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भातखंडे संगीत विवि की कुलपति सडोलीकर बर्खास्त, राज्यपाल ने की कार्रवाई
Mon, 21 Dec 2020 10:43 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 21 Dec 2020 10:43 PM IST
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
- फोटो : गूगल
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वित्तीय अनियमितता के आरोप में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने भातखंडे संगीत संस्थान अभिमत विश्वविद्यालय, लखनऊ की कुलपति प्रो. श्रुति सडोलीकर काटकर को बर्खास्त कर दिया है। राज्यपाल ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिए हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज वीरेंद्र कुमार दीक्षित की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने कुलपति के खिलाफ लगे आरोपों में 15 बिंदुओं पर जांच की। जांच समिति ने पाया कि श्रुति सडोलीकर 30 मार्च, 2020 के बाद से बिना अनुमति के मुख्यालय से अनुपस्थित रही। साथ ही ताल वाद्य विभाग के विभागाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा को नियम विरुद्ध प्रभारी कुलपति नियुक्त किया था।
बिना टेंडर लाखों के कार्य कराने में मिलीं दोषी
- 2017-18 में बिना टेंडर के एक ही फर्म उषा एसोसिएट्स से काम कराकर 2.17 लाख, 2.21 लाख और 1 लाख 44 हजार रुपये का भुगतान किया।
- 2018 में बिना टेंडर के कला मंडप का निर्माण कराकर 3 लाख 8 हजार रुपये का भुगतान किया।
- सप्रू मार्ग स्थित एक्यूरेट इंजीनियरिंग से बिना टेंडर काम कराकर 23 लाख 91 हजार 103 रुपये का भुगतान किया।
- इसके अतिरिक्त अंजली ट्रेडर्स, पुन्य एंटरप्राइजेज, एपेक्स कूलिंग सर्विसेज, बीएड एंटरप्राइजेज सहित अन्य कुछ फर्र्मों को बीते दो साल में चार करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त 1 करोड़ 80 लाख रुपये का भुगतान कराना बाकी है।
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- बिना निविदा के एक लाख रुपये से अधिक के कार्य कई टुकड़ों में बांटकर कराए गए हैं।
- इसके अतिरिक्त कोटेशन में शामिल नहीं होने वाली फर्मों को भी 2 लाख 89 हजार और 65 हजार रुपये का अनियमित भुगतान किया गया। जांच समिति ने कुलपति को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की संस्तुति की थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज वीरेंद्र कुमार दीक्षित की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने कुलपति के खिलाफ लगे आरोपों में 15 बिंदुओं पर जांच की। जांच समिति ने पाया कि श्रुति सडोलीकर 30 मार्च, 2020 के बाद से बिना अनुमति के मुख्यालय से अनुपस्थित रही। साथ ही ताल वाद्य विभाग के विभागाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा को नियम विरुद्ध प्रभारी कुलपति नियुक्त किया था।
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बिना टेंडर लाखों के कार्य कराने में मिलीं दोषी
- 2017-18 में बिना टेंडर के एक ही फर्म उषा एसोसिएट्स से काम कराकर 2.17 लाख, 2.21 लाख और 1 लाख 44 हजार रुपये का भुगतान किया।
- 2018 में बिना टेंडर के कला मंडप का निर्माण कराकर 3 लाख 8 हजार रुपये का भुगतान किया।
- सप्रू मार्ग स्थित एक्यूरेट इंजीनियरिंग से बिना टेंडर काम कराकर 23 लाख 91 हजार 103 रुपये का भुगतान किया।
- इसके अतिरिक्त अंजली ट्रेडर्स, पुन्य एंटरप्राइजेज, एपेक्स कूलिंग सर्विसेज, बीएड एंटरप्राइजेज सहित अन्य कुछ फर्र्मों को बीते दो साल में चार करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इसके अतिरिक्त 1 करोड़ 80 लाख रुपये का भुगतान कराना बाकी है।
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- बिना निविदा के एक लाख रुपये से अधिक के कार्य कई टुकड़ों में बांटकर कराए गए हैं।
- इसके अतिरिक्त कोटेशन में शामिल नहीं होने वाली फर्मों को भी 2 लाख 89 हजार और 65 हजार रुपये का अनियमित भुगतान किया गया। जांच समिति ने कुलपति को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की संस्तुति की थी।