीएमएस के संस्थापक जगदीश गांधी ने भी दोनों बेटियों को फ्री में पढ़ाने की बात कही थी। हालांकि, ट्यूशन फीस में महज 40 प्रतिशत छूट ही दी। यह छूट भी अक्तूबर से दी जाती है। जुलाई से सितंबर तक मोटी फीस भरनी पड़ती है।
सुरक्षा कर्मी हटाने से अभी भी खौफ में जी रही हैं
विवेक तिवारी की हत्या में दो पुलिसकर्मी प्रशांत व संदीप को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। कल्पना का कहना है कि पुलिस विभाग में कई ऐसे लोग हैं जो दोनों को निर्दोष मानते हैं और पैरवी करने पर उन्हें व बेटियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कुछ दिन पहले संदीप हाईकोर्ट से जमानत लेकर बाहर घूम रहा है। ऐसे में सुरक्षा को लेकर वह चिंतित हैं। उन्हें लखनऊ पुलिस ने सुरक्षा दी थी, लेकिन मार्च में चुनाव का बहाना बनाकर सुरक्षा वापस ले ली गई। विरोध पर अधिकारियों ने चुनाव बाद सुरक्षा फिर से देने की वादा किया, लेकिन मामला सिफर है।