{"_id":"6ad0ce5f7b1f5695bb095139","slug":"up-saharanpur-based-pharmaceutical-trader-arrested-for-smuggling-codeine-based-cough-syrup-2026-10-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी: कोडीन कफ सिरप की तस्करी में सहारनपुर का दवा कारोबारी गिरफ्तार, जेल में आरोपियों से मुलाकात करने आया था","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: कोडीन कफ सिरप की तस्करी में सहारनपुर का दवा कारोबारी गिरफ्तार, जेल में आरोपियों से मुलाकात करने आया था
Thu, 15 Oct 2026 06:30 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Thu, 15 Oct 2026 06:30 PM IST
सार
दवा कारोबारी जेल में सिंडिकेट से जुड़े आरोपियों से मुलाकात करने पहुंचा था तभी एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया। वह फर्जी फर्मों से खरीद-बिक्री करता था और माल को त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल तक पहुंचता था।
विज्ञापन
गिरफ्तार हुआ भूपिंदर सिंह चौहान।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
नशे के लिए इस्तेमाल होने वाले फेंसिडिल कफ सिरप और कोडीनयुक्त दवाओं के अवैध कारोबार में एसटीएफ ने भूपिंदर सिंह चौहान को गिरफ्तार किया है। उसकी गिरफ्तारी विभूतिखंड में शहीद पथ तिराहे से की गई। वह जेल में अपने सिंडिकेट से जुड़े आरोपियों से मुलाकात करने आया था।
विज्ञापन
एसटीएफ के एएसपी लाल प्रताप सिंह के मुताबिक भूपिंदर वर्ष 2006 में निकोलस पिरामल फार्मा कंपनी में एरिया मैनेजर था। वर्ष 2014 में उसने विशाल के लिए वेट एजेंसिज और 2016 में विभोर राणा के नाम से जीआर ट्रेडिंग का ड्रग लाइसेंस बनवाया। कोरोना काल में कफ सिरप का कारोबार बढ़ा। जून से अगस्त 2022 के बीच मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, अलीगढ़, बुलंदशहर और शामली समेत कई जिलों के करीब 100 स्टॉकिस्टों को बिलिंग की गई।
विज्ञापन
पूछताछ में भूपिंदर ने बताया कि बाद में विशाल सिंह के नाम पर बीएन फार्मास्यूटिकल्स को सीएफए बनाया गया। इसके जरिये पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कफ सिरप की बिक्री होती थी। एसटीएफ के मुताबिक खरीद-बिक्री का हिसाब दिखाने के लिए गाजियाबाद में वाशु एंटरप्राइजेज, अमर ट्रेडर्स, अंकित फार्म और कृष्णा फार्मा जैसी फर्जी फर्मों का इस्तेमाल किया जाता था।
विज्ञापन
जांच में सामने आया कि अमित गुप्ता उर्फ रिंकू और मेरठ निवासी आसिफ बिना बिल के माल खरीदते थे। इसे नशे के लिए इस्तेमाल करने वाले तस्करों तक पहुंचाया जाता था। माल त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की सीमा तक भेजने और भुगतान हवाला से करने की बात भी सामने आई है।