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केजीएमयू में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से वसूलते थे लाखों, एसटीएफ ने सरगना समेत सात को दबोचा

Sun, 19 Aug 2018 11:23 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 19 Aug 2018 11:23 AM IST
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UP STF arrested fraud gang from KGMU
पकड़े गए आरोपी। - फोटो : amar ujala

यूपी एसटीएफ ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में नौकरी के लिए पैसे लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में एसटीएफ ने सरगना अरविंद कुमार सिंह समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया है। अरविंद कुमार केजीएमयू में ही संविदा पर कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद पर तैनात है।

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एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि राजधानी में चौक स्थित केजीएमयू के प्रॉक्टर राम अवध सिंह कुशवाहा ने कम्प्यूटर ऑपरेटर और नर्स के पदों पर फर्जी तरीके से वैकेंसी निकालने और फर्जी नियुक्ति पत्र जारी करने की शिकायत की थी। अभिषेक सिंह ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक त्रिवेणी सिंह को लगाया। त्रिवेणी सिंह ने पड़ताल की तो पाया कि कम्प्यूटर ऑपरेटर के पदों की फर्जी तरीके से भर्ती निकालकर उसमें ग्राहक तलाशे जाते हैं और फिर दो-दो लाख रुपये लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कर दिए जा रहे हैं। पांच लोगों से छह लाख रुपये लेने की बात प्रकाश में आई। शनिवार को एसटीएफ की टीम ने छापा मारकर केजीएमयू में नई ओपीडी की भूमिगत पार्किंग के पास से अरविंद कुमार सिंह समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
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अरविन्द ने पूछताछ में बताया कि वह केजीएमयू में संविदा पर कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद पर कार्यरत है। वह अपने साथियों के साथ मिल कर इस फर्जी वाड़े को अंजाम देता है। उसके साथियों द्वारा यह बात फैलायी जाती है कि केजीएमसी में विभागीय संविदा कम्प्यूटर आपरेटर के स्थान रिक्त हैं । इसके बाद अरविंद कुमार के जरिए दो से ढाई लाख रुपये लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया जाता था। ऑपरेशन को अंजाम देने वाले त्रिवेणी सिंह ने बताया कि गिरोह के अन्य सदस्य कुशीनगर निवासी साजिद अंसारी, लखनऊ के गोसाईगंज निवासी रजनीकांत रावत, लखनऊ के ही अलीगंज निवासी राघवेन्द्र सिंह, मोहित, बृजेश अवस्थी और अनुराग पांडेय हजरतगंज में आफिस खोलकर ग्राहक तलाश करते थे और दो लाख रुपये तक लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया करते थे। इन सभी को भी गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से 20 हजार रुपये, 11 मोबाइल, 12 एटीएम और 6 फर्जी नियुक्ति पत्र बरामद किए हैं।

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बैंक खातों को खंगाल रही एसटीएफ

त्रिवेणी सिंह ने बताया कि इस मामले में मुख्य सरगना अरविंद के बैंक खातों को खंगाला जा रहा है। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह ठगी 10 से 15 लोगों के साथ हुई है। अन्य के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां भी जल्द हो सकती हैं।

नर्स की भर्ती के नाम पर भी हुआ खेल
त्रिवेणी सिंह ने बताया कि सिर्फ कम्प्यूटर ऑपरेटर ही नहीं बल्कि नर्स के पदों पर भी भर्ती के नाम पर जालसाजों ने खेल किया है। उसमें यह गिरोह शामिल है या नहीं, इसकी तफ्तीश की जा रही है। साथ ही अन्य गिरोह पर भी नजर रखी जा रही है।

प्रतिबंधित कंपनी से काम करा रहा था केजीएमयू

केजीएमयू प्रशासन बिना रजिस्ट्रेशन वाली कंपनी अवनि परिधि के कर्मचारियों से काम ले रहा था। शनिवार को मामला खुला तो देर रात आननफानन में कंपनी को काली सूची में डालने की कार्रवाई शुरू की गई। जबकि इस कंपनी पर यूपीएसआईसी ने आजीवन प्रतिबंध लगा रखा है।

अरविंद की नियुक्ति भी इसी कंपनी ने की थी। कंपनी को उत्तर प्रदेश लगु उद्योग निगम (यूपीएसआईसी) ने आजीवन प्रतिबंधित कर रखा है। यूपीएसआईसी के मुताबिक, अवनि परिधि 31 अक्टूबर 2017 तक के लिए ही पंजीकृत थी। केजीएमयू प्रशासन ने कंपनी की वैधता की जांच पड़ताल करने की जरूरत नहीं समझी। पिछले दिनों यूपीएसआईसी के एमडी हीरालाल ने इस कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया।

इस संबंध में प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों और सभी सीएमओ को पत्र भी जारी कर दिया था। शनिवार को मामला खुलने के बाद केजीएमयू प्रशासन की नींद खुली। शनिवार रात चीफ प्राक्टर आरएएस कुशवाहा ने कुलसचिव को पत्र लिख कंपनी को काली सूची में डालने को कहा। कुलसचिव राजेश राय का कहना है कि कंपनी को काली सूची में डाला जा रहा है।

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