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Lucknow : यूपी में सक्रिय है कैंसर की नकली दवा बेचने वाला अंतर्राज्यीय गिरोह, नेटवर्क तोड़ने में जुटा प्रशासन

चंद्रभान यादव, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 24 Nov 2022 06:16 AM IST
सार

UP : प्रदेश में करीब 25 करोड़ रुपये का एंटी कैंसर दवाओं का कारोबार है। ये दवाएं महंगी होती हैं। कीमोथेरेपी में प्रयोग होने वाली दवा की एक डोज करीब 10 से 30 हजार के बीच होती है। ऐसे में यह गिरोह नामचीन कंपनियों के रैपर का सहारा लेता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

प्रदेश में कैंसर रोधी और विटामिन की नकली दवाओं के कारोबार का जाल फैला है। इसमें अंतर्राज्यीय गिरोह शामिल है। यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल सहित अन्य राज्यों से दवाएं लाता है। इसे नए रैपर में पैक करके उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आपूर्ति कर रहा है। इसमें आगरा के कई व्यापारी शामिल हैं।



प्रदेश में करीब 25 करोड़ रुपये का एंटी कैंसर दवाओं का कारोबार है। ये दवाएं महंगी होती हैं। कीमोथेरेपी में प्रयोग होने वाली दवा की एक डोज करीब 10 से 30 हजार के बीच होती है। ऐसे में यह गिरोह नामचीन कंपनियों के रैपर का सहारा लेता है। वे नकली अथवा अधोमानक दवाओं को नामचीन कंपनी के पैकेट में पैक करके अस्पतालों के आसपास स्थित मेडिकल स्टोर तक पहुंचाते हैं। फिर मेडिकल स्टोर के एजेंट मरीजों तक पहुंचाते हैं। सस्ती दवा का झांसी देकर रसीद भी नहीं देते हैं। 


सूत्रों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग को सुराग मिला है कि दिल्ली, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में तैयार होने वाली नकली व अधोमानक दवाएं गाजियाबाद, आगरा और लखनऊ के जरिए पूरे प्रदेश के मेडिकल स्टोर पर पहुंच रही हैं। इसमें ज्यादातर एंटी कैंसर की दवाएं हैं। कुछ हार्ट, किडनी व लिवर के मरीजों से जुड़ी दवाएं भी हैं। विभाग के आला अफसरों ने इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए रणनीति बनाई गई है। 

सभी ड्रग इंस्पेक्टरों को निर्देश दिया है कि सप्ताह में कम से कम दो दिन अलग-अलग इलाके के स्टोर की दवाएं जांची जाएं। संबंधित दवा के बिल व वाउचर का मिलान किया जाए। जिस दुकान पर बिना बिल की दवाएं मिले, उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें। संबंधित मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त करने की भी कार्रवाई की जाएं। लखनऊ, कानपुर, आगरा, गोरखपुर सहित जहां सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं से जुड़े अस्पताल हैं। वहां विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।

गाजियाबाद और हिमाचल से भी मिला सुराग
गाजियाबाद के ट्रानिका सिटी में 11 नवंबर को पकड़े गए लोगों से भी एफएसडीए को दवा आपूर्ति के ठिकानों की जानकारी मिली है। यहां करीब पांच करोड़ की दवाएं पकड़ी गई थीं। मौके पर बांग्लादेश, यूएसए, कंबोडिया में बनी दवाएं और नकली रैपर बनाने वाली मशीन मिली थी। इस कारोबार में डॉक्टर और इंजीनियर भी शामिल थे। पूछताछ में आगरा, लखनऊ के कारोबारी के यहां दवाएं भेजवाने की बात सामने आई है। इसी तरह हिमाचल के बद्दी में पकड़ी गई बिना लाइसेंस के विटामिन बनाने वाले कारखाने से आगरा के व्यापारी के यहां दवाओं की आपूर्ति होने की बात सामने आई है। एफएसडीए की टीम आगरा निवासी व्यापारी की तलाश में जुटी है।

हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों से मिले इनपुट के आधार पर निगरानी की जा रही है। हर जिले में टीम सक्रिय है। बिना बिल दवा बेचने पर रोक है। मरीजों से अपील है कि दवा खरीदते समय बिल जरूर लें। गाजियाबाद में पकड़ी गई दवा का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित बैच को बैन किया जाएगा।
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-एके जैन, उप आयुक्त ड्रग, एफएसडीए

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