फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP News : Samajwadi Party Ambedkar Prem caused panic in BSP

Political Waves : सपा के आंबेडकर प्रेम से बसपा में खलबली, काट करने के लिए माथापच्ची शुरू, मोर्चे पर मायावती

Sat, 01 Oct 2022 06:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमित मुद्गल, लखनऊ
अमित मुद्गल, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 01 Oct 2022 06:06 AM IST
सार

UP News : सपा की सियासी प्रयोगशाला में जिस तरह से लोहियावाद के साथ आंबेडकरवाद का मिश्रण तैयार हो रहा है उससे बसपाई रणनीतिकारों की धड़कनें तेज हो गई हैं। अपने काडर वोटरों को सहेजने की चुनौती बढ़ गई है।

विज्ञापन
UP News : Samajwadi Party Ambedkar Prem caused panic in BSP
sp bsp - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सपा की सियासी प्रयोगशाला में जिस तरह से लोहियावाद के साथ आंबेडकरवाद का मिश्रण तैयार हो रहा है उससे बसपाई रणनीतिकारों की धड़कनें तेज हो गई हैं। अपने काडर वोटरों को सहेजने की चुनौती बढ़ गई है। बसपाई खेमे में इस पर चिंतन भी शुरू हो गया है कि सपा के इस दांव की काट कैसे निकाली जाए।  

विज्ञापन


यूपी विधानसभा चुनाव 2022 का परिणाम कुछ ऐसा आया कि उसने कई पार्टियों के सारे समीकरण उलट दिए। खासतौर पर बाबा साहब आंबेडकर के अनुयायी कहे जाने वाले दलित वोटरों का रुख कई अलग संकेत दे गया। इन्हें बसपा अपना काडर वोटर मानती रही है और इनके ही दम पर पार्टी सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला अपना कर सत्ता के शिखर तक कई बार पहुंच चुकी है। पर बीते विधानसभा चुनाव में यह वोटर बसपा से खिसक गया।
विज्ञापन


परिणाम यह रहा कि बसपा का सिर्फ एक उम्मीदवार चुनावी मैदान में टिक पाया। वहीं, भाजपा ने चुनाव में इस वर्ग को साधने के लिए पूरी ताकत झोंकी थी। इससे कई सीटों पर उसकी राह आसान हो गई। भाजपा के उसी राह को अब सपा ने पकड़ ली है। कारण साफ है। विधानसभा चुनाव में मुसलमानों ने सपा को पूरी ताकत के साथ वोट किया। अन्य कुछ जातियां भी सपा के साथ आईं पर जिस तरह से दलित वोटर बसपा को वोट करते रहे हैं उस तरह का कोई दूसरा वर्ग सपा के साथ नहीं खड़ा हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


नतीजा, पूरा माहौल तैयार होने के बावजूद सपा सत्ता से दूर ही रह गई। सपाई थिंक टैंक  का मानना है कि मुसलमानों के साथ दलित व कुछ अन्य वर्ग पार्टी के साथ आ गए तो आने वाले चुनावों में सपा की नैया पार हो सकती है। 


मायावती ने संभाला मोर्चा 
सपा की चाल बसपा भली भांति समझ रही है। उसके रणनीतिकारों को यह साफ दिख रहा है कि यदि बसपा का काडर थोड़ा भी खिसका तो उसकी सत्ता में वापसी के सारे मार्ग बंद हो जाएंगे। यही कारण है कि खुद बसपा सुप्रीमो ने हाल ही में ट्वीट कर सपा पर निशाना साधा और यह कहने में कोई देर नहीं लगाई कि सपा आंबेडकर और बहुजन समाज के लोगों की विरोधी रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed