यूपी: 3 करोड़ लोगों को मिलेगा 'समाजवादी बीमा केयर कार्ड'
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प्रदेश सरकार सूबे के तीन करोड़ किसानों व भूमिहीन परिवारों को ‘समाजवादी बीमा केयर कार्ड’ देगी। इसके जरिये दुर्घटना होने पर इलाज व मुखिया की मृत्यु पर पांच लाख रुपये तक मुआवजा मिलेगा।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पिछले दिनों राजस्व विभाग की किसान दुर्घटना बीमा योजना के स्थान पर ‘मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना’ को मंजूरी दी थी। संस्थागत वित्त महानिदेशालय ने अब इसे लागू करने की रूपरेखा बना ली है।
यह कार्ड सूबे के समस्त खतौनी धारक किसान परिवारों व 75 हजार से कम सालाना आय वाले 50 लाख भूमिहीन परिवारों को मिलेगा। सभी तीन करोड़ परिवारों के बीमा का प्रीमियम सरकार खुद भरेगी।
जबकि, इलाज व बीमा राशि बीमा कंपनी देगी, जिसका चयन सरकार करेगी। मुखिया के साथ ही परिवार के चार अन्य सदस्य भी दुर्घटना बीमा से कवर होंगे। दुर्घटना होने पर इनको इलाज की सुविधा मिलेगी, लेकिन दुर्घटना बीमा की रकम सिर्फ मुखिया की मृत्यु पर उसके नामिनी को दी जाएगी।
गरीबों को इलाज के लिए मिलेंगी सभी सुविधाएं
संस्थागत वित्त एवं सर्वहित बीमा निदेशालय के महानिदेशक शिव सिंह यादव ने बताया कि सूबे में कहीं भी दुर्घटना होगी तो किसान पांच किलोमीटर के भीतर तत्काल किसी भी अस्पताल में अपना इमरजेंसी इलाज करा सकेगा।
बीमा कंपनी इलाज करने वाले अस्पताल को प्रति कृषक 25 हजार रुपये तक प्रतिपूर्ति करेगी। यदि उसे और इलाज की जरूरत है तो उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया जाएगा। वहां 2.25 लाख रुपये तक इलाज मुफ्त मिलेगा।
पैसा इलाज करने वाले चिकित्सा संस्थानों को बीमा कंपनी देगी। यदि दुर्भाग्यवश किसी किसान की दुर्घटना के बाद मृत्यु हो गई तो उसके नामिनी को पांच लाख रुपये की बीमा राशि उसके पहले से दिए गए बैंक एकाउंट में तत्काल जारी कर दी जाएगी। योजना पर हर वर्ष करीब 900 करोड़ रुपये खर्च आने की उम्मीद है।
इस तरह काम करेगा कार्ड
•समाजवादी बीमा केयर कार्ड में नामिनी का नाम पहले से ही दर्ज रहेगा। इससे किसान की मृत्यु के बाद पत्नी को क्लेम मिलने में कोई असुविधा नहीं होगी, कार्ड को बैंकिंग एवं बीमा हेल्पलाइन के 1520 नंबर से जोड़ा जाएगा। इस पर सूचना देने पर तत्काल इलाज मिल सकेगा।
•समाजवादी किसान एवं सर्वहित बीमा मोबाइल एप भी डवलप किया जाएगा। इसमें बीमा से जुड़ी सारी जानकारी उपलब्ध होगी।
•समाजवादी बीमा केयर कार्ड बायोमीट्रिक रिकार्ड के साथ तैयार किया जाएगा, कार्ड की पारदर्शिता के लिए इसे आधार से लिंक किया जाएगा। इससे फर्जी कार्ड नहीं बन सकेंगे।
•कार्ड में नई तकनीक ‘क्यूआर’ कोड का उपयोग किया जाएगा। लाभार्थी का बायोडेटा, ब्लड ग्रुप, बैंक एकाउंट नंबर जैसी सभी जरूरी जानकारी इस कोड में दर्ज होगी। इसको स्कैन करते ही इलाज करने वाले डॉक्टर को किसान के बारे में पूरी जानकारी मिल जाएगी।
•कार्ड में ब्लड ग्रुप दर्ज होने की वजह से यदि किसान दुर्घटना का शिकार होता है तो अस्पताल पहुंचते ही जरूरत होने पर उसे तत्काल खून मिल सकेगा।
ग्लोबल टेंडर से होगा बीमा कंपनियों का चयन
सरकार बड़ी संख्या में बीमा के लाभार्थियों को देखते हुए कई बीमा कंपनियों को यह जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रदेश को अलग-अलग कई क्षेत्रों में बांटा जाएगा व आनलाइन ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किया जाएगा।
टेंडर मंगाने से लेकर बीमा कंपनी के चयन तक का काम किसी कंसल्टेंट से कराया जाएगा, जो सरकार का कोई उपक्रम होगा। पूरी टेंडर प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी होगी व टेंडर डाक्यूमेंट 10 साल तक सुरक्षित रखा जाएगा।
बीमा कपंनियों के काम की छमाही स्तर पर समीक्षा होगी। खराब क्लेम मंजूरी पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने का विकल्प भी रहेगा।