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मोदी को भेजी रिपोर्ट में टीम अखिलेश ने किया 'खेल'

Thu, 26 Mar 2015 02:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 26 Mar 2015 02:12 AM IST
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UP govt sends false report to central govt ovre farmers issue.

राज्य सरकार ने बेमौसम बारिश और ओलों से रबी की फसल को हुए नुकसान की गलत रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से केंद्रीय कृषि सचिव ने पीएम नरेंद्र मोदी के सामने राज्य के मुख्य सचिव आलोक रंजन से इस पर सख्त एतराज जताया।

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हालांकि इस सवाल से किनारा करते हुए मुख्य सचिव ने पीएम को बताया कि 31 जिलों में आधी से ज्यादा फसल नष्ट हो गई है। इसकी भरपाई के लिए 742 करोड़ रुपये की मांग करते हुए उन्होंने मुआवजे की मौजूदा दरों को काफी कम बताया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार दोपहर बाद करीब 3.30 बजे से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये राज्यों के मुख्य सचिवों से मुखातिब थे। इसके लिए राजधानी के योजना भवन में उत्तर प्रदेश के अफसर जुटे थे।
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प्रधानमंत्री ने शुरुआत करते हुए कहा, ‘किसानों पर विपत्ति देश पर विपत्ति है।’ इसके साथ ही उन्होंने केंद्रीय कृषि सचिव सिराज हुसैन को अपनी बात रखने के लिए कहा। इस पर सिराज हुसैन ने कहा कि पूरे देश में गेहूं की फसल को महज 3-4 फीसदी ही नुकसान हुआ है। अलबत्ता दलहन की फसल काफी प्रभावित हुई है।

महज 21 लाख हेक्टेअर की फसलों को नुकसान

UP govt sends false report to central govt ovre farmers issue.

उन्होंने नुकसान का सही आकलन केंद्र को भेजने का अनुरोध करते हुए कहा कि कई राज्यों ने गलत आंकड़े भेजे हैं। उत्तर प्रदेश में गेहूं का कुल रकबा 98.66 लाख हेक्टेयर है, जबकि शुरुआती आंकड़ों में उन्होंने 75 लाख हेक्टेयर फसल नष्ट होने की जानकारी दी थी। हकीकत में महज 21 लाख हेक्टेयर की फसलों को नुकसान हुआ है।

सिराज ने राज्यों से अपील की कि नेशनल डिजास्टर रिलीफ फंड (एनडीआरएफ) के तहत दिया गया करीब पांच हजार करोड़ रुपये राज्यों के पास डंप पड़ा है। इस राशि का जल्द इस्तेमाल किया जाए।

उन्होंने आरबीआई के निर्देशों के तहत किसानों की कर्ज वापसी के कार्यक्रम के पुनर्निर्धारण करने के लिए राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की बैठकें करने को भी कहा। साथ ही राज्यों से सिंचाई और बिजली का बिल माफ करने और अपनी ओर से भी अतिरिक्त मुआवजा देने की अपील की।

केंद्रीय कृषि सचिव की बात पूरी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के मुख्य सचिव से मुखातिब हुए। उन्होंने 25-50 फीसदी नुकसान होने पर भी किसानों को मुआवजा दिए जाने का सुझाव दिया। साथ ही कहा कि रिलीफ कैंप के लिए अभी तक 90 दिन की समय सीमा है, जिसे बढ़ाए जाने की जरूरत है।

इस तरह दिया जाता है मुआवजा

UP govt sends false report to central govt ovre farmers issue.

मुख्य सचिव आलोक रंजन ने राजस्थान के मुख्य सचिव के सुझावों से सहमति जताते हुए कहा कि मुआवजे की मौजूदा दरें भी काफी कम हैं। इन्हें बढ़ाए जाने पर भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नुकसान का आकलन कर लिया गया है और मेमोरेंडम बुधवार शाम तक केंद्र सरकार को मिल जाएगा।

यहां बता दें कि 50 फीसदी से ज्यादा नुकसान होने पर ही मुआवजा दिया जाता है। सिंचित जमीन के लिए यह 9000 रुपये और असिंचित जमीन के लिए 4500 रुपये प्रति हेक्टेयर है।

मुख्य सचिव रंजन ने बताया कि दैवीय आपदा मद में पूर्व में केंद्र से मिले 45 करोड़ रुपये जिलों को भेज दिए गए हैं। सिर्फ दो करोड़ रुपये ही बचे हैं। उन्होंने केंद्र के बराबर राज्य के भी मुआवजा देने के फैसले के बारे में भी पीएम को बताया।

कहा, किसानों से कृषि देयों की वसूली पर रोक लगा दी गई है। अन्य देयों की वसूली के लिए भी बैंकों को सख्ती न करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने नुकसान के आकलन के लिए केंद्रीय टीम को जल्द भेजने का प्रधानमंत्री से अनुरोध भी किया।

...क्या बचपन से ही आपको पता था बनेंगे चीफ सेक्रेटरी

राजस्थान के मुख्य सचिव ने पीएम के सामने किसानों की मांगों को बिना रुके रखा। जब उन्होंने अपनी बात पूरी की तो पीएम ने उनसे पूछा, ‘क्या आपको बचपन से पता था कि राज्य के मुख्य सचिव बनेंगे?’ इस पर सभी अफसर हंस पड़े।

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