यूपी: जन्म-मृत्यु के देर से पंजीकरण के नियम सख्त, अब दो साल से ज्यादा देरी पर कोर्ट जाना होगा; जानें नया आदेश
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के देर से पंजीकरण के नियम अब सख्त होंगे। एक साल से दो साल के भीतर पंजीकरण के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। दो साल से अधिक देरी पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश लेना पड़ेगा। नई व्यवस्था एक अक्तूबर से लागू होगी और शुल्क भी बढ़ चुका है।
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केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में बड़ा संशोधन कर दिया है। इससे अब उन लोगों को परेशानी होगी जो प्रमाण पत्र बनवाने में ढिलाई करेंगे। अब उन लोगों को कोर्ट से आदेश लाना पड़ेगा जो दो साल बाद जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाएंगे। यह नया बदलाव एक अक्तूबर से लागू हो जाएगा।
अधिनियम में किए गए प्रावधान के तहत किसी जन्म या मृत्यु की सूचना यदि एक साल बाद लेकिन दो साल के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण तभी होगा जब संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) या सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या डीएम की ओर से अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट की ओर से जन्म-मृत्यु की सत्यता का सत्यापन करने के बाद आदेश दिया जाए और निर्धारित शुल्क जमा किया जाए।
अधिनियम में साफ किया गया है कि कार्यपालक मजिस्ट्रेट का अर्थ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 14(1) के तहत नियुक्त मजिस्ट्रेट होगा। इसी तरह यदि जन्म या मृत्यु की सूचना दो साल दी जाती है, तो पंजीकरण केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही होगा, वह भी सत्यापन और शुल्क के बाद।
ऐसे में साफ है कि अब दो साल से अधिक पुराने मामलों में बिना कोर्ट के आदेश के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनेगा। यह व्यवस्था एक अक्तूबर से लागू होगी। अभी तक एसडीएम के यहां से ही दो साल से अधिक पुराने मामलों में भी आदेश होता है।
शुल्क में हो चुकी है पहले ही बढ़ोत्तरी
करीब दस साल से केंद्र सरकार के एकीकृत पोर्टल के जरिए ही लखनऊ सहित देशभर में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। इसमें करीब एक साल पहले बदलाव किया गया था। जिसमें 0 से 21 दिन तक का जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र निशुल्क रखा गया था और 21 दिन के बाद बनवाने वाले के लिए 20 रुपये शुल्क रखा गया था। जिसे दो महीने पहले शासन ने बढ़ा दिया था। उसके बाद यह शुल्क बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया । इसको लेकर शासन ने 19 जून को आदेश जारी किया था।
आदेश का अनुपालन किया जाएगा
नगर स्वास्थ्य अधिकारी पीके श्रीवास्तव ने बताया कि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के देरी आने वाले आवेदनों को लेकर शासन ने जो आदेश जारी किया है, उसका अनुपालन होगा। इसमें दो साल से अधिक देरी के मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट से आदेश कराने की बात आई है।