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Lucknow News: कैंसर और अन्य लाइलाज बीमारियों में सस्ती दवाओं का हो उपयोग

Tue, 22 Oct 2024 06:36 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Oct 2024 06:36 AM IST
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Use of cheap medicines in cancer and other incurable diseases

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लखनऊ। कैंसर और अन्य लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के मामले में दवाएं देने में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। डॉक्टरों को मरीजों को सस्ती से सस्ती दवाएं देनी चाहिए। यह कहना है पीजीआई के रेडियोथेरेपी के विभागाध्यक्ष प्रो. शालीन कुमार का। वे सोमवार को केजीएमयू के शताब्दी फेज-2 भवन में आयोजित पैलिएटिव केयर (विशेष देखभाल) पर आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में में बोल रहे थे।




प्रो. शालीन ने कहा, अंतिम अवस्था में पहुंच चुके मरीजों की देखभाल बेहद चुनौती भरा काम है। मरीज के अंतिम अवस्था की जानकारी तीमारदारों को देते हुए भी करुणा और दार्शनिकता का भाव अपनाना चाहिए। पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संजय धीराज के मुताबिक कैंसर के लाइलाज मरीजों को दर्द से राहत देने के लिए मार्फीन वरदान है। महज 10 पैसे की एक गोली कई सौ रुपये की दवाओं का विकल्प हो सकती है।
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प्रो. संजय धीराज ने बताया कि कैंसर के कई मामलों में इलाज की कोई उम्मीद नहीं बचती है। इस स्थिति में उनको दर्द से राहत देने की कोशिश की जाती है। आमतौर पर इसके लिए फेंटेनाइल नाम की दवा का उपयोग किया जाता है। यह दो ढाई सौ रुपये की में आती है। वहीं नारकोटिक्स दवाई मार्फीन महज 10 पैसे में ही उपलब्ध हो जाती है। इसलिए इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए। इस मौके पर प्रो राजीव गुप्ता, प्रो. अभिनव सोनकर, प्रो. संदीप तिवारी, प्रो. बीके ओझा, प्रो क्षितिज श्रीवास्तव, प्रो आनंद मिश्रा, प्रो पवित्र रस्तोगी और प्रो. सीमा गुप्ता मौजूद रहे।
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पैलिएटिव केयर पर आयोजित सीएमई का संचालन रेडियोथेरेपी विभाग के प्रो. सुधीर सिंह ने संभाल रखी थी। यह कार्यक्रम हिंदी में ही चल रहा था। संचालन के दौरान प्रो. सुधीर सिंह की हिंदी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी मुरीद हो गए। उन्होंने मंच से ही कहा, डॉक्टर साहब ने अंग्रेजी में ही अपनी पूरी पढ़ाई की है। देश-विदेश जाते रहते हैं। वहां भी अंग्रेजी में अपने भाव व्यक्त करते हैं। इसके बावजूद इतनी शुद्ध, सुंदर और आकर्षक हिंदी के साथ कार्यक्रम का संचालन करना काबिले तारीफ है।






उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा, हम किसी भी सूरत में केजीएमयू में संसाधनों की कमी नहीं होने देंगे। केजीएमयू कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने संस्थान के विस्तार के लिए भूमि देने पर सरकार को धन्यवाद दिया। प्रो राजेंद्र कुमार ने बताया कि जीव दया फाउंडेशन के सहयोग से वर्ष 2016 में पैलिएटिव केयर प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी। पांच साल की अवधि पूरी होने के बाद सिप्ला फाउंडेशन के सहयोग से इसे चलाया जा रहा है।
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