यूपी: प्रदेश में 175 से दो सौ सीटों पर लड़ना चाहती है कांग्रेस, सपा नेतृत्व को सौंपी गई उम्मीदवारों की सूची
UP elections: यूपी में सपा-कांग्रेस के बीच चल रही गठबंधनों की खबरों के बीच कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि हम 175 से 200 सीटों के बीच चुनाव लड़ना चाहते हैं।
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कांग्रेस और सपा के बीच आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर बातचीत शुरू हो गई है। एक न्यूज एजेंसी के अनुसार कांग्रेस ने उन 175 से अधिक सीटों की एक शुरुआती सूची सपा हाईकमान को सौंपी है, जिन पर गठबंधन के तहत पार्टी अपनी स्थिति मजबूत मानती है और उन सीटों पर वह चुनाव लड़ना चाहती है।
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम पीटीआई एजेंसी को बताया कि यह सूची कुछ दिन पहले समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ साझा की गई थी। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के नेता जल्द ही सीट-बंटवारे की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
गौतम ने कहा कि हमने 175 से 200 सीटों के लिए एक सूची सौंपी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य की 403 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले पार्टी बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि दोनों दलों का नेतृत्व सीट-बंटवारे के तौर-तरीकों को तय करने के लिए एक साथ बैठेगा।
हालांकि, सूत्रों का कहना है कि समाजवादी पार्टी के भीतर कई लोग 175-200 सीटों की मांग करने की कांग्रेस की राजनीतिक ताकत को लेकर आश्वस्त नहीं हैं, भले ही 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे पक्ष में रहे हों।
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यह संशय बेवजह नहीं है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में 1989 के बाद से कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिर रहा है, जब उसने इस सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में आखिरी बार सत्ता संभाली थी। कांग्रेस ने 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अकेले लड़ा था और वह सिर्फ दो सीटें जीत पाई थी, जो 2017 के उसके सात सीटों के प्रदर्शन से भी बदतर था।
साथ मिलकर चुनाव लड़ने का भरोसा
राजेंद्र पाल गौतम ने समझौते को लेकर उम्मीद जताई और जोर देकर कहा कि दोनों दल अगले साल का उत्तर प्रदेश चुनाव मिलकर लड़ेंगे। इस बीच माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस में हुए हालिया नेतृत्व परिवर्तन — जब तत्कालीन अध्यक्ष अजय राय की जगह कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' को कमान सौंपी गई — को भी सीट-बंटवारे को सुगम बनाने के एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
कई लोगों का मानना है कि राय समाजवादी पार्टी के साथ पहले से गठबंधन के पक्ष में नहीं थे और उन्हें लगता था कि चुनाव के बाद का गठबंधन पार्टी के लिए ज्यादा मुफीद रहेगा। हालांकि, कुछ कांग्रेस नेताओं का यह भी मानना है कि चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी द्वारा आराधना मिश्रा को चुनने के पीछे एसपी नेतृत्व के साथ उनके बेहतर संबंध भी एक बड़ा कारण हो सकते हैं।