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यूपी विधानमंडल सत्र की हंगामेदार शुरुआत, विपक्षी सदस्यों ने फेंके कागज, जूते पहनकर मेज पर चढ़े
Tue, 05 Feb 2019 12:53 PM IST
sapna singla
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: sapna singla
Updated Tue, 05 Feb 2019 12:53 PM IST
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यूपी विधानसभा फाइल फोटो
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उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र की आज हंगामेदार शुरुआत हुई। राज्यपाल राम नाईक के अभिभाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों ने उनकी ओर कागज के गोले उछाले और नारेबाजी की। कुछ विधायक जूते पहनकर मेज पर भी चढ़ गए।
राज्यपाल ने पूर्वाह्न 11 बजे समवेत सदन में जैसे ही अभिभाषण पढ़ना शुरू किया, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने 'राज्यपाल वापस जाओ' के नारे लगाये और नाईक की तरफ कागज के गोले फेंके।
हालांकि राज्यपाल की ओर फेंके गये कागज के गोले उन तक नहीं पहुंच सके और सुरक्षाकर्मियों ने फाइल कवर के सहारे उन्हें रोक लिया।
विपक्षी सदस्यों के लगातार शोरगुल के बीच राज्यपाल ने अभिभाषण पढ़ना जारी रखा और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों के बारे में सिलसिलेवार ब्यौरा पेश किया।
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विपक्षी दलों ने सोमवार को अलग-अलग बैठकें जहां सरकार को घेरने की रणनीति बनाई, वहीं भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में सरकार का पक्ष मजबूती से रखने और विरोधियों को जवाब देने की रणनीति पर चर्चा हुई।
इस बीच विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वदलीय बैठक में सदन के संचालन में सभी से सहयोग की अपील की। विपक्षी दलों ने कहा है कि वे जनता के मुद्दों को जोर-शोर से उठाएंगे।
लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले विधानमंडल के सत्र में विपक्षी दलों ने आक्रामक तेवर अख्तियार करने के संकेत दिए हैं। ऐसी संभावना पहले ही जताई जा रही थी कि राज्यपाल विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करने आएंगे तो उन्हें विपक्षी दलों की नारेबाजी व हंगामे का सामना करना पड़ सकता है।
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राज्यपाल ने पूर्वाह्न 11 बजे समवेत सदन में जैसे ही अभिभाषण पढ़ना शुरू किया, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने 'राज्यपाल वापस जाओ' के नारे लगाये और नाईक की तरफ कागज के गोले फेंके।
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हालांकि राज्यपाल की ओर फेंके गये कागज के गोले उन तक नहीं पहुंच सके और सुरक्षाकर्मियों ने फाइल कवर के सहारे उन्हें रोक लिया।
विपक्षी सदस्यों के लगातार शोरगुल के बीच राज्यपाल ने अभिभाषण पढ़ना जारी रखा और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों के बारे में सिलसिलेवार ब्यौरा पेश किया।
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विपक्षी दलों ने सोमवार को अलग-अलग बैठकें जहां सरकार को घेरने की रणनीति बनाई, वहीं भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में सरकार का पक्ष मजबूती से रखने और विरोधियों को जवाब देने की रणनीति पर चर्चा हुई।
इस बीच विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सर्वदलीय बैठक में सदन के संचालन में सभी से सहयोग की अपील की। विपक्षी दलों ने कहा है कि वे जनता के मुद्दों को जोर-शोर से उठाएंगे।
लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले विधानमंडल के सत्र में विपक्षी दलों ने आक्रामक तेवर अख्तियार करने के संकेत दिए हैं। ऐसी संभावना पहले ही जताई जा रही थी कि राज्यपाल विधानसभा और विधान परिषद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करने आएंगे तो उन्हें विपक्षी दलों की नारेबाजी व हंगामे का सामना करना पड़ सकता है।
सदन में विपक्ष का आचरण निंदनीय, लोकतंत्र को कमजोर करने वाला : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य विधानमण्डल के बजट सत्र के पहले दिन मंगलवार को राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्षी सदस्यों के हंगामे की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र को कमजोर करने वाले इस आचरण से ही अनुमान लगाया जा सकता है कि वे दल किस तरह की व्यवस्था चाहते हैं।
राज्यपाल राम नाईक द्वारा समवेत सदन में अभिभाषण की शुरुआत करते ही विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने 'राज्यपाल वापस जाओ' के नारे लगाये और नाईक की तरफ कागज के गोले फेंके। हालांकि इसके बावजूद राज्यपाल ने पूरा अभिभाषण पढ़ा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाद में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अभिभाषण के दौरान राज्यपाल के सामने सपा, बसपा और कांग्रेस सदस्यों ने जिस तरह का आचरण किया है वह निंदनीय है। इस तरह के असंवैधानिक और आलोकतांत्रिक प्रदर्शन से संसदीय लोकतंत्र और सदन की गरिमा भंग होती है।
उन्होंने विपक्षी सदस्यों के आचरण को संसदीय लोकतंत्र को कमजोर करने वाला बताते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि इन सदस्यों की लोकतंत्र में निष्ठा नहीं है और वे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा सदस्यों ने गुंडागर्दी कर राज्यपाल पर कागज के गोले उछाले। इससे स्पष्ट है कि सपा गुंडागर्दी वाले आचरण से अब भी बाज नहीं आ पा रही है। इनकी कार्यप्रणाली जब सदन में इतनी अराजक, अनुशासनहीन और बर्बर हो सकती है तो सार्वजनिक जीवन में इनका आचरण कैसा होता होगा?
उन्होंने कहा कि राज्यपाल प्रदेश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है। सभी सदस्यों द्वारा दलीय निष्ठा से हटकर उनके प्रति सम्मान का भाव संसदीय लोकतंत्र को मजबूती देता है। लेकिन सदस्यों ने सदन में जो आचरण किया है, वह निंदनीय है।
राज्यपाल राम नाईक द्वारा समवेत सदन में अभिभाषण की शुरुआत करते ही विपक्षी सदस्यों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने 'राज्यपाल वापस जाओ' के नारे लगाये और नाईक की तरफ कागज के गोले फेंके। हालांकि इसके बावजूद राज्यपाल ने पूरा अभिभाषण पढ़ा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाद में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि अभिभाषण के दौरान राज्यपाल के सामने सपा, बसपा और कांग्रेस सदस्यों ने जिस तरह का आचरण किया है वह निंदनीय है। इस तरह के असंवैधानिक और आलोकतांत्रिक प्रदर्शन से संसदीय लोकतंत्र और सदन की गरिमा भंग होती है।
उन्होंने विपक्षी सदस्यों के आचरण को संसदीय लोकतंत्र को कमजोर करने वाला बताते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि इन सदस्यों की लोकतंत्र में निष्ठा नहीं है और वे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा सदस्यों ने गुंडागर्दी कर राज्यपाल पर कागज के गोले उछाले। इससे स्पष्ट है कि सपा गुंडागर्दी वाले आचरण से अब भी बाज नहीं आ पा रही है। इनकी कार्यप्रणाली जब सदन में इतनी अराजक, अनुशासनहीन और बर्बर हो सकती है तो सार्वजनिक जीवन में इनका आचरण कैसा होता होगा?
उन्होंने कहा कि राज्यपाल प्रदेश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है। सभी सदस्यों द्वारा दलीय निष्ठा से हटकर उनके प्रति सम्मान का भाव संसदीय लोकतंत्र को मजबूती देता है। लेकिन सदस्यों ने सदन में जो आचरण किया है, वह निंदनीय है।