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160 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी वंदे भारत एक्सप्रेस
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वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द ही 160 किमी. की रफ्तार से दौड़ेगी, इसके लिए मिशन रफ्तार के अंतर्गत आरडीएसओ तेजी से काम कर रहा है। ट्रेन की बोगियों को डिजाइन किया जा रहा है। पहला प्रोटोटाइप अप्रैल में बनकर तैयार हो जाएगा, जिसका ट्रायल दिल्ली-वाराणसी रेलखंड पर किया जाएगा।
यह जानकारी अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के महानिदेशक संजीव भूटानी ने शुक्रवार को आरडीएसओ में ही आयोजित प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि मिशन रफ्तार के अंतर्गत बोगियों से लेकर इंजन तक को अत्याधुनिक बनाने पर काम चल रहा है। वंदे भारत एक्सप्रेस के 44 सेट और बनाए जाने हैं, जो 75 रेलखंडों पर चलाए जाएंगे। इसके लिए तेजी से काम किया जा रहा है। इनकी गति बढ़ाकर 160 किमी. की जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि एलएचबी बोगियों में झटके लगने की समस्या से निजात दिलाने पर भी काम किया जा रहा है।
साथ ही ट्रैक पर आने वाले जानवरों को रोकने तथा उससे होने वाले हादसों को रोकने के लिए आईआईटी से सहयोग मांगा गया है। विशेषज्ञ गौशालाओं का निरीक्षण कर यह पता लगाएंगे कि कैसे जानवरों को ट्रैक पर आने से रोका जा सकता है। डीजी ने आगे बताया कि रेल फ्रैक्चर रोकने के लिए प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। इसमें ट्रैक किनारे ऑप्टिकल फाइबर लगाया जाएगा, जो फ्रैक्चर की सूचना तत्काल रेलवे प्रशासन को दे देगा। इतना ही नहीं ट्रेन व बोगियों के परीक्षण के लिए देश का पहला डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक भी बनवाया जा रहा है, जो उत्तर पश्चिम रेलवे में होगा, इसमें 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों का ट्रायल किया जा सकेगा। जनरल बोगियों को एसी युक्त बनाने पर भी मंथन किया जा रहा है। इसके अलावा कोहरे में ट्रेन एक्सीडेंट रोकने के लिए टिकास सिस्टम पर काम तेज कर दिया गया है। कार्यक्रम में आरडीएसओ के कार्यकारी निदेशक आशीष अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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यह जानकारी अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के महानिदेशक संजीव भूटानी ने शुक्रवार को आरडीएसओ में ही आयोजित प्रेसवार्ता में दी। उन्होंने बताया कि मिशन रफ्तार के अंतर्गत बोगियों से लेकर इंजन तक को अत्याधुनिक बनाने पर काम चल रहा है। वंदे भारत एक्सप्रेस के 44 सेट और बनाए जाने हैं, जो 75 रेलखंडों पर चलाए जाएंगे। इसके लिए तेजी से काम किया जा रहा है। इनकी गति बढ़ाकर 160 किमी. की जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि एलएचबी बोगियों में झटके लगने की समस्या से निजात दिलाने पर भी काम किया जा रहा है।
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साथ ही ट्रैक पर आने वाले जानवरों को रोकने तथा उससे होने वाले हादसों को रोकने के लिए आईआईटी से सहयोग मांगा गया है। विशेषज्ञ गौशालाओं का निरीक्षण कर यह पता लगाएंगे कि कैसे जानवरों को ट्रैक पर आने से रोका जा सकता है। डीजी ने आगे बताया कि रेल फ्रैक्चर रोकने के लिए प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। इसमें ट्रैक किनारे ऑप्टिकल फाइबर लगाया जाएगा, जो फ्रैक्चर की सूचना तत्काल रेलवे प्रशासन को दे देगा। इतना ही नहीं ट्रेन व बोगियों के परीक्षण के लिए देश का पहला डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक भी बनवाया जा रहा है, जो उत्तर पश्चिम रेलवे में होगा, इसमें 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनों का ट्रायल किया जा सकेगा। जनरल बोगियों को एसी युक्त बनाने पर भी मंथन किया जा रहा है। इसके अलावा कोहरे में ट्रेन एक्सीडेंट रोकने के लिए टिकास सिस्टम पर काम तेज कर दिया गया है। कार्यक्रम में आरडीएसओ के कार्यकारी निदेशक आशीष अग्रवाल सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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