UP : साक्ष्यों के अभाव में बरी किए गए आजम खां, फरवरी 2019 में दर्ज कराई गई थी एफआईआर; जानें पूरा मामला
वादी और पीड़ित ने बयान दिया कि आरोपी आजम के प्रेस रिलीज से शिया सुन्नी धर्म और पीड़ित का कोई नुकसान नहीं हुआ बल्कि कौम की तारीफ हुई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां को सरकारी लेटर पैड और मुहर का प्रयोग कर आरएसएस, भाजपा और शिया नेता कल्बे जवाद की मानहानि के आरोप मामले में एमपी एमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम आलोक वर्मा ने आरोपों से बरी कर दिया।
कोर्ट ने आजम को बरी करते हुए कहा कि विवेचक ने प्रेस से संबंधित संपादक, रिपोर्टर को बतौर गवाह पेश नहीं किया, जो तथ्यों के विषय में प्रामाणिक साक्ष्य दे सकता था। आजम के बेटे अब्दुल्ला समर्थकों के साथ शुक्रवार शाम पांच बजे कोर्ट पहुंचे।
कोर्ट ने आगे कहा कि अभियोजन ने जो भी मानहानि करने वाले कागजात दाखिल किए हैं वे सब मूल रूप में नहीं हैं। ये कानून की नजर में साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जाने योग्य नहीं हैं। कोर्ट ने आगे कहा कि यह स्थापित कानून है कि किसी दस्तावेज की छायाप्रति सर्वोत्तम साक्ष्य नहीं होता और उसके आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि वादी इस मामले का पीड़ित नहीं था और उसके पास पीड़ित व्यक्ति की तरफ से मुकदमा करने की आवश्यक अनुज्ञा भी नहीं थी।
वहीं, वादी और पीड़ित ने बयान दिया कि आरोपी आजम के प्रेस रिलीज से शिया सुन्नी धर्म और पीड़ित का कोई नुकसान नहीं हुआ बल्कि कौम की तारीफ हुई है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने जिन गवाहों को पेश किया वह आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने की जगह उसके पक्ष में ही रहे। वहीं, अभियोजन की तरफ से विवेचना के दौरान की गई त्रुटियां और आवश्यक साक्ष्य को कोर्ट में न पेश करना आरोपी को फायदा पहुंचा गई।
फरवरी 2019 में दर्ज कराई गई थी एफआईआर
वादी अल्लामा जमीर नकवी ने पूर्व मंत्री आजम खां के खिलाफ एक फरवरी 2019 को हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया गया कि 2014 में आजम खां के लेटरहेड पर जारी छह पत्रों में आरएसएस के साथ-साथ शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद और उनके निजी सचिव इमरान नकवी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां थीं।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि सपा सरकार में मंत्री के पद पर रहते हुए आजम ने अपने आधिकारिक लेटर हेड और आधिकारिक मुहर का दुरुपयोग किया। उन्होंने इनका इस्तेमाल न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को बदनाम करने के लिए किया।
वर्ष 2014 की बताई गई थी घटना
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना वर्ष 2014 की है, लेकिन सरकार के प्रभाव के चलते वादी की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसपर वादी ने अल्पसंख्यक आयोग को शिकायत भेज कर आरोप लगाया कि आजम सरकारी लेटर हेड एवं सरकारी मोहर का दुरुपयोग करके भाजपा, आरएसएस एवं मौलाना कल्बे जवाद नकवी को बदनाम कर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छवि धूमिल करके प्रतिष्ठा को घोर आघात पहुंचा रहे हैं।