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विज्ञापनों में खुद की तस्वीर न छपने से परेशान है 'सरकार'?

Tue, 02 Jun 2015 01:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 02 Jun 2015 01:22 PM IST
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UP govt to file petition against SC decision.

सरकारी विज्ञापनों पर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और प्रधान न्यायाधीश के अलावा किसी अन्य की फोटो छपने पर रोक संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकती है।

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इसके लिए सभी कानूनी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि संघीय ढांचे में पीएम और राष्ट्रपति के फोटो छप सकते हैं तो राज्य में सीएम और राज्यपाल के क्यों नहीं?
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राज्यों में सरकारी विज्ञापनों में मुख्यमंत्री और मंत्रियों की फोटो छपना आम बात है। ये विज्ञापन मुख्यमंत्री और सरकारों की ब्रांडिंग का मुख्य जरिया होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने 13 मई के आदेश में इस पर रोक लगा दी है। इसके बाद से सरकारी विज्ञापनों में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के फोटो हटा दिए गए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में यूपी के अतिरिक्त महाधिवक्ता गौरव भाटिया का कहना है कि भारत में संघीय ढांचा है। यहां जो व्यवस्थाएं केंद्र पर लागू होती हैं, वहीं राज्यों पर लागू होती हैं। यदि केंद्र सरकार के विज्ञापनों पर प्रधानमंत्री की फोटो छप सकती है तो राज्य सरकार के विज्ञापनों पर मुख्यमंत्री की फोटो क्यों नहीं छप सकती?

कोर्ट के फैसले में कमेटी की सिफारिश का उल्लेख नहीं

UP govt to file petition against SC decision.

बकौल भाटिया, सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर एक कमेटी बनाई थी। उसने सिफारिश की थी कि राज्यों में मुख्यमंत्री और राज्यपाल की फोटो प्रकाशित करने की अनुमति होनी चाहिए। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कमेटी की इस सिफारिश का कोई उल्लेख नहीं है।

वह कहते हैं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सभी कानूनी विकल्पों और संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। पुनर्विचार याचिका भी दाखिल हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था फैसले में
विज्ञापनों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और प्रधान न्यायाधीश के अलावा किसी की फोटो नहीं लगेगी। मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों की फोटो भी सरकारी विज्ञापनों में नहीं छपेगी। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि करदाताओं के धन को राजनेताओं और सत्ताधारी दलों के महिमामंडन पर खर्च नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने इसे लोकतंत्र के खिलाफ कहा

UP govt to file petition against SC decision.

अदालत ने कहा था कि सत्ताधारी दलों के लिए यह प्रचलन बन गया है कि किसी सामाजिक लाभ या किसी खास उपलब्धि को किसी व्यक्ति से जोड़ा जाता है। ऐसे में फोटो के जरिये उसकी शख्सियत बढ़ाने की कोशिश की जाती है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

तमिलनाडु दायर कर चुका है रिव्यू पेटीशन
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पहला रिव्यू पेटीशन तमिलनाडु सरकार ने 20 मई को दाखिल किया है। तमिलनाडु सरकार ने आश्चर्य जताया कि अदालत ने मुख्यमंत्री की फोटो छपने पर रोक लगा दी और प्रधानमंत्री की फोटो प्रकाशित करने की इजाजत दे दी। इसकी कोई वजह भी नहीं बताई गई है।

यह फैसला संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि पहले से यह व्यवस्था है कि सुप्रीम कोर्ट राज्य के नीतिगत मामलों में दखल नहीं देगा और किसी विभाग की योजना का विज्ञापन छापना राज्य सरकार की पॉलिसी का मामला है।

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