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यूपी : सिस्टम ओवरलोड होने से नहीं मिल रही पर्याप्त बिजली, कनेक्टेड लोड 6.60 करोड़ केवी, उपकेंद्रों की क्षमता 5.21 करोड़ केवी
Tue, 17 May 2022 11:08 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Tue, 17 May 2022 11:08 AM IST
सार
प्रदेश में उपभोक्ताओं का कनेक्टेड लोड 6.60 करोड़ किलोवाट तक पहुंच गया है जबकि 132 केवी उपकेंद्रों की क्षमता महज 5.21 करोड़ किलोवाट ही है। यानी सिस्टम पर क्षमता से ज्यादा लोड है। इससे तमाम जगहों पर बिजली होते हुए भी लोगों को नहीं मिल पा रही है।
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उत्तर प्रदेश में बिजली संकट
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विस्तार
प्रदेश में बिजली संकट की एक बड़ी वजह सिस्टम (ट्रांसमिशन व वितरण नेटवर्क) का ओवरलोड होना भी है। पावर कॉर्पोरेशन बिजली की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए जैसे-तैसे अतिरिक्त बिजली का इंतजाम कर रहा है लेकिन सिस्टम की खामियों के चलते लोगों को प्रचंड गर्मी में बिजली के लिए तरसना पड़ रहा है।
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प्रदेश में उपभोक्ताओं का कनेक्टेड लोड 6.60 करोड़ किलोवाट तक पहुंच गया है जबकि 132 केवी उपकेंद्रों की क्षमता महज 5.21 करोड़ किलोवाट ही है। यानी सिस्टम पर क्षमता से ज्यादा लोड है। इससे तमाम जगहों पर बिजली होते हुए भी लोगों को नहीं मिल पा रही है। गर्मी के मद्देनजर पहले से संभावित मांग का सही आकलन करके क्षमता वृद्धि पर ध्यान न देने समस्या गंभीर हो गई है। आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।
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उधर, बिजली की मांग 25 हजार मेगावाट पार जा चुकी है। अगले माह तक इसमें और इजाफा होने के आसार हैं। ऐसे में लोड व सिस्टम की क्षमता में भारी अंतर सिरदर्द साबित हो सकता है। हालांकि पावर कॉर्पोरेशन सिस्टम पर लोड कम करने के लिए लगातार नए उपकेंद्रों, लाइनों आदि के निर्माण की कवायद में जुटा है लेकिन मौजूदा सिस्टम के साथ न देने से मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। ज्यादातर ब्रेकडाउन ओवरलोडिंग की वजह से हो रहे हैं। ऐसे में 132 केवी, 33 केवी व 11 केवी के सिस्टम की खास निगरानी पर जोर है। फील्ड के अधिकारियों को शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक उपकेंद्रों व लाइनों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष एम. देवराज खुद नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
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राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जिस प्रकार से गर्मी बढ़ रही है, उसे देखते हुए जून-जुलाई में बिजली की मांग 26,000 मेगावाट से ऊपर पहुंचने की संभावना है। ऐसे में बिजली कंपनियों को हर स्तर पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। कई जगह 132 केवी उपकेंद्र बनकर तैयार हैं लेकिन बिजली निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से पूरी क्षमता पर नहीं चल पा रहे हैं। सिस्टम में असंतुलन की वजह से ही लोकल फॉल्ट ज्यादा हो रहे हैं। गर्मी और बढ़ने पर अगर उपभोक्ता पूरे लोड का इस्तेमाल करने लगेंगे तो सिस्टम हांफने लगेगा। उन्होंने पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन से सिस्टम को दुरुस्त कराने का अनुरोध किया है, जिससे भीषण गर्मी में लोगों को पर्याप्त बिजली मिलती रहे।