यूपी: मायावती ने राजनीतिक बयानबाजी पर जताई चिंता, बोलीं- नेताओं के बीच बढ़ती कटुता देशहित में नहीं
बसपा प्रमुख मायावती ने भारतीय राजनीति में बढ़ती कटुता, व्यक्तिगत टिप्पणियों और अमर्यादित बयानबाजी पर चिंता जताई है। उन्होंने नेताओं से सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने की अपील की। मायावती ने कहा कि राजनीतिक दलों को आपसी टकराव के बजाय गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए।
विस्तार
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने भारतीय राजनीति में बढ़ती कटुता, आपसी अविश्वास और आरोप-प्रत्यारोप पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी का स्तर अब व्यक्तिगत टिप्पणियों, अमर्यादित भाषा, जातिवाद और हिंसक बयानों तक पहुंचना दुखद है। इससे देश की गरिमा और राजनीतिक व्यवस्था पर जनता के भरोसे को नुकसान पहुंच सकता है।
मायावती ने कहा कि शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं को एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए। आपत्तिजनक और विषैली राजनीति को किसी भी स्तर पर बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संकीर्ण और गरीब-विरोधी स्वार्थों से प्रेरित राजनीति के कारण लोगों का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होना देश और जनहित में नहीं है।
1. भारतीय राजनीति में आपसी अविश्वास, द्वेष, कटूता, आरोप-प्रत्यारोप आदि का स्तर, गिरते-गिरते अब व्यक्तिगत स्तर पर भी काफी बेलगाम होकर असंसदीय, अमर्यादित, अपमानजनक, संकीर्ण व जातिवाद से ग्रसित होता हुआ, हिंसक बयानबाजी़ तक भी पहुँच जाना अति-दुखद तथा देश की गरिमा व मान-मर्यादा आदि के लिये भी अति-चिन्तनीय। 2. इतना ही नहीं बल्कि इससे बढ़कर शीर्ष स्तर पर भी आसीन लोगों के लिये एक-दूसरे के लिये अगर समुचित सम्मान नहीं तो आपत्तिजनक एवं विषैली राजनीति को अवश्य ही किसी भी प्रकार से बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिये, वरना ख़ासकर बढ़ती संकीर्ण व ग़रीब-विरोधी स्वार्थी राजनीति के प्रचलन के कारण लोगों का भरोसा यहाँ की राजनीतिक व्यवस्था पर कमज़ोर होना कतई भी देश व जनहित में नहीं होगा। 3. वैसे भी सरकारी स्तर पर व्यापक भ्रष्टाचार व चुनावी प्रक्रिया पर भी ऊंगली उठने के कारण जनता में पहले से ही काफी बेचैनी है और ऐसे में नेताओं के बीच आपस में नाक की लड़ाई स्थिति को और भी अधिक विषम बना रही है, जबकि जनता की चाहत देश की बढ़ती ग़रीबी, बेरोज़गारी व महंगाई आदि जैसी ज्वलन्त समस्याओं के निदान पर सभी का ध्यान केन्द्रित करने की है। 4. ऐसे में ख़ासकर सभी पार्टियों व उनके नेताओं के बीच अशोभनीय टीका-टिप्पणी व बयानबाजी का बढ़ता हुआ होड़ यहाँ राजनीतिक माहौल को और भी अधिक कड़वा व विषैला बनायेगा, जो अनुचित। सभी लोग इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दें तो यह बेहतर।
— Mayawati (@Mayawati) October 27, 2026
1. भारतीय राजनीति में आपसी अविश्वास, द्वेष, कटूता, आरोप-प्रत्यारोप आदि का स्तर, गिरते-गिरते अब व्यक्तिगत स्तर पर भी काफी बेलगाम होकर असंसदीय, अमर्यादित, अपमानजनक, संकीर्ण व जातिवाद से ग्रसित होता हुआ, हिंसक बयानबाजी़ तक भी पहुँच जाना अति-दुखद तथा देश की गरिमा व मान-मर्यादा आदि के लिये भी अति-चिन्तनीय। 2. इतना ही नहीं बल्कि इससे बढ़कर शीर्ष स्तर पर भी आसीन लोगों के लिये एक-दूसरे के लिये अगर समुचित सम्मान नहीं तो आपत्तिजनक एवं विषैली राजनीति को अवश्य ही किसी भी प्रकार से बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिये, वरना ख़ासकर बढ़ती संकीर्ण व ग़रीब-विरोधी स्वार्थी राजनीति के प्रचलन के कारण लोगों का भरोसा यहाँ की राजनीतिक व्यवस्था पर कमज़ोर होना कतई भी देश व जनहित में नहीं होगा। 3. वैसे भी सरकारी स्तर पर व्यापक भ्रष्टाचार व चुनावी प्रक्रिया पर भी ऊंगली उठने के कारण जनता में पहले से ही काफी बेचैनी है और ऐसे में नेताओं के बीच आपस में नाक की लड़ाई स्थिति को और भी अधिक विषम बना रही है, जबकि जनता की चाहत देश की बढ़ती ग़रीबी, बेरोज़गारी व महंगाई आदि जैसी ज्वलन्त समस्याओं के निदान पर सभी का ध्यान केन्द्रित करने की है। 4. ऐसे में ख़ासकर सभी पार्टियों व उनके नेताओं के बीच अशोभनीय टीका-टिप्पणी व बयानबाजी का बढ़ता हुआ होड़ यहाँ राजनीतिक माहौल को और भी अधिक कड़वा व विषैला बनायेगा, जो अनुचित। सभी लोग इस ओर ज़रूर समुचित ध्यान दें तो यह बेहतर।
— Mayawati (@Mayawati) October 27, 2026जनता की समस्याओं पर ध्यान देने की जरूरत
बसपा प्रमुख ने कहा कि सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच नेताओं के बीच आपसी टकराव से राजनीतिक माहौल और खराब हो रहा है। जनता चाहती है कि राजनीतिक दल गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई जैसी गंभीर समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करें।
अमर्यादित बयानबाजी से बचने की अपील
मायावती ने कहा कि राजनीतिक दलों और उनके नेताओं के बीच अशोभनीय टिप्पणियों और बयानबाजी की बढ़ती होड़ से माहौल और कड़वा होगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और नेताओं से इस पर गंभीरता से विचार करने तथा सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने की अपील की।