हर साल 15 करोड़ खर्च कर कोर्ट बनाएगी सरकार
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यूपी में महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों के दोषियों को जल्द से जल्द सीखचों के पीछे भेजा जा सकेगा। प्रदेश कैबिनेट ने ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए सूबे के सभी जिलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मंजूरी दे दी है।
यानी महिला अपराधों के मामले निपटाने के लिए 75 फास्ट ट्रैक बनाए जाएंगे। इसके अलावा तीन-तीन महीने के लिए अस्थायी रूप से चल रही पांच फास्ट ट्रैक कोर्ट को स्थायी किया जाएगा।
यानी कुल 80 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। इन सभी फास्ट ट्रैक कोर्ट पर सरकार हर साल 15.15 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
कैबिनेट ने किया फैसला
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में शुक्रवार को प्रदेश कैबिनेट ने यह फैसला किया। बंदायूं में दो बहनों की हत्या की वारदात के बाद मुख्यमंत्री की घोषणा व इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ की सहमति के अनुसार न्याय विभाग ने हर जिले में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट के हिसाब से 75 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने का प्रस्ताव दिया था।
बिटिया व बदायूं कांड बनी वजह
दो साल पहले दिल्ली में बिटिया कांड के बाद महिलाओं के शोषण व उत्पीड़न की घटनाओं में तेजी से न्याय दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की मांग तेज हो गई थी।
इस साल बदायूं में दो बहनों की हत्या के बाद सरकार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का दबाव बढ़ गया था।
क्या पड़ेगा असर
महिला अपराध के मामले कोर्ट में लंबित पड़े रहते हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से ऐसे मामले की सुनवाई में तेजी आएगी और गुनहगार लंबे समय तक सजा से बच नहीं सकेंगे।