UP: राजधानी की हवा में घुला धीमा जहर, भारी धातुएं बना रहीं बीमार; एनबीआरआई की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
शहर की हवा में भारी धातुओं की मौजूदगी से स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ गया है। शोध में कई स्थानों पर अधिक प्रदूषण पाया गया, जिससे अस्थमा और अन्य गंभीर बीमारियों का जोखिम है। वैज्ञानिकों ने वाहनों का कम उपयोग, हरित क्षेत्र बढ़ाने और सावधानी अपनाने की सलाह दी है।
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लखनऊ की हवा लोगों की सेहत के लिए बड़ी चिंता का कारण बन रही है। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) के ताजा शोध ने इस खतरे को और स्पष्ट कर दिया है। लखनऊ की हवा में एल्युमीनियम, आयरन और मैगनीज जैसी भारी धातुएं पाई गई हैं, जिन्हें विशेषज्ञ धीमा जहर मान रहे हैं।
एनबीआरआई में पादप विविधता पर काम कर रहे वैज्ञानिक डॉ. सजीवा नायका ने इस शोध में लाइकेन का उपयोग किया। लाइकेन पेड़ों की छाल पर उगने वाला कवक है, जो हवा की गुणवत्ता बताने का सटीक माध्यम है।
डॉ. नायका और उनकी टीम ने मलिहाबाद से लाइकेन के नमूने लिए, जिन्हें शहर के 10 व्यस्त चौराहों पर रखा गया। इसकी रिपोर्ट के अनुसार, पॉलीटेक्निक चौराहा सबसे ज्यादा प्रदूषित पाया गया। हजरतगंज दूसरे स्थान पर रहा। जनेश्वर मिश्र पार्क और मलिहाबाद जैसे हरित क्षेत्रों में प्रदूषण काफी कम पाया गया।
यहां मिला इतना प्रदूषण
| स्थान | प्रदूषण की मात्रा (माइक्रोग्राम प्रति ग्राम) |
| पॉलीटेक्निक चौराहा | 24.94 |
| हजरतगंज | 22.75 |
| आलमबाग चौराहा | 7.60 |
| आईटी चौराहा | 7.56 |
| जनेश्वर मिश्र पार्क | 0.24 |
| मलिहाबाद | सबसे कम |
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
डॉ. नायका के अनुसार, हवा में मौजूद इन धातुओं से अस्थमा, याददाश्त कमजोर होना और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है। पार्किंसन भी हो सकता है। कुछ स्थानों पर कैंसर पैदा करने वाले तत्व भी मिले हैं। यह शोध इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फाइटोरिमिडिएशन में प्रकाशित हुआ है।
प्रदूषण कम करने के उपाय
संस्थान के वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि प्रदूषण कम करने के लिए ट्रैफिक सिग्नल पर वाहन बंद रखें। गाड़ी का इस्तेमाल कम करें, इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएं। ज्यादा पेड़ लगाकर हरित क्षेत्र बढ़ाएं।