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यूपी : केजीएमयू में बोन बैंक तैयार...अब दूसरों को लग सकेंगी सर्जरी के दौरान निकाली गईं बेकार हड्डियां

Tue, 18 Nov 2025 08:17 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Tue, 18 Nov 2025 08:17 PM IST
सार

विभाग के ही डॉ. कुमार शांतनु ने बताया कि हड्डी बैंक में हड्डी जमा करने से पहले उसकी प्राथमिक जांच की जाती है। इसके बाद वह हड्डी किसी को भी लगाई जा सकती है।

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UP: Bone bank ready in GMU...now useless bones removed during surgery can be transplanted to others.
सर्जरी - फोटो : Freepik.com

विस्तार

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में हड्डी और टिश्यू बैंक बनकर तैयार हो गया है। इसके उपकरण आ चुके हैं। अब इसका लाइसेंस स्वीकृत होने का इंतजार किया जा रहा है। लाइसेंस स्वीकृत होते ही बोन बैंक की सुविधा शुरू हो जाएगी। केजीएमयू में हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि सरकारी क्षेत्र में यह प्रदेश का पहला हड्डी और टिश्यू बैंक है। कई बार गंभीर रूप से घायल मरीजों में हड्डी का कुछ हिस्सा निकालना पड़ता है। 

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इसका कोई उपयोग नहीं होने से उसे निस्तारित कर दिया जाता है। वहीं, कई बार ऐसे मरीज भी आते हैं, जिनमें हड्डी का कुछ हिस्सा बेहद क्षतिग्रस्त हो जाता है और उस स्थान पर दूसरी हड्डी लगाने की जरूरत होती है। हड्डी उपलब्ध न होने पर 10 से 15 हजार क्यूबिक मिलीमीटर की दर से विशेष पदार्थ खरीदकर वहां लगाना पड़ता है। हड्डी बैंक शुरू होने पर यह काम निकाली गई हड्डियों से हो सकेगा। इसका लाइसेंस मिलते ही प्रत्यारोपण शुरू हो जाएगा।

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सर्जरी के दौरान निकाली गईं हडि्डयां आएंगी काम

प्रो. आशीष कुमार ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान काटकर निकाली गई हड्डियां अन्य मरीजों के काम आ सकेंगी। अभी तक ये हड्डियां बेकार हो जाती थीं। बैंक बन जाने पर लंबे समय तक उन्हें सुरक्षित रखा जा सकेगा और जरूरतमंदों को लगाया जा सकेगा।

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किसी को भी लगाई जा सकती है हड्डी

विभाग के ही डॉ. कुमार शांतनु ने बताया कि हड्डी बैंक में हड्डी जमा करने से पहले उसकी प्राथमिक जांच की जाती है। इसके बाद वह हड्डी किसी को भी लगाई जा सकती है। वहीं, अन्य प्रत्यारोपण के मामले में इस बात का ध्यान रखना होता है कि संबंधित अंग प्राप्तकर्ता को रिएक्शन न करे। इस लिहाज से हड्डी का प्रत्यारोपण सुरक्षित है, क्योंकि इसमें इस तरह के किसी संक्रमण की आशंका नहीं रहती है।

माइनस 80 डिग्री के तापमान पर सहेजी जाती है हड्डी

प्रो. आशीष कुमार के अनुसार, हड्डी को माइनस 80 डिग्री के तापमान पर रखा जाता है। यहां जमा हड्डी और टिश्यू किसी भी जरूरतमंद को लगाए जा सकते हैं।

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