फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Farmers, railway and state employees will come out in the state against privatization of electricity, dem

यूपी: बिजली के निजीकरण के खिलाफ प्रदेश में उतरेंगे किसान,रेलवे और राज्य के कर्मचारी, सीबीआई जांच की मांग

Sun, 22 Jun 2025 09:04 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 22 Jun 2025 09:04 PM IST
सार

Electricity in UP: यूपी में बिजली के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों के साथ-साथ उन्हें दूसरे विभागों का भी साथ मिलेगा। किसान भी इस विरोध में उतरेंगे। 

विज्ञापन
UP: Farmers, railway and state employees will come out in the state against privatization of electricity, dem
यूपी में बिजली व्यवस्था। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत बिजली कर्मियों ने रविवार को महापंचायत बुलाकर आंदोलन की रणनीति तय की। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संर्घष समिति द्वारा बुलाई गई महापंचायत में यह भी एलान किया कि निजीकरण का टेंडर जारी होते हुए प्रदेश भर में बिजली कर्मियों का जेल भरो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। यह भी तय किया गया है कि 9 जुलाई को देशभर के 27 लाख बिजली कर्मी एक दिन की राष्ट्रव्यापी सांकेतिक हड़ताल भी करेंगे। हड़ताल की तैयारी में 02 जुलाई को देश भर में व्यापक विरोध किया जायेगा।

विज्ञापन


राजधानी के आशियाना स्थित डॉ राम मनोहर लोहिया लॉ कॉलेज के प्रेक्षागृह में आयोजित महापंचायत में देशभर के निजीकरण विरोध करने वाले संगठनों के नेता शामिल हुए। इसमें यह भी चेतावनी दी गई है कि इसके बाद भी प्रबंधन ने फैसला नहीं बदला और टेंडर प्रक्रिया शुरू की तो जेल भरो आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। इसमें बिजली कर्मचारी के साथ ही रेल कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी, किसान और उपभोक्ता भी शामिल होंगे।
विज्ञापन


महापंचायत में प्रस्ताव पारित कर बताया गया कि उड़ीसा, भिवंडी, औरंगाबाद, जलगांव, नागपुर, मुजफ्फरपुर, गया, ग्रेटर नोएडा और आगरा आदि स्थानों पर निजीकरण का प्रयोग पूरी तरह असफल रहा है। इस असफल प्रयोग को उत्तर प्रदेश के 42 जनपदों की बेहत गरीब जनता पर थोपा जा रहा है। आगरा में निजीकरण के असफल प्रयोग से पॉवर कारपोरेशन को प्रति माह एक हजार करोड़ रूपये का नुकसान हो रहा है। टोरेंट पॉवर कम्पनी ने आगरा में पावर कारपोरेशन का 2200 करोड़ रूपये का बिजली राजस्व का बकाया हड़प लिया है और वापस नहीं किया है। अब निजी घरानों की नजर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के 66 हजार करोड़ रूपये राजस्व बकाये पर है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Trending Videos

निजी घरानों को बिजली देने की मंशा

प्रस्ताव में कहा गया है कि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 की धारा 131 के अनुसार सरकारी कम्पनी का निजीकरण करने के पहले उसकी परिसम्पत्तियों का सही मूल्यांकन और राजस्व पोटेंशियल का मूल्यांकन किया जाना जरूरी है। संघर्ष समिति ने कहा कि 42 जनपदों की सारी जमीन मात्र 1 रूपये की लीज पर निजी घरानों को दी जा रही है। यह बड़ी लूट है। उप्र पॉवर ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी केन ने निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति को समर्थन देने का ऐलान करते हुए कहा कि निजीकरण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि निजीकरण के जरिए बिजली उपभोक्ताओं को फिर से लालटेन युग में ले जाने की तैयारी है।

रेल कर्मचारियों के राष्ट्रीय नेता शिव गोपाल मिश्र ने कहा कि यदि उप्र में बिजली कर्मचारियों पर निजीकरण थोपा गया तो सारे देश के रेल कर्मचारी, बिजली कर्मचारियों के साथ प्रदेश की जेलों को भर देंगे। संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दर्शन पाल, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इण्डिया के कार्यकारी निदेशक रमानाथ झा, नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लॉइज एण्ड इंजीनियर्स के संयोजक सुदीप दत्त, ऑल इण्डिया पॉवर डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष आर के त्रिवेदी, ऑल इण्डिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के एके जैन आदि ने संबोधित किया। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों, बैंक कर्मचारियों, राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों के प्रतिनिधियों ने महापंचायत को सम्बोधित किया।

पहली बार व्यापक तौर पर एकजुटता

देश के इतिहास में पहली बार बिजली के निजीकरण के विरोध में किसान, मजदूर, गरीब और मध्यमवर्गीय घरेलू उपभोक्ता एक साथ लामबन्द होकर आन्दोलन और सामूहिक जेल भरो अभियान का फैसला लिया है। महापंचायत में प्रस्ताव पारित किया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बिजली सार्वजनिक क्षेत्र में रहना आवश्यक है। निजीकरण के बाद बहुराष्ट्रीय निजी कम्पनियों के आने से देश की बिजली ग्रिड सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

उत्पीड़न हुआ तो शुरू होगा जन आंदोलन
बिजली कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि आंदोलनरत बिजली कर्मियों का उत्पीड़न किया गया तो किसान, मजदूर और उपभोक्ता एकजुट होकर आन्दोलन करेंगे और निजीकरण का निर्णय वापस होने तक आन्दोलन जारी रखेंगे।

निजीकरण के पीछे भ्रष्टाचार का आरोप

वक्ताओं ने कहा निजीकरण के पीछे बड़े भ्रष्टाचार है । अवैध ढंग से नियुक्त किये गये ट्रांजैक्शन एडवाइजर ग्रान्ट थार्नटन के साथ मिली भगत में पॉवर कारपोरेशन के चेयरमैन, निदेशक वित्त और शासन के कुछ आला अधिकारियों ने आर एफ पी डॉक्यूमेंट बनवाकर विद्युत नियामक आयोग को भेजा था। इसे कई आपत्तियां लगाते हुए विद्युत नियामक आयोग ने वापस कर दिया है जो इस बात का सबूत है कि जल्दबाजी में किये जा रहे निजीकरण के पीछे गलत आकडें देकर भ्रष्टाचार की मंशा है। यह भी मांग की है कि कंसलटेंट की नियुक्ति, बढ़ा चढ़ा कर आरएफपी डॉक्यूमेंट में दिखाया गया घाटा और फर्जी आंकड़ा बनाने वाले अधिकारियों की सीबीआई से जांच कराई जाय।

सीबीआई से जांच कराने की मांग
उप्र पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा किए गए स्थानांतरणों पर बिजली कर्मियों ने आक्रोश व्यक्त किया। मुख्यमंत्री से मांग की है कि पावर कारपोरेशन में हुए बड़े पैमाने पर स्थानांतरण आदेशों के पीछे भ्रष्टाचार को देखते हुए इसकी सीबीआई जांच कराई जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed