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यूपी: मानसून की विदाई के बाद लखनऊ की हवा में घुलने लगी धूल, तालकटोरा-लालबाग में प्रदूषण बढ़ा; जानिए कारण

Mon, 26 Oct 2026 07:48 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला, लखनऊ
अमर उजाला, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 26 Oct 2026 07:48 PM IST
सार

मानसून की बारिश थमने के बाद लखनऊ की हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है। सोमवार को छह निगरानी केंद्रों में पांच पर वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में दर्ज हुई। तालकटोरा में एक्यूआई 184 और लालबाग में 162 रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, धूल, वाहनों का धुआं और गिरता तापमान प्रदूषण बढ़ा सकते हैं।

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UP: Dust begins to permeate the air in Lucknow following the withdrawal of the monsoon; pollution levels rise
वायु प्रदूषण के खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

बारिश का दौर थमते ही लखनऊ की हवा फिर बिगड़ने लगी है। धूल और प्रदूषण के कण अब दोबारा हवा में घुलने लगे हैं। सोमवार को शहर के छह निगरानी केंद्रों में पांच पर वायु गुणवत्ता मध्यम से खराब श्रेणी में रही।  तालकटोरा और लालबाग में स्थिति सबसे ज्यादा खराब रही। बीते बृहस्पतिवार को शहर के लालबाग में वायु गुणवत्ता सूचकांक 219 तक पहुंच गया जो ऑरेंज श्रेणी में आता है और फेफड़ों के लिए खराब माना जाता है।

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तालकटोरा में सबसे ज्यादा प्रदूषण

आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को तालकटोरा में एक्यूआई 184 रहा। लालबाग में 162, कुकरैल पिकनिक स्पॉट में 117 और बीबीएयू में 114 दर्ज हुआ। गोमतीनगर में एक्यूआई 77 रहा, जो संतोषजनक श्रेणी में है।

 

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ठंड की आहट के साथ क्यों बिगड़ती है हवा

बारिश थमने के बाद सड़क की धूल, निर्माण कार्यों से निकलने वाले कण और वाहनों का धुआं फिर हवा में बढ़ने लगता है। यही वजह है कि मानसून के बाद एक्यूआई में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। वहीं तापमान गिरने के साथ हवा की रफ्तार कम होने पर प्रदूषक कण तेजी से फैल नहीं पाते। 

सुबह और रात में तापमान कम होने से प्रदूषण जमीन के पास ही फंस सकता है। नमी बढ़ने पर धूल और प्रदूषक कण मिलकर धुंध जैसी स्थिति भी बना सकते हैं।। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सुबह के समय खुले में ज्यादा देर रहने से बचना चाहिए।

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