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यूपी : अब किसान एमएसपी पर लेंगे सरकार का इम्तिहान, संयुक्त किसान मोर्चा अभी आंदोलन वापस लेने को तैयार नहीं

Sat, 20 Nov 2021 11:27 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ
अमित मुद्गल, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Sat, 20 Nov 2021 11:27 AM IST
सार

भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा कहते हैं कि जब तक एमएसपी पर कानून बनाकर इसे धरातल पर लागू नहीं किया जाएगा, तब तक किसान मानने वाले नहीं है। 22 नवंबर को लखनऊ में ईको गार्डन में पंचायत की तैयारी की जा रही है। 

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UP: Now farmers will take the government's test on MSP, United Kisan Morcha is not ready to withdraw the movement yet
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून को वापस लेने का एलान कर दिया, पर किसान अभी आंदोलन को वापस लेने के मूड में नहीं हैं। अब फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकार का इम्तिहान लेने की तैयारी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, किसानों ने 22 नवंबर को लखनऊ के ईको गार्डन में बड़ी पंचायत करने का एलान किया है। 

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पिछले साल 17 सितंबर को संसद में कृषि बिल पास किए गए थे। इसके विरोध में किसानों ने 3 नवंबर को आंदोलन शुरू किया था, जो लगातार चल रहा है। लगभग साल भर में आंदोलन ने जहां किसानों को एकजुट किया, वहीं कई सियासी बदलाव भी कराए। खासतौर से पश्चिमी उप्र में आंदोलन लगातार मुखर होता गया। जगह-जगह सरकारी नुमाइंदों के विरोध शुरू हो गए। तिकुनिया प्रकरण के बाद इस आंदोलन पूर्वांचल में भी गति पकड़ लिया। तब से किसान यहां भी आंदोलन को लगातार रफ्तार दी है।
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पंचायत चुनाव में हुआ था बड़ा असर
कृषि कानूनों पर विरोध का सबसे बड़ा असर पंचायत चुनावों में दिखाई दिया। चूंकि पश्चिम यूपी में सपा, राष्ट्रीय लोकदल, कांग्रेस व बसपा लगातार इस पर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे तो पंचायत चुनाव के परिणाम भाजपा के लिए अपेक्षाकृत अनुकूल नहीं रहा। सपा, रालोद को इसमें अच्छी सफलता मिली। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा ने सभी को पटखनी दे दी, पर विपक्षी दलों ने इसे सरकारी मैनेजमेंट का परिणाम माना।
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ऐन मौके पर पकड़ न हो जाए ढीली 
आंदोलन के जरिए खासतौर से पश्चिमी उप्र की सियासत को साध रहे सूरमाओं के लिए कृषि कानून वापसी की घोषणा कई मायनों में अहम है। एक तो यह मुद्दा पश्चिमी उप्र में बहुत ही उबाल पर है। दूसरा, विधानसभा चुनाव के लिए बन रहे गठबंधनों का आधार किसान और यह आंदोलन है। चुनाव सिर पर हैं। ऐसे में अगर ऐन मौके पर पकड़ ढीली हो गई तो इसके परिणामों पर असर को लेकर चिंता लाजिमी है। हालांकि भाजपा चुनाव से पहले इस निर्णय को जन-जन तक पहुंचाने कवायद करेगी। वहीं, संदेश देने की कोशिश होगी कि किसानों के हित में सरकार ने निर्णय बदला है।

लखनऊ में किसान मोर्चा भरेगा हुंकार
अब संयुक्त किसान मोर्चा लखनऊ में हुंकार भरने की तैयारी में है। मोर्चा की प्रदेश कमेटी के सदस्य एवं भाकियू के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिनाम सिंह वर्मा कहते हैं कि कृषि कानून वापसी केवल चुनावी जुमला है। जब तक एमएसपी पर कानून बनाकर इसे धरातल पर लागू नहीं किया जाएगा, तब तक किसान मानने वाले नहीं है। इसके अलावा भी कई मुद्दे हैं। अभी बिजली, डीजल, महंगाई आदि पर बात होनी है। 22 नवंबर को लखनऊ में ईको गार्डन में पंचायत की तैयारी की जा रही है। 

ये कानून थोपे गए थे। पर, सवाल यह है कि किसानाें का वास्तविक लाभ कैसे हो? शुरुआत एमएसपी गारंटी कानून से हो। किसान को भरोसा देना होगा। यदि केवल चुनावी माहौल बनाना चाहते हैं तो इससे बात नहीं बनेगी। आंदोलन को लेकर संयुक्त मोर्चा जो भी फैसला लेगा, उस पर ही आगे निर्णय होगा। -गौरव टिकैत, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाकियू युवा


गांव में लोगों ने पीएम के निर्णय की मुक्त कंठ से सराहना की है। किसानों ने स्वागत किया है। दरअसल अब विपक्ष के पास मुद्दा ही नहीं रहा है। अब विकास और कानून व्यवस्था पर बात होगी। एजेंडा हम सैट करेेंगे। निश्चित रूप से यह बड़ा कदम है। -संजीव बालियान, केंद्रीय पशुधन, डेयरी, मत्स्य राज्यमंत्री

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