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यूपी कैबिनेटः औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लिए ‘लैंड पूलिंग’ नीति मंजूर

Wed, 23 Sep 2020 11:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 23 Sep 2020 11:27 AM IST
सार

  • जमीन देने वाले व्यक्ति को 25 विकसित भूमि, पांच वर्ष तक 5,000 रुपये महीने मिलेगा
  • किसानों की सहमति से सड़क किनारे लेंगे भूमि, उद्योग स्थापना के लिए होगा आवंटन

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UP cabinet approved Land Pooling Policy for Industrial Development Authorities
UP Cabinet

विस्तार

प्रदेश सरकार ने औद्योगीकरण के विकास के लिए औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में ‘लैंड पूलिंग’ नीति लागू करने संबंधी प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दे दी है। यह नीति भू-स्वामी को पांच वर्ष तक नियमित 5,000 रुपये आय दिलाने के साथ औद्योगीकरण में हिस्सेदार बनने का अवसर देनी वाली है।  

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लैंड पूलिंग नीति के अंतर्गत औद्योगिक विकास प्राधिकरणों द्वारा अपने विकास क्षेत्र के अंतर्गत न्यूनतम 80 प्रतिशत भूमि किसानों की सहमति से ली जाएगी। यह जमीन न्यूनतम 18 मीटर रोड के निकट 25 एकड़ के भूखंडों के रूप में चयनित कर विकसित की जाएगी। नीति के अंतर्गत भू-स्वामी पांच वर्ष अथवा विकसित भूखंड प्राप्त होने तक, जो भी बाद में हो, तक क्षतिपूर्ति के संबंध में 5,000 रुपये प्रति एकड़ प्रतिमाह प्राप्त करेगा।
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औद्योगिक विकास विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि औद्योगीकरण के लिए लैंड बैंक बढ़ाने के मकसद से लाई गई यह नीति किसानों व भू-स्वामियों की स्वैच्छिक भागीदारी सुनिश्चित करती है। स्कीम में शामिल किसानों व भूस्वामियों को जहां सुनिश्चित आर्थिक लाभ हागा, वहीं उद्योगों के लिए विकसित भूमि उपलब्ध हो सकेगी। इससे पूंजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और उद्योगों की स्थापना से आर्थिक विकास को गति मिलेगी। औद्योगिक विकास विभाग के नियंत्रणाधीन औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में लैंड पूलिंग नीति लागू होने से उनके अधिसूचित क्षेत्र में इस स्कीम के तहत चिह्नित भूमि लैंड बैंक के रूप में विकसित की जाएगी। इसे उद्योगों व विकास योजनाओं के लिए आवंटित किया जाएगा। उद्योगों की स्थापना से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
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इस तरह होगा भूमि का आवंटन
स्कीम के अंतर्गत किसानों/भूस्वामियों द्वारा दी गई भूमि के क्षेत्रफल के न्यूनतम 25 प्रतिशत के समतुल्य विकसित भूमि भू-स्वामी को श्रेणीवार आवंटित की जाएगी। इसमें विकसित भूमि का 80 प्रतिशत (न्यूनतम 450 वर्ग मी.) भू उपयोग औद्योगिक, 12 प्रतिशत (न्यूनतम 72 वर्ग मी.) आवासीय तथा 8 प्रतिशत (न्यूनतम 48 वर्गमीटर) व्यावसायिक होगा। प्रत्येक भू-स्वामी को उसकेद्वारा दी गई भूमि की विकसित भूमि का अनुपातिक हिस्सा लॉटरी के माध्यम से नि:शुल्क आवंटित किया जाएगा। इसके आंतरिक व वाह्य विकास के लिए भू-स्वामियों को कोई शुल्क नहीं देना होगा।


निष्पक्ष प्रक्रिया से बढ़ेगा लैंड बैंक
औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के लैंड बैंक में वृद्धि के लिए प्रस्तावित लैंड पूलिंग नीति निष्पक्ष प्रक्रिया से क्रियान्वित होगी। प्राधिकरणों द्वारा अपने अधिसूचित क्षेत्र में विकास योजनाओं के लिए भूमि की व्यवस्था इच्छुक भूस्वामियों की भागीदारी से सुनिश्चित की जाएगी।

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