'यूपी में न्याय करना है मुश्किल'
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यूपी में बतौर मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष मेरा अनुभव बिल्कुल अच्छा नहीं है। यहां घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, भ्रूण हत्या, शोषण के मामले ज्यादा सामने आते हैं। यह कहना है न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी का।
वे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘वैश्वीकरण, विधि एवं मानवाधिकारों का संरक्षण : मुद्दे एवं चुनौतियां’ विषय पर सोमवार को राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
न्यायमूर्ति चटर्जी ने कहा कि यूपी में स्थिति में सुधार के लिए स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर मानवाधिकार की पढ़ाई करवाई जाए। ताकि सभी को मानवाधिकार हनन के बारे में जागरूक किया जा सके।
कभी-कभी हम अपने अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में ढंग से जागरूक न होने के कारण हनन का शिकार बनते हैं। स्त्री और पुरुष के मौलिक अधिकारों की सही जानकारी न होने के अभाव में भी हम हनन का शिकार बन जाते हैं।
तो यही पनपने लगेगा इबोला
बीबीएयू के कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने कहा कि हम सभी को समानता का व्यवहार करना चाहिए। वैश्वीकरण पर चर्चा करते हुए प्रो. सोबती ने कहा कि हमारे देश में सबसे बड़ा मुद्दा शिक्षा व स्वास्थ्य है।
हमें इन सेक्टर के ग्लोबलाइजेशन पर जोर देना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब इबोला या रोटा वायरस यहीं पनपने लगेंगे।
इसकी रोकथाम भी मानवाधिकार के ही अंतर्गत आती है। भारतीय विधि संस्था, नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर मनोज सिन्हा ने कहा कि हर कोई वैश्वीकरण का लाभ तो पाना चाहता है लेकिन सही मार्ग नहीं जानता।
वैश्वीकरण के इस दौर में बेहतर तरीके से किए गए विकास से ही गरीबी की खाई को पाटा जा सकता है। कार्यक्रम में डॉ. प्रीति सक्सेना, डॉ. शशि कुमार, प्रो. सुनीता मिश्रा, प्रो. एसके भटनागर सहित बड़ी संख्या व छात्र मौजूद थे।