यूपी: जेल पहुंची श्रद्धा दुबे, पुलिस के सवालों पर करती रही गुमराह; रश्मि और ड्राइवर दानिश के बयान भी दर्ज
Shraddha Dubey reaches jail: डीसीपी मध्य अर्पित विजयवर्गीय के मुताबिक श्रद्धा ने अपने बयान में कहा कि उसने वीडियो बाइट जारी कर अपना पक्ष रखा था। वीडियो बाइट ही उसका बयान है।
विस्तार
शिवा शर्मा हत्याकांड की आरोपी श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश को बृहस्पतिवार को पुलिस नागपुर से लखनऊ लेकर पहुंची। तीनों से हजरतगंज थाने में साढ़े छह घंटे में 120 सवाल पूछे गए। ज्यादातर सवालों के जवाब में आरोपी गुमराह करते रहे। श्रद्धा ने पहले पुलिस अधिकारियों से कहा कि वे उसके वकील से बात करें।
डीसीपी मध्य अर्पित विजयवर्गीय के मुताबिक श्रद्धा ने अपने बयान में कहा कि उसने वीडियो बाइट जारी कर अपना पक्ष रखा था। वीडियो बाइट ही उसका बयान है। श्रद्धा के पास से दो मोबाइल फोन और 25 हजार रुपये मिले हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि नेपाल से लौटने के बाद वे लखनऊ आए थे। इसके बाद कानपुर के रास्ते फतेहपुर, जबलपुर सतना होते हुए नागपुर पहुंचे थे। आरोपी नागपुर से भी आगे जाने वाले थे लेकिन उसके पहले ही पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। थाने में पूछताछ के बाद तीनों को बृहस्पतिवार शाम सिविल अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल परीक्षण के बाद तीनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बलवंत कुमार भारती ने उन्हें 31 अक्तूबर 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया।
अभियोजन की ओर से बताया गया कि वादिनी ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि उनके बेटे को श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि दुबे, उनके ड्राइवर दानिश और रश्मि के ब्वॉयफ्रेंड आमिर शेख ने मिलकर अपने फ्लैट की चौथी मंजिल से फेंककर मार डाला है। अभियोजन के अनुसार इस तथ्य की पुष्टि अन्य साक्षियों की ओर से भी की गई है। श्रद्धा दुबे उसकी बहन रश्मि दुबे व दानिश के खिलाफ नामजद और अन्य के विरुद्ध अज्ञात में प्राथमिकी दर्ज है।
अदालत ने केस डायरी के अवलोकन में पाया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लखनऊ के 16 अक्तूबर 2026 के आदेश से तीनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। 21 अक्तूबर 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नागपुर की ओर से तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ की अदालत में रिमांड के लिए प्रस्तुत किया गया।
31 अक्तूबर 2026 तक भेजा गया जेल
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि विधि द्वारा स्थापित सिद्धांत के अनुसार गिरफ्तारी का कारण और आधार अंकित किया जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी आवश्यक है कि आरोपी को क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है। इसके साथ सारवान तथ्य भी हो। केस डायरी से स्पष्ट है कि विवेचक ने अग्रिम अपराध रोकने, मामले के उपरोक्त अन्वेषण, साक्ष्यों को प्रभावित करने व पीड़ित पक्ष को डराने से रोकने के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी आवश्यक बताई है। अपराध के उचित अन्वेषण, बरामदगी, साक्ष्य संकलन व आजीवन कारावास से आच्छादित होने के कारण भी गिरफ्तारी का पर्याप्त आधार माना गया।
न्यायालय ने यह भी कहा कि विवेचक ने सतेंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई के वाद में सर्वोच्च न्यायालय की ओर से दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया गया है। आरोपियों को पुलिस प्रपत्रों की प्रतियां लिखित रूप में दी गईं हैं और गिरफ्तारी की सूचना परिजनों को दी गई है। इसके अतिरिक्त उनका चिकित्सीय परीक्षण भी विधिपूर्ण तरीके से कराया गया है।
सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता ने वकालतनामा पत्रावली पर लिए जाने की याचना की और मौखिक रूप से रिमांड निरस्त करने की मांग की। अदालत ने वकालतनामा पत्रावली पर लेने की अनुमति दी लेकिन रिमांड खारिज किए जाने की मौखिक आपत्ति निरस्त कर दी। प्रथमदृष्टया न्यायिक रिमांड स्वीकार किए जाने योग्य पाते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को 31 अक्तूबर 2026 तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया।
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