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UP Local Body Elections : निगम चुनाव में भाजपा-सपा के बीच रहा मुकाबला, कुछ ऐसा दिख रहा है लाभ-हानि का गणित
Fri, 12 May 2023 05:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 12 May 2023 05:43 AM IST
सार
वर्ष 2017 में अलीगढ़ और मेरठ नगर निगम में काबिज रही बसपा, सपा के मुस्लिम वोट में सेंध लगाने से ज्यादा मुकाबले में कहीं टक्कर देती नजर नहीं आई।
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Up nikay chunav, निकाय चुनाव, यूपी चुनाव
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
नगर निकाय चुनाव के दूसरे चरण में सात नगर निगम में भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला दिखा। वहीं, वर्ष 2017 में अलीगढ़ और मेरठ नगर निगम में काबिज रही बसपा, सपा के मुस्लिम वोट में सेंध लगाने से ज्यादा मुकाबले में कहीं टक्कर देती नजर नहीं आई। मेरठ और बरेली में मुस्लिम वोट बंटने का फायदा भाजपा को मिलता दिख रहा है। वहीं, अलीगढ़ में मुस्लिम वोट नहीं बंटने से सपा ने स्थिति मजबूत बनाई है।
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दूसरे चरण के चुनाव में अयोध्या, अलीगढ़, मेरठ, बरेली, शाहजहांपुर, गाजियाबाद और कानपुर नगर निगम चुनाव में महापौर पद के लिए चुनाव हुआ। वर्ष 2017 में अलीगढ़ और मेरठ को छोड़कर शेष पांच नगर निगम में भाजपा का कब्जा था। बृहस्पतिवार को हुए मतदान में अयोध्या, बरेली, शाहजहांपुर और कानपुर में भाजपा और सपा के बीच ही मुकाबला दिखा। हालांकि 13 मई को साफ होगा कि लोकसभा चुनाव के पूर्वाभ्यास में कौन दल मैदान में टिकता है और कौन बाहर होता है।
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अयोध्या- भाजपा और सपा के बीच मुकाबला
अयोध्या नगर निगम चुनाव में महापौर पद पर भाजपा के प्रत्याशी गिरीश पति त्रिपाठी और सपा के आशीष पांडेय दीपू के बीच सीधी टक्कर दिखी। मतदान के दौरान प्रत्याशी व समर्थक लाख पैर पकड़ते रहे लेकिन मतदाताओं ने अपना मुंह नहीं खोला। इस खामोशी ने राजनीतिक दलों के माथे पर पसीना ला दिया है। एक तरफ जहां चुनाव रोचक बन पड़ा है, वहीं बागी प्रत्याशियों ने भी थोड़ा-बहुत खेल खराब किया है।
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बरेली- मुस्लिम वोट बंटा लेकिन जंग भाजपा-सपा के बीच
बरेली में फर्जी मतदान को लेकर सपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। पुलिस को झड़पें शांत कराने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। कई जगहों पर मुस्लिम वोट सपा और बसपा के बीच बंटता दिखा। पर, महापौर चुनाव में भाजपा के डॉ. उमेश गौतम और सपा समर्थित डॉ. आईएस तोमर के बीच सीधा मुकाबला हुआ। बसपा और कांग्रेस तीसरे और चौथे नंबर की लड़ाई लड़ते नजर आए। चुनाव नतीजे ही बताएंगे कि डॉ. उमेश लगातार दूसरी बार महापौर बनते हैं या बरेली की जनता डॉ. आईएस तोमर पर एक बार फिर से विश्वास जताती है।
शाहजहांपुर- भाजपा-सपा में कांटे का मुकाबला
शाहजहांपुर नगर निगम में पहली बार हुए मतदान में भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला हुआ। मुस्लिम बहुल नगर निगम क्षेत्र में भाजपा की अर्चना वर्मा और कांग्रेस की माला राठौर में से पहली महापौर कौन बनेगी यह तो शनिवार दोपहर तक ही पता चलेगा। लेकिन बसपा से शगुफ्ता अंजुम और कांग्रेस से निकहत इकबाल मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में होने के बाद भी मुस्लिम वोटों का ज्यादा बंटवारा नहीं दिखा। कुछ इलाकों में कांग्रेस के प्रति रुझान दिखा लेकिन बसपा मुकाबले में तीसरे और चौथे नंबर के लिए संघर्ष करती नजर आई।
