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ज्यादातर मुठभेड़ों में पुलिस को मिली क्लीन चिट, मजिस्ट्रीरियल जांच में भी बेदाग साबित हुई यूपी पुलिस
Sat, 18 Jul 2020 01:16 PM IST
ishwar ashish
विष्णु मोहन, अमर उजाला, लखनऊ
विष्णु मोहन, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sat, 18 Jul 2020 01:16 PM IST
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पुलिस भर्ती।
- फोटो : amar ujala
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यूपी पुलिस ने पिछले सवा तीन वर्षों में 123 बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया। इन मुठभेड़ों को लेकर सवाल खड़े होते रहे हैं, पर अधिकतर मामलों में प्रदेश पुलिस को क्लीन चिट मिल गई। मजिस्ट्रीरियल जांच में भी पुलिस बेदाग साबित हुई। पुलिस की मुठभेड़ों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से लेकर उच्च व सर्वोच्च न्यायालयों तक आवाज उठाई गई, पर कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया जिसमें सरकार की स्थिति असहज हुई हो।
ताजा मामला कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे व उसके कुछ साथियों के अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे जाने का है। इनमें भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। योगी सरकार में हुई 6128 मुठभेड़ों में 123 अपराधी मारे गए और 13365 अपराधी गिरफ्तार किए गए।
पुलिस पर हमला कर भागने की कोशिश में 2293 अपराधी गोली लगने से घायल हुए। वहीं, इन मुठभेड़ों में 13 पुलिसकर्मी शहीद हुए। इनमें कानपुर कांड में शहीद हुए आठ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। मुठभेड़ों के दौरान 894 पुलिस वाले गोली लगने से घायल भी हुए।
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ताजा मामला कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे व उसके कुछ साथियों के अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे जाने का है। इनमें भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। योगी सरकार में हुई 6128 मुठभेड़ों में 123 अपराधी मारे गए और 13365 अपराधी गिरफ्तार किए गए।
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पुलिस पर हमला कर भागने की कोशिश में 2293 अपराधी गोली लगने से घायल हुए। वहीं, इन मुठभेड़ों में 13 पुलिसकर्मी शहीद हुए। इनमें कानपुर कांड में शहीद हुए आठ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। मुठभेड़ों के दौरान 894 पुलिस वाले गोली लगने से घायल भी हुए।
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29 मामलों में मजिस्ट्रीरियल जांच लंबित
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यूपी पुलिस को 2017 के बाद हुई तीन मुठभेड़ों के मामलों में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चुका है। सरकार ने मुठभेड़ को सही बताते हुए अपना पक्ष पेश किया जिसके बाद आयोग की कार्रवाई थम गई। जनवरी 2019 में एक शिकायत की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट भी यूपी पुलिस की मुठभेड़ों को गंभीर मुद्दा बता चुका है।
बहरहाल मुठभेड़ों में 123 अपराधियों के मारे जाने के मामलों में से 77 में पुलिस अंतिम रिपोर्ट लगा चुकी है। इनमें से 64 मामलों में विभिन्न अदालतों में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार हो चुकी है। प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि 29 मामलों में मजिस्ट्रीरियल जांच लंबित है।
बहरहाल मुठभेड़ों में 123 अपराधियों के मारे जाने के मामलों में से 77 में पुलिस अंतिम रिपोर्ट लगा चुकी है। इनमें से 64 मामलों में विभिन्न अदालतों में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार हो चुकी है। प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि 29 मामलों में मजिस्ट्रीरियल जांच लंबित है।