प्रधानी चुनाव टले, प्रशासक देखेंगे कामकाज
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जिला पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों का चुनाव पहले और अलग कराने के लिए यूपी सरकार ने ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत सदस्य वार्डों के आरक्षण की कार्यवाही तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी है।
साथ ही इनके आरक्षण की नियमावली में संशोधन का फैसला किया है। अब ग्राम पंचायतों की चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रशासक ही इसका कामकाज देखेगा।
प्रमुख सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी ने शनिवार को जन्माष्टमी की छुट्टी के बावजूद ग्राम प्रधान व सदस्य के आरक्षण की कार्यवाही स्थगित करने का आदेश जारी कर दिया। हालांकि इसके लिए कोई कारण नहीं बताया गया।
सात नवंबर को पूरा हो रहा है कार्यकाल
ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत सदस्यों का कार्यकाल सात नवंबर को पूरा हो रहा है। संवैधानिक व्यवस्था के तहत इससे पहले इसका गठन हो जाना चाहिए। पर विशेष परिस्थितियों में सरकार इनका कार्यकाल अधिकतम छह माह तक बढ़ा सकती है।
हालांकि इस अतिरिक्त कार्यकाल में उसे प्रशासक नियुक्त करना होगा।
कौन होगा प्रशासक : सरकार के पास तीन विकल्प
1. मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर सकती है।
2. प्रधान न होने की वजह से प्रशासनिक समिति गठित कर सकती है।
3. सहायक विकास अधिकारी को इसकी जिम्मेदारी दी जा सकती है।