गाजियाबाद- भाजपा को बढ़त मिलती दिखी
गाजियाबाद नगर निगम में महापौर पद के चुनाव में छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान शांतिपूर्ण हुआ। भाजपा ने जनता और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को भांपते हुए गाजियाबाद में महापौर प्रत्याशी बदलकर सुनीता दयाल को मौका दिया। चुनाव के दौरान इसका असर भी देखने को मिला। भाजपा की सुनीता दयाल और सपा समर्थित पूनम यादव के बीच हुए मुकाबले में कुछ जगह भाजपा को बढ़त मिलती दिखी। जबकि कुछ जगह सीधा मुकाबला होता नजर आया। बसपा की निसारा खान कहीं कहीं सपा के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाती नजर आई। मतदाताओं की नजर है कि गाजियाबाद नगर निगम में भाजपा ही काबिज रहती है या किसी अन्य दल का भी खाता खुलेगा।
अलीगढ़- ध्रुवीकरण पर हुआ चुनाव
अलीगढ़ नगर निगम में महापौर चुनाव ध्रवीकरण पर हुआ। भाजपा ने राष्ट्रवाद के नारे के बूते हिन्दू वोट बैंक में अधिक से अधिक वोट हासिल करने में ताकत लगाई। वहीं ध्रवीकरण के कारण मुस्लिम वोट सीधे सपा के पक्ष नजर आया। भाजपा ने उद्योगपति प्रशांत सिंघल पर दांव लगाया है, वहीं सपा ने पूर्व विधायक जमीर उल्लाह, बसपा ने सलमान शाहिद को मैदान में उतारा। कम मतदान प्रतिशत ने भगवा टोली की चिंता बढ़ाई है। मुस्लिम वोट बैंक नहीं बंटने के कारण भाजपा और सपा के बीच ही कांटे का मुकाबला होने के आसार हैं।
मेरठ- मुस्लिम वोट बंटने से भाजपा का पलड़ा भारी
मेरठ नगर निकाय चुनाव में मुस्लिम वोटों में बंटवारे से भाजपा महापौर प्रत्याशी हरिकांत अहलूवालिया का पलड़ा भारी लग रहा है। हालांकि सपा और एआईएमआईएम उनके लिए चुनौती बन सकते हैं। सपा की तरफ मुस्लिम और अन्य वोटों के अलावा दलित मतदाताओं का भी काफी रुझान नजर आया। वहीं, एआईएमआईएम की तरफ मुस्लिमों का रुझान अप्रत्याशित तरीके से ज्यादा रहा। नगर पालिका मवाना और सरधना और नगर पंचायतों में कहीं सीधा तो कहीं त्रिकोणीय मुकाबला नजर आया। नगर निगम में क्षेत्र में 12,57,440 मतदाता हैं। इन्हीं के हाथों महापौर के भाग्य का फैसला होगा। इनमें करीब एक तिहाई मुस्लिम मतदाता हैं, जिनमें बंटवारा नजर आया। इससे सपा की सीमा प्रधान के अलावा बड़ी संख्या में एआईएमआईएम के प्रत्याशी अनस को वोट करते नजर आए। दलित वोट बसपा से खिसक कर सपा और भाजपा की तरफ जाता दिखाई दिया। वहीं, बाकी हिंदू मतों का ध्रुवीकरण भाजपा के पक्ष में नजर आया लेकिन मतदान प्रतिशत पिछली बार के मुकाबले ज्यादा न हो पाने के कारण मुकाबला तगड़ा भी हो सकता है।
कानपुर- इस बार लड़ाई से बाहर दिखी कांग्रेस
कानपुर नगर निगम महापौर चुनाव में मुकाबला भाजपा की प्रमिला पांडेय और सपा की वंदना बाजपेई के बीच नजर आया। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा का सीधा मुकाबला कांग्रेस से था। इस बार कांग्रेस लड़ाई से बाहर दिख रही है। भाजपा में टिकट बंटवारे से लेकर उपजी नाराजगी मतदान के दिन ज्यादा नजर आई। ब्राह्मण वोटों में सपा की सेंधमारी से पहले जैसी स्थिति इस बार नहीं दिखी। दो दिन पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव के रोड शो के दौरान जिस तरह से सपा प्रत्याशी वंदना बाजपेई के पक्ष में मुस्लिम क्षेत्रों में माहौल बना था, मतदान के दिन अलग ही नजारा दिखा। जाजमऊ जैसे कई मुस्लिम क्षेत्रों में मुसलमानों का रुझान कांग्रेस की ओर रहा।