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यूपी: लखनऊ में सस्ती दरों पर भूखंड खरीदने का बेहतरीन मौका, दीपावली पर लॉन्च होगी योजना; जानिए डिटेल

Mon, 26 Oct 2026 09:01 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 26 Oct 2026 09:01 AM IST
सार

Plots in Lucknow: मोहनलालगंज क्षेत्र में न्यू जेल रोड पर विकसित की जा रही इस योजना को रेरा से मंजूरी मिल गई है। दीपावली पर इस योजना को लॉन्च किया जाएगा। 

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UP: Great opportunity to buy plots in Lucknow at affordable rates, scheme to be launched on Diwali
लखनऊ में सस्ते प्लॉट खरीदने का मौका। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

करीब दो साल के इंतजार के बाद आवास विकास परिषद की सौमित्र विहार आवासीय योजना दीपावली पर लॉन्च होगी। मोहनलालगंज क्षेत्र में न्यू जेल रोड पर विकसित की जा रही इस योजना को रेरा से मंजूरी मिल गई है। आवास विकास बोर्ड भी इसकी सहमति दे चुका है। अब मुख्यमंत्री के हाथों योजना का शुभारंभ कराने की तैयारी है। यहां जमीन की कीमत करीब 2700 रुपये प्रति वर्ग फीट प्रस्तावित है। पहले चरण में 2200 से अधिक भूखंडों के पंजीकरण खोले जाएंगे। इससे करीब एक लाख लोगों को आवासीय सुविधा मिलेगी।

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परिषद ने करीब दो साल पहले 560 एकड़ क्षेत्रफल वाली इस योजना को मंजूरी दी थी। इसे दो चरणों में विकसित किया जाना है। योजना को बीते साल महाकुंभ के मौके पर लॉन्च करने की तैयारी थी लेकिन रेरा पंजीकरण समेत विभिन्न कारणों से मामला अटकता रहा। अब मंजूरी मिलने के बाद इसके लॉन्च होने का रास्ता साफ हो गया है। आवास विकास बोर्ड भी योजना को सहमति दे चुका है।
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योजना को लैंड पूलिंग नीति के तहत विकसित किया जा रहा है। इसमें किसानों से जमीन लेकर उन्हें विकसित भूमि का 25 प्रतिशत हिस्सा प्लॉट के रूप में आवंटित किया गया है। परिषद का दावा है कि यह लैंड पूलिंग नीति के तहत आम लोगों के लिए पंजीकरण खोलने वाली प्रदेश की पहली योजना होगी। एलडीए की आईटी सिटी और वेलनेस सिटी योजनाओं में अभी आम लोगों के लिए पंजीकरण नहीं खोला गया है। वहां किसानों को जमीन के बदले प्लॉट दिए गए हैं।
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एलडीए की योजनाओं से सस्ती होगी जमीन
सौमित्र विहार में जमीन की कीमत आसपास की एलडीए योजनाओं के मुकाबले कम रहेगी। एलडीए की आईटी सिटी योजना में करीब 4000 रुपये प्रति वर्ग फीट और वेलनेस सिटी में करीब 5100 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर प्रस्तावित है। आगरा एक्सप्रेसवे के पास वरुण विहार योजना में जमीन की दर 2800 रुपये प्रति वर्ग फीट और सीतापुर रोड स्थित नैमिष नगर में 3800 रुपये प्रति वर्ग फीट तय की गई है। इन दोनों योजनाओं में 27 अक्तूबर तक पंजीकरण चल रहा है।

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एक नजर में इस योजना में

  • - आवासीय भूखंड: 2092
  • - व्यावसायिक भूखंड: 169
  • - भूखंडों का आकार: 40 से 300 वर्ग मीटर

दीपावली पर लॉन्च किया जाएगा
योजना को रेरा से मंजूरी मिल गई है। अब दीपावली पर लॉन्च किया जाएगा। इससे बड़ी आबादी को आवासीय सुविधा मिलेगी। - चंदन पटेल, उप आवास आयुक्त, आवास विकास परिषद
 

प्रबंध नगर योजना : 4500 रुपये वर्गफीट में एलडीए देगा प्लाॅट

 सीतापुर रोड पर एलडीए की प्रबंध नगर आवासीय योजना में प्लॉट खरीदने के लिए करीब 4500 रुपये प्रति वर्गफीट की दर चुकानी पड़ सकती है। पिछले 20 साल से अटकी इस योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है। दो नवंबर को होने वाली एलडीए बोर्ड की बैठक में किसानों को बढ़ा मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड की मंजूरी के बाद मुआवजा वितरण होगा और फिर योजना लॉन्च की जाएगी। एलडीए के एक अधिकारी के मुताबिक, योजना विकसित करने में जमीन की लागत करीब 4000 से 4400 रुपये प्रति वर्गफीट तक आएगी। ऐसे में प्लॉट की दर करीब 4500 रुपये प्रति वर्गफीट रखने की तैयारी है। हालांकि, यह दर अभी प्रस्तावित है।

करीब एक महीने पहले भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण (लारा कोर्ट) ने जमीन के मुआवजे से जुड़े लंबे विवाद का निपटारा करते हुए किसानों के लिए प्रति बीघा 1.10 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा तय किया था। पहले यह मुआवजा 2.57 लाख रुपये प्रति बीघा था। अब एलडीए बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद किसानों को बढ़ा मुआवजा दिया जा सकेगा। इससे योजना के रास्ते में लंबे समय से बनी अड़चन दूर होने की उम्मीद है। एलडीए ने प्रबंध नगर योजना के लिए 13 सितंबर 2007 को जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत घैला, ककौली और अल्लूनगर डिगुरिया की करीब 3350 बीघा जमीन ली जानी थी। मुआवजे को लेकर किसानों और एलडीए के बीच विवाद होने से योजना आगे नहीं बढ़ सकी। जमीन की रजिस्ट्री पर रोक के कारण किसान अपनी जमीन बेच भी नहीं पा रहे थे। इस वजह से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

पर्यावरण संबंधी आपत्तियों से भी रुकी थी योजना

योजना के विरोध में लारा कोर्ट में पर्यावरण संबंधी आपत्तियां भी उठाई गई थीं। इसमें हजारों पेड़ कटने और प्राकृतिक जलस्रोतों व तालाबों के खत्म होने की आशंका जताई गई थी। इसके चलते एलडीए को योजना विकसित करने के लिए जरूरी पर्यावरणीय अनापत्ति नहीं मिल सकी। बाद में एलडीए ने पूरी योजना का ड्रोन सर्वे कराया, ताकि मौजूदा निर्माण, पेड़ों और जलस्रोतों की स्थिति का आकलन किया जा सके। इसके बाद मुआवजे के विवाद के निपटारे का रास्ता निकला।

कनेक्टिविटी से भी मिलेगा फायदा
प्रबंध नगर योजना फैजुल्लागंज से लगी है। यहां जलभराव रोकने के लिए करीब साढ़े पांच किलोमीटर लंबे बंधे और पक्के पुल का निर्माण कराया जा रहा है। इससे आईआईएम तक आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। ग्रीन कॉरिडोर बनने से भी योजना की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसके अलावा बसंतकुंज योजना तक मेट्रो का विस्तार होने से आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सकेगी।

 
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