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जैमर व सीसीटीवी से रोका जा रहा जेलों में मोबाइल फोन का उपयोग
Wed, 23 Dec 2020 08:33 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 23 Dec 2020 08:33 PM IST
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mobile in jail
- फोटो : Social Media
जेलों में मोबाइल फोन के उपयोग की संभावना पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश की 24 जेलों में 3 जी क्षमता के 271 जैमर और 2800 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। बाकी जेलों में जल्द ही यह व्यवस्था लागू की जाएगी। यह जानकारी अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने दी।
उन्होंने बताया कि सरकार के कदमों से जेलों की छवि में सुधार हुआ है। उच्च स्तरीय निगरानी के लिए मुख्यालय में कमांड सेंटर और वीडियो वॉल स्थापित की गयी है। कारागारों में पोल मेटल डिटेक्शन सिस्टम, डोरफेम, हैंड हेल्ड एवं डीप सर्च मेटल डिटेक्टर की व्यवस्था कराई गई है।
पुलिस महानिदेशक, कारागार आनंद कुमार ने बताया कि जेलों में संपूर्ण साक्षरता, शैक्षिक उन्नयन, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित कराये जाते हैं। बंदियों के शैक्षिक उन्नयन के लिए कारागार परीक्षा केंद्र के रूप में काम कर रहे हैं। पिछले साल कक्षा 5 से 8 तक 1204, हाई स्कूल में 71, 12वीं में 52 तथा 1200 बंदियों ने इग्नू की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं। अब 70 कारागारों तथा 73 जनपद न्यायालयों में स्थापित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इकाइयों से 98 प्रतिशत विचाराधीन बंदियों की रिमांड हो रही है, इसे शत प्रतिशत करने का लक्ष्य है।
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उन्होंने बताया कि सरकार के कदमों से जेलों की छवि में सुधार हुआ है। उच्च स्तरीय निगरानी के लिए मुख्यालय में कमांड सेंटर और वीडियो वॉल स्थापित की गयी है। कारागारों में पोल मेटल डिटेक्शन सिस्टम, डोरफेम, हैंड हेल्ड एवं डीप सर्च मेटल डिटेक्टर की व्यवस्था कराई गई है।
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पुलिस महानिदेशक, कारागार आनंद कुमार ने बताया कि जेलों में संपूर्ण साक्षरता, शैक्षिक उन्नयन, व्यावसायिक प्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित कराये जाते हैं। बंदियों के शैक्षिक उन्नयन के लिए कारागार परीक्षा केंद्र के रूप में काम कर रहे हैं। पिछले साल कक्षा 5 से 8 तक 1204, हाई स्कूल में 71, 12वीं में 52 तथा 1200 बंदियों ने इग्नू की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं। अब 70 कारागारों तथा 73 जनपद न्यायालयों में स्थापित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इकाइयों से 98 प्रतिशत विचाराधीन बंदियों की रिमांड हो रही है, इसे शत प्रतिशत करने का लक्ष्य है।
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