इस तरकीब से सुधरेगी यूपी में बिजली व्यवस्था
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केंद्र सरकार के सहयोग से शहरों में बिजली सुधार की योजना को राज्य सरकार की मंजूरी मिल गई है। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में समन्वित विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) के तहत केंद्र सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में बिजली सुधार के लिए स्वीकृत की गई लगभग 3500 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की लागत का 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा बिजली कंपनियों को अंश पूंजी के रूप में उपलब्ध कराने का निर्णय किया गया।
इसके साथ ही योजना के वित्त पोषण के लिए बिजली कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले ऋण में से राज्य सरकार उतने हिस्से की ही गारंटी लेगी, जिस सीमा तक केंद्र सरकार ऋण राशि को अनुदान में परिवर्तित करेगी।
गौरतलब है कि 30 हजार से अधिक आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में पुनरीक्षित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार योजना (आर-एपीडीआरपी) के अंतर्गत 11वीं एवं 12वीं पंचवर्षीय योजना में केंद्र विद्युत नेटवर्क के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण तथा लाइन हानियां कम करने के लिए आर्थिक सहायता दे रहा है। योजना में प्रदेश के 167 शहरी क्षेत्र शामिल हैं।
इस नई योजना से बेहतर होगी बिजली व्यवस्था
इस योजना के भाग-‘ए’ में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित बिलिंग व्यवस्था, एनर्जी ऑडिट, जीआईएस मैपिंग तथा भाग- ‘बी’ में वितरण नेटवर्क के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण तथा 12 शहरों में स्काडा स्थापित करने का कार्य किया जा रहा है। 3 दिसंबर 2014 को बिजली मंत्रालय ने आईपीडीएस की घोषणा की थी।
इसके शुरू होने के बाद पहले से चली आ रहीआर-एपीडीआरपी भी आईपीडीएस में समाहित हो गई है। इस नई योजना में शहरी क्षेत्रों में 33/11 केवी नए उपकेंद्रों एवं लाइनों का निर्माण एवं क्षमता वृद्धि, 11 केवी एवं एलटी लाइनों का निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण, फीडर, ट्रांसफार्मर एवं उपभोक्ताओं के परिसरों में स्मार्ट मीटर तथा सामान्य मीटर लगाने, जीआईएस उपकेंद्रों का निर्माण तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था शामिल है।