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लिपिकों के वेतनमान पर कैबिनेट का बड़ा फैसला

Wed, 17 Sep 2014 12:47 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 17 Sep 2014 12:47 AM IST
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Uttar Pradesh cabinet decision.

प्रदेश कैबिनेट ने सभी राजकीय विभागों में लिपिक संवर्ग का एक समान ढांचा लागू करने के लिए बनाई गई नियमावली को मंजूरी दे दी। इससे सभी विभागों में लिपिकों के पद पर समान अर्हता व वेतनमान लागू हो सकेंगे।

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इससे लिपिक संवर्ग के कर्मियों की एक काफी पुरानी मांग पूरी हो गई है। पहले अलग-अलग विभागों में लिपिकों के एक ही जैसे पद के लिए अलग-अलग अर्हता व वेतनमान लागू होते थे।
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बताते चलें, वेतन समिति (2008) की नौवीं रिपोर्ट में राजकीय विभागों के लिपिक संवर्ग को लेकर कई सिफारिशें की गई थीं। कैबिनेट ने समिति की सिफारिशों को मंजूर करते हुए प्रदेश केसभी राजकीय विभागों में लिपिक संवर्ग के समान ढांचा को मंजूरी दे दी है।
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इसके लिए लिपिक संवर्ग के विभिन्न पदों पर प्रोन्नति की व्यवस्था के संबंध में वित्त विभाग के 17 जनवरी 2014 और 20 जनवरी 2014 के आदेश को शिथिल किया गया है।

इनका भी वेतन बढ़ा

Uttar Pradesh cabinet decision.

प्रदेश कैबिनेट ने स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया निरीक्षक, फाइलेरिया निरीक्षक, ऑप्टोमेट्रिस्ट तथा लैब टेक्नीशियन संवर्ग के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर करते हुए ग्रेड-पे बढ़ाने का फैसला किया है।

इससे करीब चार हजार कर्मचारी फायदा पाएंगे। इस फैसले से सरकार पर सालाना करीब चार करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। स्वास्थ्य विभाग के इन संवर्गों से जुड़े कर्मचारियों की वेतन विसंगति का मामला लंबे अर्से से विचाराधीन था।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कमेटी ने इन कर्मियों का ग्रेड पे बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की थीं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट ने मंगलवार को इस कमेटी की सिफारिशों को मंजूरी दे दी।

साइकिल पर नहीं लगेगा वैट

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की 3500 रुपये तक की साइकिलों को वैट मुक्त करने संबंधी घोषणा को मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिल गई है।

इसके बाद इस कीमत की बाइसिकिल, ट्राईसाइकिल, साइकिल रिक्शा तथा इनके पार्ट्स, कंपोनेंटस एक्सेसरीज, टायर व ट्यूब को वैट के दायरे से बाहर कर दिया गया है।

वाणिज्य कर विभाग से अधिसूचना जारी होने के बाद बाजार में इस कीमत की साइकिल और ये सभी सामान सस्ते मिलने लगेंगे।

मदरसा शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार

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मदरसा शिक्षक भी अब बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों की तर्ज पर राज्य पुरस्कार पा सकेंगे। मंगलवार को राज्य कैबिनेट ने अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

इसके तहत अब प्रत्येक वर्ष तीन तहतानिया (कक्षा एक से पांच तक), तीन फौकानिया (कक्षा छह से आठ तक) व तीन आलिया (कक्षा नौ व10) स्तर के शिक्षक-शिक्षिकाओं को पुरस्कृत किया जाएगा।

इसके तहत मदरसा शिक्षकों को 10 हजार रुपये नगद, पदक व शॉल भेंट किया जाएगा। इन शिक्षकों को जिस साल पुरस्कार मिलेगा, उस साल वे रोडवेज की बसों में 4000 किलोमीटर मुफ्त सफर भी कर सकेंगे। राज्य पुरस्कार देने के लिए मंत्री ने इसमें पांच लाख रुपये का बजट भी मंजूर करा लिया है।

सैफई में नए सिरे से बनेगा स्वीमिंग पूल

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राज्य सरकार सैफई में नए सिरे से 207 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वीमिंग पूल बनवाएगी।

कैबिनेट निर्णय के मुताबिक दो साल के अंदर नया स्वीमिंग पूल बनकर तैयार हो जाएगा। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र सैफई में पूर्व में स्वीमिंग पूल बनाया गया था, लेकिन मानक के अनुसार न बनने की वजह से इसे ध्वस्त कर दिया गया।

अब इसके स्थान पर नया स्वीमिंग पूल बनाया जाएगा।

बिल्डरों के लिए समाधान योजना

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राज्य सरकार ने दिल्ली व मुंबई की तर्ज पर बिल्डरों को बकाया वाणिज्य कर जमा करने की सुविधा देने के लिए एकमुश्त समाधान योजना लाने का निर्णय किया है। इस योजना के तहत बिल्डरों को अनुबंध में दिखाई गई राशि या स्टांप एक्ट के अनुसार देय स्टांप ड्यूटी के लिए तय राशि में से जो भी अधिक होगा, उसका एक से तीन फीसदी तक टैक्स देना होगा।

फ्लैट निर्माण में इस्तेमाल होने वाला सामान यूपी से खरीदने वालों को एक प्रतिशत और राज्य के बाहर से सामान मंगाने वालों को तीन प्रतिशत टैक्स देना होगा।

समाधान योजना अपनाने वाले बिल्डर के सभी प्रोजेक्ट इसके दायरे में आएंगे। एक बार योजना अपनाने वाले बिल्डर समाधान राशि यथावत रहने तक इससे बाहर नहीं जा पाएंगे। समाधान योजना लागू होने के 30 दिन के अंदर बिल्डरों को कर निर्धारण अधिकारी को इसके लिए प्रार्थना पत्र देना होगा। इसके बाद 30 से 60 दिन के अंदर समाधान योजना अपनाने के लिए 10 हजार रुपये विलंब शुल्क देना होगा।

वर्ष 2011-12 के बाद से वाणिज्य कर जमा न करने वाले बिल्डर इस योजना का लाभ ले सकेंगे। इस योजना में आने वाले बिल्डर न तो इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकेंगे और न ही टैक्स इनवॉयस जारी कर सकेंगे। समय से टैक्स न देने वाले बिल्डरों से भू-राजस्व की भांति वसूली होगी।

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